कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण कई जोड़े यह पता लगाने को मजबूर हैं कि क्या सचमुच दूरियां बढ़ने से प्यार बढ़ता है। कोरोना वायरस का प्रसार रोकने के लिए सरकारों की कोशिशों ने कई प्रेमियों को दूर कर दिया है और यह भी तय नहीं है कि वे फिर कब मिल सकेंगे।
कोरोना के दौर में इश्क: बंद सरहदों के आर-पार, यहां हर रोज मिलता है प्यार
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दो मीटर का फासला
सप्ताह में कई बार वे कोन्स्तांज और क्रुजलिंगन को अलग करने वाले जर्मन-स्विस बॉर्डर पर आते हैं, जहां सीमा को अलग करने के लिए बाड़ लगा दी गई है। आंद्रिया का कहना है कि स्काइप पर बात करने में वो बात नहीं है जो मार्कस को अपने सामने देखने में है "भले ही हम 2 मीटर की दूरी पर हों"।
उनकी मुलाकात में आंद्रिया को अपने कुत्ते नीरो को भी सहलाने का मौका मिलता है। पार्सन रसेल टेरियर नस्ल का उनका कुत्ता सात साल का है। आम तौर पर वह दोनों के घरों में आता-जाता रहता है लेकिन वैश्विक महामारी के चलते वह स्विट्जरलैंड में फंसकर रह गया है।
आंद्रिया और मार्कस ऐसे अकेले जोड़े नहीं हैं। असल में, हाल के एक वीकेंड पर 100 से ज्यादा जोड़े कोन्स्तांज-क्रुजलिंगन बॉर्डर पर एक-दूसरे से मिलने पहुंचे। गर्मी बढ़ने से आने वाले दिनों और हफ्तों में वहां और प्रेमी जोड़े पहुंच सकते हैं।
कोरोना वायरस से जुड़ी यात्रा पाबंदियों से पहले 2009 से ही लोग क्रुजलिंगन और कोन्स्तांज के बीच अबाध रूप से आने-जाने के लिए आजाद थे। क्रुजलिंगन के मेयर थॉमस नीडरबर्गर का कहना है कि दोनों शहर एक-दूसरे में मिल गए हैं। कई निवासी रोजाना वहां आते-जाते रहते हैं। यह एक बड़े शहर जैसा लगता है जिसके बीच से एक अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा गुजरती है।
यात्रा पाबंदी लगने पर शुरुआत में वहां कमर तक ऊंची बाड़ लगाई गई थी। सीमा के दो तरफ खड़े लोग अपने प्रियजनों से गले मिलते थे और किस करते थे। अब वहां एक दूसरी बाड़ लगा दी गई है ताकि लोगों के बीच सुरक्षित दूरी बनी रहे। सरहद पर रोमांटिक मुलाकात का मौका सिर्फ क्रुजलिंगन-कोन्स्तांज के स्थानीय लोगों को आकर्षित नहीं कर रहा।
मुलाकात के लिए तरसता प्यार
कुछ लोग दूर से भी वहां आते हैं। ऐसे ही लोगों में शामिल हैं नताशा डेमैटिस जो एक घंटे से ज्यादा गाड़ी चलाकर कोन्स्तांज आती हैं ताकि मीका रोथ से दो मीटर की दूरी पर बैठ सकें। डेमैटिस और रीथ इंटरनेट पर मिले थे। वे असल जिंदगी में मुलाकात की योजना बना रहे थे तभी यात्रा प्रतिबंधों की घोषणा हो गई।
डेमैटिस का कहना है कि सरहद पर मुलाकात यह जानने का एकमात्र तरीका था कि उनके बीच की केमिस्ट्री क्या वास्तव में उतनी ही अच्छी है जितनी फोन पर लगती थी। पहली मुलाकात में वे छह घंटे तक बाड़ के दोनों तरफ रहकर बातें करते रहे। फिर उन्होंने अपने रिश्ते को आगे बढ़ाने का फैसला किया, भले ही वे एक-दूसरे से 2 मीटर के फासले पर हों।
डेमैटिस इन हालात को बेतुका बताती हैं साथ ही यह भी मानती हैं कि इससे उन्हें एक-दूसरे को गहराई से समझने का मौका मिला है। यह सिर्फ शारीरिक आकर्षण नहीं है। कोई नहीं जानता कि सरहद दोबारा कब खुलेगी। डेमैटिस और रोथ बेसब्री से बाड़ के बगैर मुलाकात का इंतजार कर रहे हैं। वह कहती हैं कि यदि कोई जरिया हो तो हम सबसे पहले उस मौके को भुनाएंगे। एक अलग सीमा पर जर्मनी के 89 साल के बुजुर्ग कार्स्टन टसेन हैन्सेन और डेनमार्क की 85 साल की इंगा रासमुसेन भी अपनी भावनाओं को साझा करते हैं।
उम्र का भी बंधन नहीं
दो साल पहले उन्हें प्यार हो गया था। तब से उन्होंने हर दिन साथ वक्त बिताया है। रासमुसेन आम तौर पर अपने घर से 15 किलोमीटर दूर सदरलुगम में हैन्सेन के घर में रात बिताती थीं। महामारी फैलने पर उन्होंने अपने-अपने परिवार के करीब क्वारंटीन में रहने का मुश्किल फैसला किया।
जर्मनी और डेनमार्क के बीच सीमा 14 मार्च से ही बंद है, तब भी यह जोड़ा रोजाना एक-दूसरे को देखने आता है। रासमुसेन अपने शहर गैलेहस से ड्राइव करके आती हैं और हैन्सेन सदरलुगम से अपनी बाइक से आते हैं।
एवेन्टॉफ शहर के पास बैरिकेड के दोनों तरफ वे अपनी कुर्सियां लगाते हैं, कॉफी पीते हैं। हैन्सेन कहते हैं कि दोपहर तीन बजे से शाम के पांच बजे तक, चाहे जैसा भी मौसम हो। रविवार को वे थोड़ा जल्दी मिलते हैं। रासमुसेन लंच बनाकर लाती हैं जिसे वे दोनों साथ खाते हैं।