{"_id":"622b2c66e66d7857cd215936","slug":"bhagoria-in-mp-beginning-from-march-11-bhagoria-haat-will-fill-176-places-maximum-in-dhar-district","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"मप्र में भगोरिया: 11 मार्च से हुई शुरुआत, 176 जगह भरेंगे भगोरिया हाट, सबसे ज्यादा धार जिले में","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मप्र में भगोरिया: 11 मार्च से हुई शुरुआत, 176 जगह भरेंगे भगोरिया हाट, सबसे ज्यादा धार जिले में
Fri, 11 Mar 2022 04:33 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धार
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Fri, 11 Mar 2022 04:33 PM IST
सार
मध्य प्रदेश के पश्चिम क्षेत्र में आदिवासियों के उल्लास और उमंग के पर्व भगोरिया का आगाज 11 मार्च से हो गया है। एक सप्ताह तक चलने वाला यह भगोरिया होलिका दहन के साथ 17 मार्च को खत्म होगा।
विज्ञापन
भगोरिया का आगाज 11 मार्च से हो गया है।
- फोटो : फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मध्य प्रदेश के पश्चिम क्षेत्र में आदिवासियों के उल्लास और उमंग के पर्व भगोरिया का आगाज 11 मार्च से हो गया है। एक सप्ताह तक चलने वाला यह भगोरिया होलिका दहन के साथ 17 मार्च को खत्म होगा।
दिन भर मांदल की थाप, बांसुरी की धुन पर आदिवासी लोकनृत्य करके खुशियां मनाते हैं।
- फोटो : फाइल फोटो
भगोरिया है क्या
होली के पहले हफ्ते में पड़ने वाले साप्ताहिक बाजार को ही भगोरिया हाट कहा जाता है। जब पूरा आदिवासी समाज फसलें काटकर खेती-बाड़ी के कामों से निवृत्त हो जाता है। इसके बाद वो अपनी पारंपरिक वेशभूषा में सज-धज कर उत्साह के साथ पूरे परिवार, दोस्तों के साथ इन हाट में जाते हैं। इस दौरान ढोल-मांदल गूंजते हैं। आदिवासी पारंपरिक लोकनृत्य करते हैं। सातों दिन अलग-अलग जगह इसका आयोजन होता है। आदिवासी बड़ी संख्या में वहां पहुंचते हैं। मेले जैसा नजारा हो जाता है। आदिवासियों की परंपरा के बीच अलग ही उत्साह नजर आता है। अब तो आसपास के शहरों से भी लोग यहां पहुंचने लगे हैं।
होली के पहले हफ्ते में पड़ने वाले साप्ताहिक बाजार को ही भगोरिया हाट कहा जाता है। जब पूरा आदिवासी समाज फसलें काटकर खेती-बाड़ी के कामों से निवृत्त हो जाता है। इसके बाद वो अपनी पारंपरिक वेशभूषा में सज-धज कर उत्साह के साथ पूरे परिवार, दोस्तों के साथ इन हाट में जाते हैं। इस दौरान ढोल-मांदल गूंजते हैं। आदिवासी पारंपरिक लोकनृत्य करते हैं। सातों दिन अलग-अलग जगह इसका आयोजन होता है। आदिवासी बड़ी संख्या में वहां पहुंचते हैं। मेले जैसा नजारा हो जाता है। आदिवासियों की परंपरा के बीच अलग ही उत्साह नजर आता है। अब तो आसपास के शहरों से भी लोग यहां पहुंचने लगे हैं।
अलग-अलग इलाकों में लगने वाले बाजार में आदिवासी पारंपरिक अंदाज में सज-धजकर आते हैं।
- फोटो : फाइल फोटो
