दीपिका शर्मा
ADHD Disorder: बहुत ज्यादा उछलता-कूदता है आपका बच्चा तो इस रोग से हो सकता है पीड़ित, जानें लक्षण और उपचार
एडीएचडी यानी अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर। यह बच्चों को प्रभावित करने वाले सबसे आम मानसिक विकारों में से एक है।
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क्या है एडीएचडी
एडीएचडी यानी अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर। यह बच्चों को प्रभावित करने वाले सबसे आम मानसिक विकारों में से एक है। यह एक न्यूरो डेवलपमेंटल विकार है। इस बीमारी से पीड़ित बच्चे में ध्यान केंद्रित करने की कमी, अतिसक्रियता और आवेगशीलता के लक्षण पाए जाते हैं। अधिकतर यह कुछ बदलावों से बचपन में ही ठीक हो जाता है, लेकिन कभी-कभी बड़े होने तक भी सक्रिय रहती है। ऐसे में बच्चे के विकास के लिए इसका समय पर निदान और उचित प्रबंधन बहुत जरूरी है। एडीएचडी के मुख्य रूप से तीन प्रकार होते हैं- संयुक्त प्रस्तुति, अतिसक्रिय/आवेगपूर्ण प्रस्तुति और असावधान प्रस्तुति।
कब होती है यह समस्या
एडीएचडी की समस्या अक्सर प्री-स्कूल या केजी तक के बच्चों में देखी जाती है। कुछ बच्चों में किशोरावस्था में यह स्थिति और गंभीर हो सकती है, तो कई बार यह समस्या वयस्कों को भी परेशान करती है। एडीएचडी से पीड़ित बच्चे में असावधानी और अतिसक्रियता, दोनों के लक्षण होते हैं। मसलन, बिना अनुमति के दूसरों का सामान ले लेना या उनके काम में बाधा डालना। साथ ही दूसरों की बात न सुनना, बस अपनी बातों को ऊपर रखना, बिना वजह चिल्लाना इनकी आदत बन जाता है।
माता-पिता के लिए संकेत
बच्चा किसी भी कार्य पर लंबे समय तक ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता। हमेशा अत्यधिक ऊर्जा से भरा रहता है और शांत नहीं बैठ पाता। बच्चा अक्सर अपने काम को शुरू तो करता है, लेकिन उसे पूरा नहीं कर पाता। उदाहरण के लिए, वह खेलते समय एक खिलौने को छोड़कर दूसरे की ओर भागता है। बच्चा दूसरों के साथ खेलते समय समस्याएं दिखा सकता है, जैसे कि दोस्तों से झगड़ा करना, उनकी बात न सुनना या खेल के नियमों का पालन न करना।
प्रबंधन और चिकित्सा उपचार
एडीएचडी का निदान एक योग्य चिकित्सक या मनोचिकित्सक ही कर सकता है। इसके लिए डॉक्टर परिवार का इतिहास, गर्भावस्था और प्रसव के दौरान की जानकारी, बच्चे के शुरुआती विकास, शिक्षा, सामाजिक संबंध और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की जानकारी लेते हैं, ताकि पता लगाया जा सके कि समस्या आनुवांशिक तो नहीं है। फिर इसके जरिए उसे आत्मनियंत्रण और सकारात्मकता का गुण सिखाया जाता है, ताकि बच्चा सामाजिक और शैक्षिक समस्याओं का सामना कर पाने में समर्थ बने।