Aata Sata Marriage Custom: भारत के कुछ हिस्सों में आज भी शादी से जुड़ी कई पुरानी सामाजिक प्रथाएं प्रचलित हैं। इन्हीं में से एक है आटा-साटा प्रथा, जिसे कई जगहों पर बदले की शादी भी कहा जाता है। यह परंपरा देखने में भले ही सामाजिक समझौते जैसी लगे, लेकिन इसके पीछे कई गंभीर सामाजिक और मानसिक समस्याएं जुड़ी हुई हैं।
Aata-Sata Pratha: शादी की ये परंपरा तोड़ देती है दो-दो परिवार, जानिए आज भी क्यों जिंदा है आटा-साटा प्रथा
Aata Sata Marriage System: भारत में शादी को लेकर कई कुप्रथाएं प्रचलित हैं, उन्हीं में से एक है आटा-साटा प्रथा, जिसे बदले की शादी भी कहते हैं। इसमें दो परिवार अपनी बेटियों का आदान प्रदान शादी के रूप में करते हैं।
आटा-साटा प्रथा क्या है?
आटा-साटा प्रथा वह व्यवस्था है, जिसमें दो परिवार आपस में लड़का-लड़की की शादी बदले में करते हैं। यानी जब एक परिवार की बेटी दूसरे परिवार में शादी करके जाती है, तो दूसरा परिवार की बदले में अपनी बेटी की शादी बहू के मायके में करता है। दो परिवारों की बेटियां एक दूसरे के घर मे शादी करके जाती हैं। इसमें शादी किसी व्यक्ति की इच्छा से नहीं, बल्कि समझौते और मजबूरी के आधार पर तय की जाती है।
आटा-साटा प्रथा कहां प्रचलित है?
यह प्रथा मुख्य रूप से,
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राजस्थान
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मध्य प्रदेश
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छत्तीसगढ़
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हरियाणा
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पंजाब के कुछ ग्रामीण इलाके में देखने को मिलती है।
खासतौर पर यह परंपरा ग्रामीण और आदिवासी समुदायों में अधिक प्रचलित रही है।
आटा-साटा प्रथा क्यों शुरू हुई?
इस प्रथा के पीछे कुछ सामाजिक और आर्थिक कारण रहे हैं,
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दहेज से बचने की कोशिश
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गरीब परिवारों में शादी का खर्च कम करना
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जाति और समाज के भीतर रिश्ते बनाए रखना
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सामाजिक दबाव और परंपरा का पालन
हालांकि समय के साथ इसके नुकसान फायदे से कहीं ज्यादा साबित हुए हैं।
क्या आटा-साटा प्रथा गैरकानूनी है?
भारत में सीधे तौर पर इसे परिभाषित करने वाला कोई अलग कानून नहीं है, लेकिन,
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जबरन शादी
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घरेलू हिंसा
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महिला उत्पीड़न के मामलों में यह प्रथा कानूनी अपराध के दायरे में आ सकती है।
आटा-साटा प्रथा के नुकसान
महिलाओं की स्वतंत्रता का हनन
इस प्रथा में लड़कियों की राय और इच्छा को नजरअंदाज कर दिया जाता है। उन्हें सिर्फ “लेन-देन” का हिस्सा बना दिया जाता है।
घरेलू हिंसा का खतरा
अगर एक शादी में विवाद होता है, तो उसका असर दूसरी शादी पर भी पड़ता है। कई मामलों में बदले की भावना से,
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मारपीट
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मानसिक प्रताड़ना
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तलाक या अलगाव जैसी स्थितियां पैदा हो जाती हैं।
जबरन रिश्ते निभाने का दबाव
कई बार महिलाएं सिर्फ इसलिए हिंसा सहती रहती हैं क्योंकि अगर वह रिश्ता टूटेगा तो दूसरी शादी भी टूट जाएगी।
बच्चों पर मानसिक असर
इस तरह के तनावपूर्ण रिश्तों का असर बच्चों पर पड़ता है, जिससे
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डर
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असुरक्षा
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मानसिक तनाव जैसी समस्याएं पैदा होती हैं।
कानून और मानवाधिकारों के खिलाफ
आटा-साटा प्रथा,
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महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन है
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समानता और स्वतंत्रता के सिद्धांतों के खिलाफ है
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कई मामलों में घरेलू हिंसा कानून और मानवाधिकार कानूनों से टकराती है
