{"_id":"62209e3e712e8f43351daebe","slug":"chhatarpur-this-public-representative-who-is-saving-the-art-and-culture-of-bundelkhand-feeds-by-playing-the-traditional-musical-instrument-ramtula","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"छतरपुर: बुंदेलखंड की कला-संस्कृति को सहेज रहा ये जनप्रतिनिधि, पारंपरिक वाद्ययंत्र रमतूला बजाकर करता है भरण पोषण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छतरपुर: बुंदेलखंड की कला-संस्कृति को सहेज रहा ये जनप्रतिनिधि, पारंपरिक वाद्ययंत्र रमतूला बजाकर करता है भरण पोषण
Thu, 03 Mar 2022 04:23 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Thu, 03 Mar 2022 04:23 PM IST
सार
छतरपुर जिले के अतरार जनपद से सदस्य दुलीचंद्र बंशकार बुंदेली वाद्य यंत्र रमतूला बजाकर कला और संस्कृति को सहेज रहे हैं। जनप्रतिनिधि होने के बावजूद भी वे अपने परिवार का भरण पोषण रमतूला बजाकर करते हैं।
विज्ञापन
रमतूला बजाते दुलीचंद्र बंशीकार
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मध्य प्रदेश के छतरपुर में जनपद सदस्य दुलीचंद्र बंशकार बुंदेलखंड अंचल के एक ऐसे जनप्रतिनिधि हैं, जिन्होंने नेता बनने के बाद भी अपना पैतृक काम नहीं छोड़ा। वे आज भी शादियों और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में जाकर पारंपरिक वाद्य यंत्र रमतूला बजाते हैं और उससे होने वाली आय से अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं।
जनपद सदस्य बनने के बाद भी नहीं छोड़ा रमतूला बजाना
- फोटो : अमर उजाला
रमतूला बन चुका है पहचान
जब उनसे पूछा गया कि जनप्रतिनिधि बनने के बाद भी वे रमतूला बजाकर गुजारा कर रहे हैं क्या उन्हें शर्मिंदगी महसूस नहीं होती, तो बड़ी सादगी से जवाब देते हुए दुलीचंद्र बंशकार ने कहा कि कोई भी काम छोटा नहीं होता। मेरे पुरखे रमतूला बजाया करते थे। यह वाद्ययंत्र ही मेरी पहचान है। क्षेत्र के लोग भी मुझे इसी के जरिए जानते हैं। उन्होंने कहा कि मैं अपने क्षेत्र अतरार जनपद के लोगों की समस्याओं को भी हल करता हूं और उनकी मदद भी करता हूं। वहीं, क्षेत्र के लोग दुलीचंद्र की सादगी और सरलता की तारीफ करते हैं।
रमतूला को लेकर प्रचलित हैं कई किवदंतियां
बुंदेली वाद्य यंत्र रमतूला को लेकर अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। शंख की तरह इसे बजाने की भी ट्रिक होती है। हर व्यक्ति के लिए इसे बाजाना आसान नहीं होता। गुजरे दौर में इसे राजा महाराजाओं के यहां बजाया जाता था।
शुभ कार्यों में बजाया जाता है रमतूला
- फोटो : अमर उजाला
पॉजिटिव एनर्जी का होता है संचार
रमतूला ऐसा वाद्य यंत्र है, जिसे बजाने से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। शुद्ध तांबे से निर्मित इस यंत्र को बजाने के पीछे तांत्रिक, साइंटिफिक रीजन भी हैं। बुंदेलखंड में रमतूला को बजाकर शुभ और धार्मिक कार्यों की शुरुआत की जाती है। वहीं, इसे बजाने वाला वादक इसके एवज में पैसे पारिश्रमिक के तौर पर नहीं बल्कि प्रसाद से तौर पर ग्रहण करता है। यह शंख की तरह पवित्र और पूज्य भी माना जाता है।
