गुरू नानक देव जी के 550वीं जयंती पर सिखों श्रद्धालुओं के लिए करतारपुर कॉरिडोर आज से दर्शन के लिए खुल गया है। सिखों के इस पवित्र धाम में पहले इतनी आसानी से दर्शन करना सुलभ नहीं था। इसलिए पहले लोग करतारपुर के दर्शन दूरबीन से करते थे। तो चलिए जानें करतारपुर गुरुद्वारा सिखों के लिए क्यों इतना पवित्र है और कैसे कर सकते हैं यहां की यात्रा।
करतारपुर गुरुद्वारे की महिमा के साथ ही जानें कैसे पहुंचें पवित्र नगरी
सिखों के प्रथम गुरू नानक देव जी का निवास स्थान था और जीवन के आखिरी समय में वो इसी स्थान पर ज्योति में समा गए थे। तब गुरू नानक देव की स्मृति में यहां पर गुरुद्वारे का निर्माण किया गया था। लेकिन भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद यहां पर जाने के लिए भारतीयों को बहुत लंबी यात्रा करनी पड़ती थी।
करतारपुर साहिब पाकिस्तान के नारोवाल जिले में स्थित है। भारतीय सीमा से महज तीन किमी दूरी पर स्थित है ये जगह। गुरू नानक देव ने अपनी चार प्रसिद्ध यात्राओं को पूरा करने के बाद यहीं पर बाकी के 17 वर्ष गुजारे थे। जीवन के शुरूआती वर्ष में भी नानक साहब यहीं पर थे। और उन्होंने पहला उपदेश भी दिया था।
पहले करतारपुर साहिब की यात्रा करने के लिए भारतीय सिखों को बहुत लंबी यात्रा करनी पड़ती थी।इस स्थल तक जाने के लिए पहले लाहौर जाना पड़ता था उसके बाद वहां से 125 किमी दूर करतापुर साहिब के दर्शन करने के लिए यात्रा करनी पड़ती थी। लेकिन करतारपुर कॉरिडोर बन जाने से अब आसानी से दर्शन हो जाएंगे।
करतारपुर दर्शन पर जाने के लिए आपके पास पासपोर्ट होना जरूरी है। इसके साथ ही दर्शन के एक महीना पहले ही रजिस्ट्रेशन करना जरूरी होगा। करतारपुर साहिब की यात्रा करना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको डेरा बाबा नानक जाना होगा। डेरा बाबा जाने के लिए बहुत सी ट्रेने चलती हैं। जिससे आप गुरुदासपुर पहुंच सकते हैं। अगर आप फ्लाइट से जाएंगे तो दिल्ली से अमृतसर जा सकते हैं। जहां से बस या प्राइवेट साधनों के जरिए डेरा बाबा नानक पहुंच सकते हैं। वहां से महज 4.5 किमी दूर बने करतारपुर गुरुद्वारे में दर्शन के लिए बड़ी ही आसानी से जा सकते हैं।