मुझे आज भी याद है, जब एक अजनबी ने मेरी नंगी टांगों को बुरी नजर से घूरा था। ये वाकिया उस वक्त का है, जब गर्मियों के दिन थे और मेरी उम्र 11 बरस भी नहीं थी। मैं घर के पास की ही एक किराने की दुकान पर गई थी। वो आदमी मेरी और मेरी मां के पीछे लाइन में खड़ा था। वो मुझे लगातार ऊपर से नीचे तक घूर रहा था। वो शख्स मेरे पिता की उम्र का रहा होगा लेकिन मुझे उसकी निगाहें बिल्कुल भी दोस्ताना नहीं लगीं। मैं अपनी बाकी सहेलियों के मुकाबले जल्दी बड़ी हो गई थी। मेरे अंग कम उम्र में ही विकसित हो गए थे और मैं अपनी हम-उम्रों से ज्यादा बड़ी नज़र आने लगी थी।
क्यों बढ़ रहे बच्चियों के यौन शोषण के मामले, रिसर्च में हुआ है चौंकाने वाला खुलासा
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मेरा जहन, शरीर में आए इन बदलावों से ताल-मेल बिठाने में मुश्किल महसूस कर रहा था। बड़ी उम्र के मर्दों की घूरती निगाहें मुझे परेशान करती थीं। मैं परेशान हो जाती थी। असुरक्षित महसूस करती थी। मेरे पास से गुजरते अजनबी जब भी चुंबन लेने वाली आवाज़ निकालते, तो मेरा दिल तेज़ी से धड़कने लगता था और कलेजा मुंह को आता था। आज भी अगर मैं अपनी आंखें बंद कर लूं, तो करीब से गुजरती गाड़ियों से आती वो अश्लील और भद्दी आवाजें मुझे आज भी सुनाई देती हैं। मैं फिर से वही दस बरस की बच्ची बन जाती हूं, जो सब के सामने छोटे कपड़े पहनने से डरती हो। अनचाहे भद्दे कमेंट झेलना, खुद को घूरे जाने का तजुर्बा फिर भी दूसरे यौन अपराधों के मुकाबले छोटा मालूम होता है। फिर भी, तमाम स्टडी बताती हैं कि वो किसी बच्चे के लिए बेहद तकलीफदेह हो सकती हैं।
उन्हें मनोवैज्ञानिक चुनौतियों का सामना करने का जोखिम उठाने को मजबूर होना पड़ सकता है। इसका असर उनके जहन पर पूरी जिंदगी रह सकता है। आज #MeToo जैसी मुहिम चलाकर कामकाजी महिलाएं यौन उत्पीड़न के प्रति आवाज बुलंद कर रही हैं लेकिन बच्चों का यौन उत्पीड़न आज भी ज्यादा चर्चा में नहीं है जबकि आज ये मुद्दा इतना अहम हो गया है कि इस पर चर्चा की सख्त जरूरत है। वजह साफ है। आज कल लड़कियां बड़ी कम उम्र में सयानी हो रही हैं। सयाने होने से मतलब ये कि आज लड़कियों की माहवारी बहुत कम उम्र में शुरू हो रही है। उनका शारीरिक विकास बहुत तेजी से कच्ची उम्र में ही होने लगा है। जैसे कि 1970 के दशक में अमरीका में बच्चियों के स्तनों के विकास की औसत उम्र 12 बरस हुआ करती थी। साल 2011 की एक स्टडी बताती है कि आज अमरीका में बच्चियों के अंगों के विकास की औसत उम्र घटकर 9 बरस रह गई है।
एक शोध से पता चला है कि अमरीका में 18 फीसद गोरी, 43 प्रतिशत अश्वेत गैर-हिस्पैनिक और 31 फीसद हिस्पैनिक लड़कियों का मासिक धर्म नौवां जन्मदिन आते-आते शुरू हो जाता है। अब इसकी वजह क्या है इस पर रिसर्च अभी भी हो रही है। लेकिन कम उम्र में लड़कियों के शरीर का विकास होने की वजह से आज 6 से 8 बरस की बच्चियों के यौन शोषण का खतरा बढ़ गया है। जो लड़कियां कम उम्र में सयानी हो जाती हैं, उनके यौन उत्पीड़न का खतरा अपनी हम-उम्र उन लड़कियों के मुकाबले बढ़ जाता है जिनके अंगों का विकास देर से होता है। कम उम्र में सयानी होने वाली लड़कियों पर हम उम्र लड़कों की भी निगाहें होती हैं और उन्हें उम्र में बड़े वयस्कों की भी बुरी नजरों का सामना करना पड़ता है। कई बार तो ऐसी बच्चियों को जान-बूझकर निशाना बनाया जाता है।
लड़के या लड़कियां दोनों ही अगर वक्त से पहले जवान होने लगते हैं तो उनके यौन शोषण का जोखिम बढ़ जाता है। ब्रिटेन में बीबीसी की एक रिसर्च से पता चला है कि 6 साल की उम्र तक के बच्चों को स्टेशनों और रेल गाड़ियों में यौन उत्पीड़न का शिकार बनाया गया। अमेरिका के ओरेगन की रहने वाली कैरी जुएर्गेंस को आज भी 11 बरस की उम्र में हुआ एक हादसा याद है। तब वो अपने परिवार के साथ एक वाटर पार्क गई थीं। एक उम्रदराज शख्स ने कैरी का पीछा एक हॉट टब तक किया। उसने टब में अपना हाथ कैरी के ठीक पीछे रखा। फिर वो कैरी से बातें करने लगा। पूछने लगा कि 'तुम कितने बरस की हो, किस स्कूल में पढ़ती हो'। कैरी बताती हैं कि वो उस शख्स से बचने के लिए वाटर पार्क के तमाम हिस्सों में भागती फिरने लगीं लेकिन वो आदमी उनका पीछा करता रहा और उन्हें गुदगुदाने की कोशिश करता रहा।