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Take Care Tips: खुद के लिए वक्त निकालना इतना भी मुश्किल नहीं, ये टाइम मैनेजमेंट का मामला है
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवानी अवस्थी
Updated Wed, 17 Apr 2024 03:47 PM IST
सार
कामकाजी महिलाओं के लिए तब भी छुट्टी के दिन आते हैं, लेकिन गृहिणी के लिए कोई छुट्टी नहीं होती। वह सातों दिन, चौबीसों घंटे काम करती रहती है। सबको अपने-अपने काम पर भेजने के बाद लगता है कि सारा समय अब उसका ही है, मगर उनके जाते ही दूसरे काम शुरू हो जाते हैं, जिनका कोई अंत नहीं।
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लक्ष्मी कुमारी
सप्ताह के अंत में जब परिवार के सारे सदस्य घर पर होते हैं, तब आप क्या करती हैं? क्या घर में या बाहर लगातार काम करने के बाद सप्ताह के अंत में आपको खुद के लिए समय मिल पाता है? क्या खुद से खुद की मुलाकात हो पाती है? यह टाइम मैनेजमेंट का मामला है। लगातार काम करते हुए खुद के लिए समय निकालें। ऐसा करना आपके लिए संभव है।
सुबह उठते ही चाय! बच्चों के स्कूल के लिए लंच बॉक्स तैयार करना! फिर पति के लिए ब्रेकफास्ट और लंच, फिर अंत में अपने लिए लंच। ये सब मात्र डेढ़-दो घंटे में करना होता है और उसके बाद ऑफिस के लिए मारामारी। ऑफिस में दिन भर खपने के बाद शाम को घर पहुंचते ही फिर वही चाय और खाने की चिंता! कब रात हो जाती है, पता ही नहीं चलता। फिर सुबह की चिंता। यही मिसेज प्रतिभा की दिनचर्या है। दिनचर्या क्या, यही उनकी जिंदगी है। अपने लिए समय ही नहीं है और जो थोड़ा-बहुत समय मिलता भी है, वह मोबाइल के खाते में चला जाता है। अपने लिए समय न मिलने की यह समस्या अकेले मिस प्रतिभा जी की नहीं है, ‘आधी दुनिया’ की है, जहां अपने लिए समय निकालने की गुंजाइश ही नहीं है। ऐसा सिर्फ महिलाओं के साथ ही है, वरना पुरुषों एवं बच्चों को अपने लिए खूब समय मिलता है और वे इसका अपने तरीके से इस्तेमाल भी करते हैं। लेकिन महिलाओं के मामले में यह अपना समय या तो होता ही नहीं है या फिर होता है तो इतना कम कि उसके होने का अहसास तक नहीं होता।
मिसेज प्रतिभा तो कामकाजी हैं, लेकिन डॉली गृहिणी हैं। कामकाजी महिलाओं के लिए तब भी छुट्टी के दिन आते हैं, लेकिन गृहिणी के लिए कोई छुट्टी नहीं होती। वह सातों दिन, चौबीसों घंटे काम करती रहती है। सबको अपने-अपने काम पर भेजने के बाद लगता है कि सारा समय अब उसका ही है, मगर उनके जाते ही दूसरे काम शुरू हो जाते हैं, जिनका कोई अंत नहीं। अपने लिए जो समय हो सकता था, वह कब हाथ से फिसल जाता है, पता ही नहीं चलता।
