फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

मध्य प्रदेश की जानलेवा घास: कान्हा नेशनल पार्क के पास युवा बाघ को लगी घास से चोट, इंफेक्शन की वजह से गई जान  

Wed, 23 Feb 2022 07:23 PM IST
रवींद्र भजनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंडला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंडला Published by: रवींद्र भजनी Updated Wed, 23 Feb 2022 07:23 PM IST
सार

मंडला जिले में स्थित कान्हा नेशनल पार्क के पास दो साल की बाघिन की मौत हो गई। घास की वजह से उसके दिल में चोट आई थी, जिससे इंफेक्शन हुआ और युवा बाघिन की मौत हो गई। 
 

विज्ञापन
Deadly grass of Madhya Pradesh: Young tigress got hurt by grass near Kanha National Park, died due to infection
मंडला में मारी गई बाघिन का शव। - फोटो : सोशल मीडिया
मंडला के कान्हा नेशनल टाइगर पार्क के पास मोहगांव प्रोजेक्ट डिविजन में दो साल की बाघिन का शव मिला है। जांच में पता चला कि घास की वजह से बाघिन के दिल में चोट आई थी। इससे उसे इंफेक्शन हुआ और यह ही मौत का कारण बना। यह बहुत ही दुर्लभ मामला है। 
Deadly grass of Madhya Pradesh: Young tigress got hurt by grass near Kanha National Park, died due to infection
मोहगांव प्रोजेक्ट के क्षेत्र में ही बाघिन का शव बरामद हुआ था। - फोटो : सोशल मीडिया
राज्य सरकार के वन विकास निगम मोहगांव प्रोजेक्ट के डिविजनल मैनेजर राकेश कोपड़े ने बताया कि बाघिन के शरीर में 10 इंच की घास मिली है। इस इलाके में बाघिन के मूवमेंट की जानकारी मिली थी। निगम के चौकीदार ने मंगलवार सुबह 10 बजे ही अपने अधिकारियों को इस युवा बाघिन की मौत होने की सूचना दी। जब अधिकारी वहां पहुंचे तो उन्हें शव बरामद हुआ। शुरुआती जांच में उन्हें लगा कि यह कोई तीर हो सकता है। बाद में पता चला कि वह एक दुर्लभ स्थानीय घास है। 
Deadly grass of Madhya Pradesh: Young tigress got hurt by grass near Kanha National Park, died due to infection
मंडला के जंगलों में उगने वाली टाइगर ग्रास, जिसे झाड़ू घास भी कहते हैं। - फोटो : सोशल मीडिया
एक अधिकारी ने बताया कि इस घास को स्थानीय लोग कथई कहते हैं, जिसे आम तौर पर टाइगर ग्रास या फूलझाड़ू घास भी कहते हैं। इसका इस्तेमाल आम तौर पर झाड़ू बनाने में होता है। इसका बॉटेनिकल नाम Thysanolaena है। अधिकारियों का अनुमान है कि बाघिन ने जब छलांग लगाई होगी तब घास के नुकीला सिरे से उसे चोट लगी होगी। चोट करीब दस दिन पुरानी है। चोट की वजह से बाघिन कुछ खा नहीं पा रही थी। उसका पेट भी पूरी तरह खाली मिला है। इंफेक्शन की वजह से उसकी मौत हो गई। उसके सभी अन्य अंग यथावत थे। इससे शिकार की आशंका नहीं बनती। एनटीसीए की गाइडलाइन का पालन करते हुए लाश का अंतिम संस्कार किया गया। मंडला में इस महीने में अब तक तीन बाघों की मौत हुई है। 
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed