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पाकिस्तान के मुख्तार की प्रेम कहानी जो शाहीन के इश्क में तमाम दुश्वारियां झेलने को है तैयार

Sun, 23 Feb 2020 03:11 PM IST
निलेश कुमार बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Published by: निलेश कुमार Updated Sun, 23 Feb 2020 03:11 PM IST
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Mukhtar and Shaheen - फोटो : BBC

"अगर यह खुश नहीं रहेंगी तो हम भी खुश नहीं रहेंगे…" ये शब्द पाकिस्तान में रहने वाले मुख्तार अहमद के हैं, जो पाकिस्तान के मुल्तान में अपनी बेगम शाहीन के साथ रहते हैं। शाहीन मानसिक रूप से बीमार हैं और मुख्तार की जिंदगी का हर पल शाहीन की खुशामद में बीतता है।



मुख्तार हर दिन सूरज उगने के साथ ही उठते हैं, अपनी बेगम को नहलाते हैं, बाल बनाते हैं, सुरमा लगाते हैं और तैयार करके अपने साथ ऑटो पर बिठाकर ले जाते हैं। वे अपना और अपनी पत्नी का पेट पालने के लिए ऑटो चलाते हैं लेकिन वे एक पल के लिए भी शाहीन को अपनी आंखों से ओझल नहीं कर सकते।

मुख्तार जब शाहीन की ओर देखते हैं तो उनकी आंखों में शाहीन के प्रति प्रेम की तपिश महसूस होने लगती है। और ये पल साहिर लुधियानवी के बेमिसाल शेर- 'इक शहंशाह ने दौलत का सहारा लेकर, हम गरीबों की मोहब्बत का उड़ाया है मजाक…'की याद दिलाते हैं।

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Mukhtar and Shaheen - फोटो : BBC

अब से 35 साल पहले मुल्तान में रहने वाले मुख्तार अहमद का निकाह शाहीन से हुआ था। निकाह के बाद शाहीन नौ बार गर्भवती हुईं लेकिन हर बार उनका गर्भपात हो गया। हर गर्भपात के साथ शाहीन अपना मानसिक संतुलन खोती जा रही थीं लेकिन बिगड़ती मानसिक सेहत के साथ मुख़्तार ने अपनी बेगम का ज्यादा से ज्यादा ध्यान रखना शुरू कर दिया।

धीरे-धीरे शाहीन की हालत इतनी खराब हो गई कि मुख्तार को अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी, घर छोड़ना पड़ा। मगर उन्होंने इस सबके बावजूद अपनी बेग़म का साथ नहीं छोड़ा। फिलहाल शाहीन की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि वे एक पल भी अकेले नहीं रह सकतीं।

मुख्तार कहते हैं, "कम-ज्यादा दुख-सुख तो जिंदगी में आते ही रहते हैं, लेकिन ऐसा नहीं होता कि जरा की तकलीफ आई और बीवी को छोड़ दिया। इनको घर पर रखने की बात करना ठीक वैसे ही जैसे सूरज को यह बोलना कि इधर से नहीं उधर से निकलो, ये मेरे बगैर नहीं रह सकती।"

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Mukhtar and Shaheen - फोटो : BBC

मुख्तार कहते हैं,  "बच्चों की वजह से इन्होंने बहुत चिंता की। जब आखिरी बच्चा खराब हुआ तो वह पूरे नौ महीने चार दिन का होने के बाद खराब हुआ। उस बात इन्हें बहुत बड़ा झटका लगा।"

"हमारा कहना यह मानती थीं, हम इनका कहना मानते थे और फिर हमारे बीच प्यार हो गया, यहां शादी करने के बाद हम कराची चले गए थे। वर्कशॉप के जरिए हम सही कमाते थे लेकिन जब यह बीमार हुईं तो काम छोड़ना पड़ा। सारा दिन इन्हीं का खयाल रखना पड़ता, कभी रोटी देनी है कभी दवाई देनी है। कभी तेल लगाना है, कंघा करना है, सुरमा लगाना है। कपड़े धोने हैं, खाना पकाना है। हम तो मर्द की जगह औरत बन गए खिदमत करने वाली।"

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Mukhtar and Shaheen - फोटो : BBC

अल्लाह ने मुझे लाखों में एक बीबी दी है
अक्सर ऐसा होता है कि पति या पत्नी की हालत खराब होने पर सगे सम्बंधी दूसरी शादी करने की सलाह देते हैं। मुख़्तार अहमद को भी ऐसे ही सुझावों से दो चार होना पड़ा। वे कहते हैं, "मेरे माता-पिता, दोस्त यार और रिश्तेदार कहते थे कि कहीं और शादी कर लो, लेकिन अल्लाह ने मुझे लाखों में एक बीवी दी है। जब कभी कोई बच्चा खराब होता था और डॉक्टर इनके इंजेक्शन लगाते थे तो मुझे बुलाते थे कि बड़े मियां आओ, आपकी लड़की होश में आ गई है। ये अपनी उम्र से 20 साल छोटी लगती हैं।"

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Mukhtar and Shaheen - फोटो : BBC

दुश्वारियों से भरी ज़िंदगी
शाहीन का ख्याल रखते हुए मुख्तार अहमद को तमाम दुश्वारियों का सामना करना पड़ा है। और मुख्तार की जिंदगी में दुश्वारियों का सिलसिला जारी है। लेकिन शाहीन के साथ इश्क की लौ आज भी मुख्तार की आंखों में चमक बनाए हुए है।

मुख्तार बताते हैं, "हम गाय-भैंसों वाली जगह पर रहते हैं, उसके अंदर ही एक कमरा है। एक साल पहले उसकी छत गिर गई तो फिलहाल हम बाहर सोते हैं। हमारे पास दो चारपाइयां हैं, एक पर सामान रखा रहता है और दूसरी पर हम सोते हैं। अगर बारिश आ जाती है तो अपने ऊपर कोई छप्पर ले लेते हैं। हम कपड़े पहनकर ही नहाते हैं क्योंकि हमारे पास कपड़े उतारने की कोई जगह नहीं है। ऊपर वाले की दया से वक्त गुजर गया, अब सर्दियां जाने वाली हैं।"

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