महिलाओं के लिए सप्ताहांत अपना होते हुए भी अपना नहीं होता है, लेकिन थोड़ी-सी कोशिश और सही प्लानिंग से आप अपने लिए वक्त निकाल सकती हैं और इस सप्ताहांत को अपना बना सकती हैं। आप वह सब कुछ कर सकती हैं, जो हमेशा से करने के बारे में सोचती थीं। कई बार हम कहीं न कहीं सबको समय देते हुए खुद को भूलने लगते हैं, जिससे सारी समस्याएं शुरू होती हैं और जिसका बच्चों की परवरिश पर भी बुरा असर पड़ता है। इसलिए खुद को वक्त न देने से आपके ऊपर ही नहीं, बल्कि आस-पास और जिन्हें आप प्यार करती हैं, उन पर भी असर दिखने लगता है, जो आगे चलकर एक समस्या का रूप ले लेता है और कभी-कभी रिश्ते टूटने का भी कारण बनता है।
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छोटी-सी शुरुआत
संतुलित जीवन जीना जितना औरों का अधिकार है, उतना आप का भी है। इसलिए सबसे अच्छा तरीका है, खुद को छोटे-छोटे चैलेंज देना। ये छोटी चुनौतियां अपनी फिटनेस या फिर कोई नई चीज सीखने से शुरू हो सकती हैं। बस जरूरत है एक छोटी-सी शुरुआत की। आप अपने इस समय को चाहें तो आधा घंटे से शुरू कर एक घंटे या अधिक समय तक बढ़ा सकती हैं। कुछ नया करने या सीखने के लिए हमारा दिमाग हमेशा तैयार रहता है। अपने लिए कुछ भी नया करते रहने से आपका मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है, जिससे आप कुछ नया सीख पाती हैं और यह समय आपको अपना मी टाइम लगने लगता है।
संडे टाइम, मी टाइम
पहले हम सभी के लिए रविवार यानी संडे एक खास दिन होता था। इसका सभी इंतजार करते थे, खासकर महिलाएं। इस दिन काम कम नहीं होता था, मगर यह उम्मीद रहती थी कि घर के सभी सदस्य थोड़ा-बहुत हाथ बटाएंगे! सभी घरों में अच्छे-अच्छे पकवान बनते थे, जिसके लिए बच्चे-बुजुर्ग सभी इंतजार करते थे। सब लोग मिल-बैठकर एक-दूसरे को सुनते थे, एक-दूसरे को प्रोत्साहित करते थे और मौज-मस्ती करते थे। क्या यह सब अब नहीं हो सकता? हो सकता है, अगर आप ठीक से समय प्रबंधन करें तो। इसके लिए बस आप को सप्ताहांत को प्लान करना है।
इस दिन आप ग्रुप गेम खेल सकती हैं, जिससे यह सप्ताहांत आप सभी का मी टाइम बन जाएगा और आप सभी कहीं न कहीं तनाव और अवसाद से भी दूर रहेंगे। आप का यह सप्ताहांत अच्छा रहेगा तो आने वाले दिन भी अच्छे ही गुजरेंगे। इस एक दिन अगर आपके तन-मन से थकान उतर जाएगी तो फिर आपको किसी थेरेपिस्ट की भी जरूरत भी नहीं पड़ेगी।
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मनोरंजन के साथ कुछ नया
देखा गया है और कई सर्वे भी बताते हैं कि महिलाएं अपना खाली समय सबसे अधिक मोबाइल पर बिताती हैं। आप मोबाइल पर बिताने वाले इस वक्त में से कुछ समय ऑनलाइन सीखने के लिए निकाल सकती हैं। मोबाइल को अपने फ्री टाइम में इस्तेमाल करना अच्छा विकल्प है, लेकिन कितना अच्छा हो कि आप कुछ सीख सकें, जो आगे चलकर आपकी स्किल को बेहतर बनाने में मदद करे। इसके लिए सबसे अच्छा है कि आप कुछ अधूरा सोचा हुआ सपना पूरा करें और जो फील्ड आपको पसंद है, उसमें अपनी जानकारी को और ज्यादा बढ़ाएं। आजकल ढेर सारे कोर्सेस ऑनलाइन उपलब्ध हैं, वह भी बिल्कुल फ्री। यूट्यूब पर आज चैनलों की भरमार है, जिनमें होममेकर से लेकर कामकाजी महिलाएं अपने टैलेंट को दिखाकर खूब नाम और पैसा कमा रही हैं। यह आप भी कर सकती हैं, बस आपको अपने मी टाइम में सही और अपनी हॉबी के अनुसार चीजों का चुनाव करना है।
