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Thaipusam 2021: क्यों मनाया जाता है थाईपुसम त्योहार? जानें इसे मनाने के पीछे क्या है लोगों की आस्था

लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रकाश चंद जोशी Updated Thu, 28 Jan 2021 12:55 PM IST
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thaipusam festival today What is the recognition of Thaipusam festival
thaipusam festival - फोटो : istock

हर समुदाय, हर धर्म के अपने कई ऐसे त्योहार होते हैं, जिनके साथ उनकी अट्टू आस्था होती है। भारत में अलग-अलग धर्मों द्वारा ऐसे ही कई त्योहार मनाए जाते हैं, जिसमें लोगों की आस्था साफ झलकती है। फिर चाहे वो दीपावली का त्योहार हो या फिर ईद हो। ऐसे ही कई त्योहार हैं जिन्हें भारत के लोग बड़ी ही धूमाधाम से मनाते हैं। इन्हीं में से एक त्योहार है थाईपुसम । भारत ही नहीं कई अन्य देशों के लोग भी इस त्योहार को बड़े ही उत्साह के साथ मनाते हैं। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में कई खास बातें।

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thaipusam festival - फोटो : istock

क्या है थाईपुसम?

  • दरअसल, थाईपुसम भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र भगवान कार्तिकेय (भगवान मुरुगन) के तमिल भक्तों द्वारा मनाया जाने वाला त्योहार है। ये त्योहार पूर्णमणी तीथि (पूर्णिमा के दिन) में मनाया जाता है, जो उत्तर भारत में सौर कैलेंडर के अनुसार मकर महीने के साथ होता है। थाईपुसम शब्द में थाई और पुसम शब्द शामिल हैं, जहां पुसम का अर्थ नक्षत्रम पुसम (जिसे पुष्य भी कहा जाता है) है। ये त्योहार भारत, मलेशिया, इंडोनेशिया, श्रीलंका और दुनिया के कई अन्य देशों में बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस साल ये 28 जनवरी 2021 को मनाया जा रहा है। पुसम नक्षत्र 28 जनवरी को सुबह 3 बजकर 49 बजे शुरू हुआ और 29 जनवरी को 3 बजकर 51 बजे समाप्त होगा, और ये इस त्योहार को मनाने का सही समय माना गया है।
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thaipusam festival - फोटो : istock

कवाड़ी अट्टम, थाईपुसम समारोह की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है। लोग एक अर्ध-वृत्ताकार लकड़ी का वाहक बनाते हैं जो भक्तों द्वारा भगवान मुरुगन के लिए चढ़ाए जाने वाले प्रसाद के लिए इस्तेमाल किया जाता है। कई भक्त अपने सिर को ढंकते हैं और नंगे पांव चलते हैं क्योंकि वो इस कावड़ी को अपने कंधे पर लेकर चलते हैं। श्रद्धा और भक्ति के साथ कावड़ी को ले जाने पर नाचने की रस्म को कवाड़ी अट्टम कहा जाता है।

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thaipusam festival - फोटो : istock

कुछ लोग दूध से बने बर्तन भी अपने सिर पर रखते हैं। वहीं, जो लोग त्योहार मनाते हैं और विशेष रूप से कावड़ी ले जाने वाले भक्त ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं, एक व्रतम का पालन करते हैं और केवल शाकाहारी खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं। जबकि कवाड़ी अट्टम थाईपुसम की सबसे विशिष्ट विशेषताओं में से एक है। इसके जरिए ये लोग परमात्मा में अपने अटूट विश्वास का प्रदर्शन करते हैं। थाईपुसम को वो दिन माना जाता है जब देवी पार्वती ने अपने योद्धा पुत्र मुरुगन (जिसे सुब्रमण्यम/ शनमुगम के नाम से भी जाना जाता है) को वेल (एक दिव्य भाला) उपहार में दिया था, क्योंकि वो सोरापदमन नामक एक दानव के अत्याचार को समाप्त करने के लिए युद्ध के मैदान में गए थे।

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thaipusam festival - फोटो : istock

दानव सोरापदमन इतना शक्तिशाली हो गया था कि देवता उसे हराने में असफल रहे। ऐसे में ब्रह्मांड को बचाने के लिए देवों ने भगवान शिव से मदद मांगी, और उन्होंने बदले में अपनी दिव्य शक्तियों के साथ मुरुगन को जन्म दिया। इस प्रकार ये योद्धा भगवान अस्तित्व में आए। आखिरकार, सोरापदमनन का वध कर दिया गया और दानव की मृत्यु के साथ देवताओं को उनके दुखों से छुटकारा मिला और साथ ही शांति और धर्म को बहाल किया गया। इसलिए भक्त थाईपुसम के दिन भगवान मुरुगन की पूजा करते हैं ताकि उनका आशीर्वाद प्राप्त करें और अपनी परेशानियों से छुटकारा पा सकें।

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