फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

तस्वीरें: अयोध्या में तीन शताब्दी पहले शुरू हुई थी रामलीला की परंपरा, इन्होंने रखी थी नींव, दूर-दूर से आते थे लोग

Sat, 24 Oct 2020 12:30 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Sat, 24 Oct 2020 12:30 PM IST
विज्ञापन
know about the history of ramleela of ayodhya
रामलीला का मंचन - फोटो : अमर उजाला
रामनगरी में रामलीला मंचन की परंपरा तीन शताब्दी पहले शुरू हुई थी। इसे ही रामलीला का उद्गम स्थल माना जाता है। अब यह रामलीला विश्व के करीब 70 देशों में प्रचलित है। अपने उद्गम स्थली में ही अयोध्या की रामलीला का क्रेज कम होता जा रहा है। राजेंद्र निवास स्वर्गद्वार में अयोध्यास्थ रामलीला महोत्सव समिति द्वारा रामलीला मंचन कराने की परंपरा अयोध्या में रामलीला मंचन को जिंदा रखने में कामयाब दिखती है। भगवदाचार्य स्मारक सदन की लीला भी इस वर्ष बंद हो चुकी है तो वहीं कोरोना के चलते अयोध्या शोध संस्थान द्वारा वर्ष 2004 से चल रही अनवरत रामलीला भी 6 माह से बंद पड़ी है। हालांकि इस वर्ष फिल्मी कलाकारों की लीला जरूर आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। भगवान राम के चरित्र का लीला मंचन कब शुरू हुआ इसका अनुमान लगाना कठिन है लेकिन अयोध्या में रामलीला मंचन की परंपरा लगभग तीन शताब्दी पूर्व शुरु हुई थी। 




 
know about the history of ramleela of ayodhya
- फोटो : अमर उजाला
अवध आदर्श रामलीला मंडल के अध्यक्ष महंत जयरामदास व्यास के शिष्य पत्थर मंदिर के महंत मनीष दास बताते हैं कि रामलीला की सबसे प्राचीन परंपरा की नींव हमारे 8वें दादा गुरु स्वामी माणिक दास ने तीन सौ वर्ष पहले रखी थी। तब मंच की रामलीला नहीं होती थी। हमारे बचपन में केवल राजद्वार पर रामलीला होती थी जो अयोध्या राजा द्वारा कराई जाती थी।
know about the history of ramleela of ayodhya
- फोटो : अमर उजाला
लंका दहन और लक्ष्मण शक्ति की तो लीला अद्भुत होती रही जिसको देखने दूर-दूर से लोग आते थे। सन 1912 में महाराज प्रताप नारायण सिंह उर्फ ददुआ नरेश ने राजद्वार पर रामलीला प्रारम्भ किया। लोग बताते हैं कि यह रामलीला काशी की रामलीला से अच्छी होती थी और अयोध्या के साथ आसपास जिले के लोग रामलीला देखने आते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
know about the history of ramleela of ayodhya
रामलीला - फोटो : अमर उजाला
धीरे-धीरे अरुचि के कारण यह रामलीला अपने अस्ताचल की तरफ बढ़ती रही और 1992 में बंद हो गयी। इसी बीच 1963 में अयोध्या के कुछ संतों ने राजेन्द्र निवास चौराहे पर रामलीला प्रारंभ की, जो साल 1994 तक चली। ठीक 14 वर्ष बाद सन 2008 में यह कमेटी नये कलेवर के साथ आई और वर्तमान में महंत वैदेही बल्लभ शरण शरण की अध्यक्षता में राजेंद्र निवास की रामलीला संचालित है। सन् 1964 में संतों ने विचार करके संत तुलसी दास रामलीला समिति के तत्वाधान में भगवदाचार्य स्मारक सदन में रामलीला का प्रारंभ किया, जो वर्तमान में बंद हो चुकी है।

 
विज्ञापन
know about the history of ramleela of ayodhya
- फोटो : अमर उजाला
प्रशिक्षण के बिना गिरा स्तर 
राजद्वार रामलीला के पात्र रहे और 1995 से केन्द्रीय दुर्गापूजा रामलीला समन्वय समिति के संयोजक धनुषधारी शुक्ल बताते हैं कि मैदानी शैली की रामलीला अब मंच तक ही सीमित होकर रह गई है। आर्थिक कारणों व कलाकारों को स्तरीय प्रशिक्षण न मिल पाना भी रामलीला के ह्रास का कारण बनता जा रहा है। राजद्वार की रामलीला का प्रभाव अयोध्या में ही नहीं वरन बाहर भी था। हजारों की भीड़ होती थी। अब यह लीला बंद हो गई।

 
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed