शारीरिक, रसायनिक और भावनात्मक किसी भी तरह की प्रतिक्रिया बच्चों को अवसाद में डाल सकती है। बेहद ज्यादा उलझन वाली स्थिति होने पर भी बच्चे अवसाद में चले जाते हैं। कहीं ऐसा तो नहीं आपकी वजह से आपके बच्चे अवसाद में जी रहे हों और आपको अंदाजा तक न हो। दरअसल, अवसाद सिर्फ बड़ों को ही नहीं घेरता बल्कि बच्चों को भी अपना शिकार बनाता है। अवसाद की वजह से जिस तरह बड़े टूट जाते हैं, उसी तरह बच्चे भी भीतर से बिखर जाते हैं। हालांकि, बच्चों में होने वाला सभी तरह का अवसाद उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाता लेकिन अगर बच्चे अभिभावकों की वजह से अवसाद में हैं तो इसके घातक परिणाम हो सकते हैं।
आपका झगड़ा बच्चों को कहीं अवसाद तो नहीं दे रहा?
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अगर किसी घर में पति-पत्नी रोज झगड़ा करते हैं। वहां अलगाव की स्थित बन रही होती है तो इसका बच्चों पर मानसिक और भावनात्मक तौर पर बेहद गहरा प्रभाव पड़ता है। बच्चे अवसाद से घिर जाते हैं और उनके बाल मन पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं होने लगती हैं। मां-बाप की वजह से होने वाला अवसाद बच्चों को अकेला कर देता है। उनके भीतर परिवार, भविष्य और रिश्तों को लेकर डर भर देता है। इसलिए, अगर आपकी वजह से आपके बच्चे अवसाद में जी रहे हैं तो पारिवारिक कलह से उनको दूर रखें।
इसके अलावा, घर में किसी की मृत्यु होने और किसी करीबी को खो देने की वजह से भी बच्चे अवसाद में घिर जाते हैं। बच्चे अगर किसी जानवर को घर में प्यार करते हैं और अचानक उसकी मौत हो जाती है तब भी बच्चे भावनात्मक तौर पर अवसाद महसूस करते हैं लेकिन इन सबमें सबसे ज्यादा खतरनाक अवसाद घरेलू हिंसा की वजह से होना है।