सोनम लववंशी
स्वाद के साथ हमेशा ही सेहत की जुगलबंदी रही और तभी घर के बने व्यंजन, अचार, मसाले- सब कुछ फिटनेस के लिए ‘हेल्थ कैप्सूल’ का काम करते रहे लेकिन बीते कुछ सालों से जुबान पर स्वाद का रंग कुछ ऐसा चढ़ा है कि लोग, खासकर महिलाएं अपनी सेहत की कीमत पर भी उसको तरजीह दे रही हैं। हालात यह हैं कि फास्ट फूड किशोर उम्र में ही लड़के-लड़कियों को मोटापा दे रहा है, तो कहीं महिलाएं सोशल स्टेटस के चक्कर में डिब्बा-बंद चीजों का इस्तेमाल कर रही हैं।
Lifestyle: कैसा खाना शरीर को पहुंचा सकता है नुकसान? ये जानना है बेहद जरूरी
किचन आपके हाथ में है तो वही पकता है, जो आपको पसंद है लेकिन कभी आपने सोचा है, फिट रहने के लिए आपके शरीर को किस तरह का भोजन चाहिए?
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इसमें दो राय नहीं कि स्वाद ही किसी भोजन को खाने के लिए मजबूर करता है, लेकिन यह भी सच है कि जब रसोई आपके हाथों में है तो आप खुद ही पौष्टिक भोजन को स्वादिष्ट बना सकती हैं। हां, इसके लिए आपको सोशल स्टेटस के मिथ से बाहर निकलना होगा, लेकिन इससे आपके बढ़ते बच्चे को भी अपनी फिटनेस के लिए आर्टिफिशियल सप्लीमेंट्स की जरूरत नहीं पड़ेगी। आखिर आपको ही यह समझना होगा कि सही फिटनेस के लिए आपके शरीर को, बच्चे के शरीर को और पूरे परिवार को किस तरह के भोजन की जरूरत है।
ध्यान देने की बात है कि बीते कुछ सालों में युवाओं का फिटनेस के प्रति लगाव बढ़ा है। यह सही भी है और गलत भी। सही इसलिए कि सेहत के लिए यह जरूरी है और गलत इसलिए कि कुछ युवा अपने जीने के आधुनिक अंदाज का दिखावा करने लगे हैं। जल्द से जल्द खुद को फिट दिखाने और बॉडी बनाने के लिए ब्रांडेड प्रोटीन, पाउडर और कैप्सूल ले रहे हैं, जबकि जानकार कहते हैं कि इनसे बचना बेहद जरूरी है। ये सेहत पर बुरा असर डालते हैं।
बेहतर है कि नेचुरल प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट लें और ज्यादा फैट वाली सामग्री से बच कर रहें। सेहत के जानकार पौष्टिक भोजन, दाल, सब्जियां और फल आदि खाने की सलाह देते हैं।
सैकड़ों सालों की सभ्यता और संस्कृति के इस दौर में भोजन का महत्व सिर्फ हमारे शरीर को पोषण देने भर का नहीं रहा है, बल्कि यह ‘जन्म-भोज’ से लेकर श्राद्ध तक हमारे जीवन से जुड़ा है। इतना ही नहीं, खाना बनाने के पारंपरिक तरीकों के पीछे भी सालों का ज्ञान-विज्ञान छुपा हुआ है। क्षेत्र के मौसम और संस्कृति के अनुकूल खान-पान के तरीकों के पीछे हमारे पूर्वजों का सदियों का ज्ञान और गहन अध्ययन रहा है लेकिन आधुनिकता के इस दौर में खाने का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है।
पाश्चात्य संस्कृति का असर हमारे खाने के साथ-साथ हमारी दिनचर्या में भी देखने को मिलता है। लाइफस्टाइल के नाम पर हम अपनी सेहत से खिलवाड़ करने को उतावले हैं। इसका परिणाम भी गंभीर बीमारियों के रूप में सामने आने लगा है। हार्ट अटैक, ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी बीमारियां आम हो चली हैं।
विश्व के सबसे युवा देश में आज युवक-युवतियां गंभीर बीमारियों की मार से परेशान है। हाईटेक जीवन-शैली ने उनके लिए सब कुछ बदल कर रख दिया है। अब महिलाओं के लिए भी सबसे जरूरी हो गया है नया फैशन और नया शौक! साधारण जीवन जीना तो मानो अब की पीढ़ी भूल ही गई है। लड़कियों और महिलाओं के लिए भी घर के स्वस्थ खाने से कहीं ज्यादा जरूरी अब नया स्वाद हो गया है। सालों तक जिन मसालों की दुनिया दीवानी रही, आज वही मसाले वाला खाना ‘टू मच स्पाइसी’ हो गया है। मूंगफली और घी अब पीनट बटर हो गया है। डिब्बा-बंद चीजें सोशल स्टेटस बन गई हैं।