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Madhya Pradesh: देशभर में सबसे ज्यादा बाघों की मौत टाइगर स्टेट एमपी में दर्ज, 2022 से अब तक 27 की मौत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Sun, 24 Jul 2022 10:39 AM IST
सार
Madhya Pradesh: देशभर में सबसे ज्यादा बाघों की मौत टाइगर स्टेट एमपी में दर्ज, 2022 से अब तक 27 की मौत
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मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा बाघों की मौत।
- फोटो : सोशल मीडिया
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देश के टाइगर स्टेट का गौरव प्राप्त मध्यप्रदेश ने बाघों की मौत के मामले में रिकॉर्ड बनाया है। जनवरी 2022 से 15 जुलाई 2022 तक मध्यप्रदेश में 27 बाघों की मौत दर्ज की गई है। ये आंकड़ा अन्य राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने हाल ही में अपनी वेबसाइट पर आंकड़े प्रकाशित किए हैं। जिसके अनुसार, इस साल 15 जुलाई तक, देश में कुल 74 बाघों की मौत दर्ज की गई थी, उनमें से अकेले मप्र में 27 मौतें हुईं। वहीं इस अवधि के दौरान किसी भी राज्य में होने वाली बाघों की मौत में ये आंकड़ा सबसे ज्यादा है। बाघों की मौत के मामले में मध्यप्रदेश पहले स्थान पर है जबकि पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र बाघों की मौत के मामले में दूसरे स्थान पर हैं, जहां इसी अवधि के दौरान करीब 15 बाघों की मौत हुई है। एनटीसीए के आंकड़ों के अनुसार, कर्नाटक में 11, असम में पांच, केरल और राजस्थान में चार-चार, उत्तर प्रदेश में तीन, आंध्र प्रदेश में दो, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में एक-एक बाघ की मौत हुई है। अधिकारियों के अनुसार, क्षेत्रीय लड़ाई, बुढ़ापा, बीमारियां, अवैध शिकार और बिजली का करंट बाघों की मौक के कुछ प्रमुख कारण हैं।
मध्यप्रदेश ने 2018 की जनगणना में देश के 'टाइगर स्टेट' होने का गौरव हासिल किया था। अखिल भारतीय बाघ अनुमान रिपोर्ट 2018 के अनुसार, राज्य में 526 बाघ हैं, जो देश के किसी भी राज्य के मुकाबले सबसे ज्यादा हैं। वहीं, प्रदेश में छह टाइगर रिजर्व कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, सतपुड़ा, पन्ना और संजय दुबरी हैं। इस साल मारे गए 27 बाघों में से नौ नर और आठ मादाएं थीं। अन्य मामलों में, डेटा में जानवरों के लिंग का उल्लेख नहीं किया गया था। मृतकों में वयस्क, उप-वयस्क और शावक शामिल हैं। बाघ जंगलों में रहकर प्रजनन और शिकार करते हैं। वे खाद्य श्रृंखला के शीर्ष पर हैं। बाघों की गिनती शीर्ष शिकारियों के रूप में की जाती है। उनकी उपस्थिति एक स्वस्थ और व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करती है।
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बांधवगढ़ में बाघों की जलक्रीड़ा। (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
बाघों की मौत की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए, वन्यजीव और आरटीआई कार्यकर्ता अजय दुबे ने बताया कि पन्ना में लगभग 10 साल पहले कोई बाघ नहीं पाया गया था। उसके बाद, एनटीसीए ने राज्यों को विशेष रूप से शिकारियों से बाघों की सुरक्षा के लिए स्वयं के विशेष बाघ संरक्षण बल (एसटीपीएफ) स्थापित करने की सलाह दी। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र ने एसटीपीएफ को समर्थन देने के लिए बजटीय प्रावधान किए हैं, लेकिन मध्यप्रदेश सरकार ने अभी तक अपने निहित स्वार्थों के कारण इस तरह के किसी भी बल का गठन नहीं किया है। उन्होंने कहा कि अगर यह बल स्थापित हो जाता है तो यह अवैध शिकार के अलावा वन क्षेत्रों में अवैध खनन और पेड़ों की कटाई जैसी अन्य गतिविधियों पर भी रोक लगाएगा। अजय दुबे ने यह भी कहा कि कर्नाटक, ओडिशा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने एसटीपीएफ बनाए हैं और उनके परिणाम कर्नाटक के रूप में दिखाई दे रहे हैं, बाघों की एक बड़ी आबादी होने के बावजूद, मध्यप्रदेश की तुलना में बाघों की मृत्यु दर कम है।
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बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघिन तारा, दो शावकों के साथ (फाइल फोटो)
- फोटो : सोशल मीडिया
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) वन्यजीव, जे एस चौहान ने कहा, बाघों की मृत्यु की अधिक संख्या इस तथ्य के कारण है कि मध्यप्रदेश में देश में बाघों की आबादी सबसे ज्यादा है। इससे उनकी मौत की संख्या भी स्वाभाविक रूप से अधिक है। बाघों के बीच क्षेत्रीय लड़ाई को टाला नहीं जा सकता क्योंकि यह उनके लिए एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि बुढ़ापा एक और मुद्दा है। उन्होंने कहा कि वन विभाग केवल अवैध शिकार को रोकने की कोशिश कर सकता है और वह हमेशा ऐसा करने का प्रयास करता है। एसटीपीएफ के गठन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश पहला राज्य है जिसने इसे मंजूरी दी है, लेकिन अभी तक किसी तरह इसका गठन नहीं हुआ है। वहीं उन्होंने इस वर्ष राज्य में लगभग 120 बाघों के जन्म का अनुमान लगाया, हालांकि सटीक गणना की पुष्टि नहीं की जा सकी।
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