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Navratri 2025: कभी निकलती थी सवारी, अब नवरात्रि में मिलते हैं मां के दर्शन, क्यों साल भर बंद रहता है ये मंदिर?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Sun, 28 Sep 2025 11:12 AM IST
सार

अंग्रेजी शासन के दौरान 21 दिन तक यह प्रतिमा पुराने थाने में भी रखी गई थी। तब से माता की प्रतिमा को मंदिर से बाहर नहीं निकाला जाता और साल में केवल दो बार भक्तों को दर्शन मिलते हैं।

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Navratri 2025 Damoh Temple Where Devotees Get Darshan of Goddess During Navratri
भारत माता दुर्गा देवालय। - फोटो : अमर उजाला

दमोह शहर के फुटेरा फाटक के पास स्थित भारत माता दुर्गा देवालय में मां जगत जननी की मिट्टी की प्राचीन प्रतिमा है, जो करीब 180 साल पुरानी है। मातारानी साल में दोनों नवरात्र में ही अपने भक्तों को दर्शन देती हैं और नवरात्र में ही मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। बाकी के दिनों में मंदिर के कपाट बंद रहते हैं। एक समय अंग्रेजों ने चल समारोह रोक दिया था और मातारानी की प्रतिमा 21 दिन तक पुराने थाने में रखी रही थी।


 

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Navratri 2025 Damoh Temple Where Devotees Get Darshan of Goddess During Navratri
भारत माता दुर्गा देवालय। - फोटो : अमर उजाला
शारदीय नवरात्र और चैत्र नवरात्र में ही भक्तों को मातारानी के दर्शन मिलते हैं। शारदीय नवरात्र के पहले दिन विधि विधान से पूजन के साथ मंदिर के कपाट खोले गए। यहां नौ दिनों तक भजन संकीर्तन, पूजन और हवन होगा। कन्या भोज भंडारा के साथ नवरात्र के बाद मंदिर के कपाट बंद हो जाएंगे।

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Navratri 2025 Damoh Temple Where Devotees Get Darshan of Goddess During Navratri
भारत माता दुर्गा देवालय। - फोटो : अमर उजाला
180 साल पुरानी है प्रतिमा
मंदिर की स्थापना सन 1851 में पंडित हरप्रसाद भारत ने की थी। वर्तमान में मंदिर में उनकी ही पीढ़ी के पुजारी पंडित शांतनु भारत गुरुजी हैं। मातारानी की यह प्रतिमा विशुद्ध रूप से मिट्टी से बनी हुई है। जिले की यह पहली दस भुजाधारी प्रतिमा है। जो शूल से राक्षस का संहार करती नजर आती हैं। वहीं, इस प्रतिमा के दाएं एवं बाएं माता रानी की गणिकाएं भी विराजमान हैं। इस प्रतिमा का निर्माण दमोह जिले के हटा में किया गया था। उस समय माता रानी की इस प्रतिमा को दमोह बैलगाड़ी से लाया गया था।
Navratri 2025 Damoh Temple Where Devotees Get Darshan of Goddess During Navratri
भारत माता दुर्गा देवालय के बंद कपाट। - फोटो : अमर उजाला
छह माह में एक बार खुलता है माता का दरबार
माता रानी का यह दरबार साल में दो बार खुलता है। चैत्र एवं क्वार के नवरात्र में ही इस दरबार के दर्शन हो पाते हैं। जब 1851 में माता की प्रतिमा की स्थापना की गई तो मां की प्रतिमा को दशहरे के अवसर पर शहर में भ्रमण के लिए निकाला जाता था, लेकिन साल 1944 में दमोह के द्वारका प्रसाद श्रीवास्तव ने गौ हत्या का विरोध करके आंदोलन चलाया था। तब दशहरा चल समारोह के बीच में अंग्रेजों ने जुलूस पर रोक लगा दी। उसके बाद करीब 22 दिन तक मातारानी की यह प्रतिमा पुराना थाने में रखी रही थी। वहीं, प्रतिमा का लगातार पूजन किया गया। इसी दौरान पुजारी ने मां से प्रार्थना की और कहा कि मां अब यह प्रतिबंध हटवा दो अब कभी भी आपकी प्रतिमा को मंदिर से बाहर नहीं निकाला जाएगा। तब ब्रिटिश अफसरों ने रोके गए जुलूस को आगे बढ़ने का फरमान सुना दिया। मां के चमत्कार के बाद माता की इस प्रतिमा को तब से मंदिर में स्थापित कर दिया गया और आज तक यह प्रतिमा यहीं पर विराजमान है।

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