थोड़ा-सा समय चुरा लें
काम कभी खत्म नहीं होते और समय आपके पास हमेशा नहीं होता। ऐसे में थोड़ा-सा वक्त आप अपने ऐसे कामों के लिए निकाल सकती हैं, जो दो-चार मिनट में किए जा सकते हैं। अगर आप कोई किताब पढ़ रही हैं या कोई वेब सीरीज देख रही हैं तो ब्रेक लेकर मेडिटेशन, एक गिलास पानी या जूस पीना, डीप ब्रीदिंग, अपने लिए कुछ लिखना, कलरिंग जैसे बहुत से काम कर सकती हैं। अगर कुछ समझ न आए तो कुछ भी नहीं करना भी खुद को रिलैक्स और तरोताजा करने का अच्छा तरीका है।
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प्री-प्लानिंग
खुद के लिए वक्त निकालने या समय का सही और भरपूर उपयोग करने के लिए बेहद जरूरी है प्री प्लानिंग यानी पूर्व योजना बनाना। हर दिन अपने लिए समय निकालने के बाद आप खुद को अच्छी तरह व्यवस्थित कर पाएंगी। जीवन में खुद के लिए क्या चाहती हैं, यह महसूस कर पाएंगी, क्योंकि कई बार देखा गया है कि सही योजना न होने की वजह से हम समय पर काम पूरा नहीं कर पाते और सब कुछ बिखरने लगता है, जिससे हमारा दिमाग भी उलझ कर रह जाता है। साथ ही हमारी अपनी इच्छाओं का दम घुटने लग जाता है। कुछ समय बाद हम सबको टालने लगते हैं और सब कुछ शुरू होने से पहले ही खत्म हो जाता है। तभी तो आप अक्सर यह कहती हैं कि “सप्ताहांत कितना जल्दी निकल गया।” ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि हम करना कुछ और चाहते हैं और बिना किसी योजना के कुछ का कुछ हो जाता है। इसलिए सब कुछ नहीं तो कुछ-कुछ प्री-प्लान करिए!
खुद को वक्त देना जरूरी
गाजियाबाद में रहने वाली श्वेता सिंह गृहिणी हैं, उनका कहना है, मेरे लिए मी टाइम निकालना खुद को रिचार्ज करने जैसा है। भागदौड़ भरी जिंदगी में, चाहे वह ऑफिस गोइंग हो या होममेकर, एक हेल्दी माइंड के लिए खुद को समय देना बहुत जरूरी है। यह बस थोड़ा प्रयास और समय प्रबंधन के साथ किया जा सकता है, जैसे कि मैं सुबह की शुरुआत मेडिटेशन और योग से करती हूं, फिर बच्चों के स्कूल और पति के ऑफिस जाने के बाद घर का काम खत्म कर अपनी पसंद से डांस, पेंटिंग या रीडिंग करती हूं। कभी-कभी शाम की चाय के साथ मैं अपने काम का विश्लेषण करती हूं, जिससे मुझे ऊर्जा मिलती है। सप्ताहांत के दिन भी मैं ये सब करती हूं और अपने परिवार को भी समय देती हूं। कभी-कभी पार्लर, स्पा और वेब सीरीज भी मूड चेंज करने का साधन हो सकते हैं, जो गलत नहीं है। इसलिए एक पॉज बटन अपने लिए जरूरी है, ताकि आप रिफ्रेश रहें और पॉजिटिव माइंड से आगे बढ़ें।
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भरता है ऊर्जा
कैंसर विशेषज्ञ डॉ. रेखा आर्य बताती हैं, एक कैंसर विशेषज्ञ होते हुए भी मी टाइम को प्राथमिकता देना मेरे लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। ऑन्कोलॉजी में काम करना भावनात्मक रूप से थकने वाला हो सकता है, इसलिए मी टाइम गतिविधियों को शामिल करना तनाव रोकने और भावनात्मक थकान को कम करने में मदद करता है। इससे मेरे शारीरिक, मानसिक और आत्मिक स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित होता है।