पहले ये धारणा भी थी कि भगोरिया आदिवासियों का वैलेंटाइन डे होता है। यहां आदिवासी युवतियों को पान खिलाकर शादी के लिए प्रपोज किया जाता था। लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है। यहां आदिवासी अपनी धुन में रहते हैं, टोलियों में आते हैं, मस्ती करते हैं, बाजार करते हैं और लौट जाते हैं।
पुराने लोगों का कहना है कि कई सालों पहले पहाड़ों-जंगलों में बसे आदिवासी क्षेत्रों में संचार तथा यातायात के साधन उपलब्ध नहीं थे। दूर-दूर रहने वाले परिवार, दोस्त से नहीं मिल पाते थे। ऐसी स्थिति में भगोरिया हाट के माध्यम से आपस में एक-दूसरे से मिलकर खुश हो जाते हैं। इस विशेष हाट में सभी आदिवासी सज-धजकर आते हैं। बहुत अधिक संख्या होने से मेला जैसे भर जाता है। मेले रूपी हाट को उत्सव के रूप मे मनाते हैं और दिन भर मांदल की थाप, बांसुरी की धुन पर आदिवासी लोकनृत्य करके खुशियां मनाते हैं। इस दौरान ताड़ी (देशी कच्ची शराब) का भी भरपूर दोहन होता है।
पुराने लोगों का कहना है कि कई सालों पहले पहाड़ों-जंगलों में बसे आदिवासी क्षेत्रों में संचार तथा यातायात के साधन उपलब्ध नहीं थे। दूर-दूर रहने वाले परिवार, दोस्त से नहीं मिल पाते थे। ऐसी स्थिति में भगोरिया हाट के माध्यम से आपस में एक-दूसरे से मिलकर खुश हो जाते हैं। इस विशेष हाट में सभी आदिवासी सज-धजकर आते हैं। बहुत अधिक संख्या होने से मेला जैसे भर जाता है। मेले रूपी हाट को उत्सव के रूप मे मनाते हैं और दिन भर मांदल की थाप, बांसुरी की धुन पर आदिवासी लोकनृत्य करके खुशियां मनाते हैं। इस दौरान ताड़ी (देशी कच्ची शराब) का भी भरपूर दोहन होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
आदिवासियों के लिए ये किसी त्योहार जैसा ही होता है।
- फोटो : फाइल फोटो
धार जिले में सबसे ज्यादा हाट
इस बार मस्तीभरे भगोरिया पर्व की शुरुआत 11 मार्च शुक्रवार से धार जिले के डही क्षेत्र के ग्राम धरमराय व पड़ियाल तथा धामनोद, मनावर, जौलाना से हुई। इस बार जिले का सबसे बड़ा डही का भगोरिया सबसे आखिर में 17 मार्च को आयोजित होगा। बता दें कि होलिका दहन के रोज पड़ने वाला अंतिम भगोरिया खूब भरता है। जिले में केवल डही विकासखंड ही ऐसा है, जहां पूरे सात दिन तक भगोरिया की धूम रहेगी।
इस बार मस्तीभरे भगोरिया पर्व की शुरुआत 11 मार्च शुक्रवार से धार जिले के डही क्षेत्र के ग्राम धरमराय व पड़ियाल तथा धामनोद, मनावर, जौलाना से हुई। इस बार जिले का सबसे बड़ा डही का भगोरिया सबसे आखिर में 17 मार्च को आयोजित होगा। बता दें कि होलिका दहन के रोज पड़ने वाला अंतिम भगोरिया खूब भरता है। जिले में केवल डही विकासखंड ही ऐसा है, जहां पूरे सात दिन तक भगोरिया की धूम रहेगी।
विज्ञापन
इंदौर संभाग के 5 आदिवासी बहुल जिलों के 176 गांव व कस्बों में भगोरिया हाट की धूम रहेगी।
- फोटो : फाइल फोटो
इधर भगोरिया शुरू होते ही आदिवासी बंधु अपनों को बुलावा भेजने लगे हैं, वहीं बाजार में रौनक दिखाई देने लगी है। पलायन पर गए ग्रामीण भी लौटने लगे हैं। व्यापारी वर्ग ने भी भगोरिया के चलते अपनी तैयारियां लगभग पूर्ण कर ली हैं। कुछ व्यवसायियों ने तो आदिवासियों की खास मिठाई माजम बनाकर रख ली है।