वीकेंड के दिन मनपसंद गतिविधियों में शामिल होना, जैसे कि खाना पकाना, सेल्फकेयर, अपनों के साथ समय बिताना, यात्रा करना, दोस्तों के साथ मजेदार बातचीत और ध्यान मुझमें ऊर्जा को भरने का काम करता है। मी टाइम हमें मानसिक पुनर्जीवन और ताजगी प्रदान करता है। मेरे लिए मी टाइम को प्राथमिकता देना मेरे सहयोगियों और रोगियों के लिए एक सकारात्मक उदाहरण स्थापित करता है और दूसरों को भी खुद को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित करता है।
स्वयं का आकलन करता है
प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. पूजा सिन्हा का कहना है, हर व्यक्ति का समय बिताने का अपना तरीका होता है। कुछ अपने शौक का आनंद लेते हैं, कुछ आध्यात्मिक दुनिया की सैर पर चले जाते हैं। मेरा मी टाइम खुद के बारे में सोचने, पुराने गाने सुनने, अपने दोस्तों के साथ बात करने में यानी बस मुझे अपनी उम्र के लोगों से बात करने में खुशी मिलती है और इससे मेरे मन को शांति मिल जाती है। ऐसा करने से मुझे तनाव और अवसाद को कम करने में मदद मिलती है। हर किसी को अपने व्यस्त कार्यक्रम में से कुछ मिनट या घंटे खुद के लिए जरूर निकालने चाहिए। इससे आपके आने वाले दिन और जीवन को सर्वोत्तम तरीके से जीने की योजना बनाने में भी मदद मिलती है। यह स्वयं का आकलन करने, आपका संघर्ष, ताकत और कमजोरी पहचानने में भी मदद करता है।
एक सुंदर सुकून
मनोवैज्ञानिक प्रतिभा सिंह कहती हैं, मी टाइम का अर्थ है कुछ समय खुद के लिए निकालना। दिन भर की आपाधापी में खुद के लिए कुछ समय निकालना आपकी मानसिक सेहत के लिए बूस्टर डोज का काम करता है। यह समय आप अपनी पसंद और सुविधा के हिसाब से बिताएं, जैसे कि नृत्य, संगीत, कला, किताबें पढ़ना या कुछ लिखना यानी जो भी कार्य आपको खुशी देते हो, उनको करें। ऐसा करने से स्वयं को आत्मसंतुष्टि और आनंद की प्राप्ति होती है। मी टाइम अपने जीवन में एक अच्छे बदलाव दे सकता है, जैसे कि तनाव कम करना, मन शांत कर चिड़चिड़ेपन को दूर करना, जिससे कुंठा कम होती है। यह आपके सपनों और लक्ष्य की प्राप्ति में मदद कर सकता है, क्योंकि आप अधिक सकारात्मक और स्वयं में अधिक ऊर्जा महसूस कर पाती हैं।
इससे आप महसूस कर सकती हैं कि आप भावनात्मक रूप से पहले से अधिक मजबूत और संतुलित हैं। इससे आपको रिश्तों से अच्छा फीडबैक मिलेगा और आपके रिश्ते पहले से अधिक बेहतर हो जाएंगे। इससे रिश्तों में सूझ-बूझ, व्यवहार कुशलता और सामंजस्यता पहले से अधिक बढ़ेगी। कम थकान और आपकी बढ़ती कार्यकुशलता, आत्मसंतुष्टि आपको एक सुंदर सुकून देगी, इसलिए अपने जीवन में एक नहीं, प्रतिदिन स्वयं के लिए कुछ समय निकालें और खुद के साथ रोमांटिक डेट का लुफ्त उठाएं।
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