{"_id":"62526a93a1414d6fd151ad3a","slug":"famous-places-of-madhya-pradesh-where-ram-came-during-his-exile","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"रामनवमी: वनवास काल में मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों से गुजरे थे भगवान राम, जानिए कौन से हैं वो प्रसिद्ध स्थान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रामनवमी: वनवास काल में मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों से गुजरे थे भगवान राम, जानिए कौन से हैं वो प्रसिद्ध स्थान
Sun, 10 Apr 2022 02:27 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Sun, 10 Apr 2022 02:27 PM IST
सार
रामनवमी: वनवास काल में मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों से गुजरे थे भगवान राम, जानिए कौन से हैं वो प्रसिद्ध स्थान
विज्ञापन
मध्य प्रदेश के वो स्थान जहां आए थे भगवान राम
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भगवान राम माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ जब 14 वर्ष के वनवास के लिए अयोध्या से निकले थे, तब उन्होंने देश के कई स्थानों की यात्रा की थी। वनवास काल के दौरान भगवान राम उत्तर भारत, मध्य भारत और दक्षिण भारत के कई स्थानों पर रूके और कई ऋषि मुनियों से मिले थे। वनवास काल के दौरान मध्य प्रदेश के कई स्थलों में भी भगवान राम के आगमन और रुकने के प्रमाण मिलते हैं। आइए आपको एमपी के ऐसे ही प्रसिद्ध स्थलों के बारे में बताते हैं, जहां 14 वर्ष के वनवास काल के दौरान भगवान राम के चरण पड़े थे।
सतना जिले के चित्रकूट में वनवास काल में रूके थे राम।
- फोटो : अमर उजाला
जबलपुर
मध्य प्रदेश के जबलपुर में भी भगवान राम के आने के साक्ष्य मिलते हैं। कहा जाता है कि भगवान राम यहां जाबाली ऋषि से मिलने पहुंचे थे। वनवास काल के दौरान भगवान राम जहां भी रूका करते थे वहां के ऋषियों से मिलने के लिए जाया करते थे। जाबालि ऋषि और भगवान राम की मुलाकात को लेकर कहा जाता है कि एक सभा में जाबाली ऋषि ने भगवान राम को संभाषण में बीच में बोलने से रोक दिया था, जिस पर भगवान राम ने जाबालि ऋषि को समझाया कि किसी को बीच में बोलते समय रोकना ठीक नहीं है। इस बात पर जाबाली ऋषि को अपनी गलती का एहसास हुआ और वे सभा बीच में ही छोड़कर पश्चाताप करने के लिए जबलपुर के लिए रवाना हो गए। सभा समाप्त होने के बाद भगवान राम ने जाबाली ऋषि से मिलने का सोचा लेकिन तब तक वे जा चुके थे। तब भगवान राम ने अपनी दिव्य दृष्टि से जाबाली ऋषि को देखा, तो पाया कि वे जबलपुर में हैं, उनसे मिलने के लिए भगवान राम जबलपुर आए लेकिन तब तक जाबालि ऋषि अपनी गलती के लिए पश्चाताप करने समाधि लगा चुके थे। तब भगवान राम ने जबलपुर में ही एक गुफा में रूककर रेत के शिवलिंग का निर्माण कर भगवान शिव की आराधना की थी, जिस जगह पर भगवान राम ने शिव जी की पूजा की थी, वर्तमान में उस जगह को गुप्तेश्वर के नाम से जाना जाता है। वहीं, जबलपुर को लेकर एक बात ये भी कही जाती है कि वर्तमान का महाकौशल ही त्रेतायुग का कौशल क्षेत्र है, जो कि भगवान की माता कौशल्या का पीहर है।
मध्य प्रदेश के जबलपुर में भी भगवान राम के आने के साक्ष्य मिलते हैं। कहा जाता है कि भगवान राम यहां जाबाली ऋषि से मिलने पहुंचे थे। वनवास काल के दौरान भगवान राम जहां भी रूका करते थे वहां के ऋषियों से मिलने के लिए जाया करते थे। जाबालि ऋषि और भगवान राम की मुलाकात को लेकर कहा जाता है कि एक सभा में जाबाली ऋषि ने भगवान राम को संभाषण में बीच में बोलने से रोक दिया था, जिस पर भगवान राम ने जाबालि ऋषि को समझाया कि किसी को बीच में बोलते समय रोकना ठीक नहीं है। इस बात पर जाबाली ऋषि को अपनी गलती का एहसास हुआ और वे सभा बीच में ही छोड़कर पश्चाताप करने के लिए जबलपुर के लिए रवाना हो गए। सभा समाप्त होने के बाद भगवान राम ने जाबाली ऋषि से मिलने का सोचा लेकिन तब तक वे जा चुके थे। तब भगवान राम ने अपनी दिव्य दृष्टि से जाबाली ऋषि को देखा, तो पाया कि वे जबलपुर में हैं, उनसे मिलने के लिए भगवान राम जबलपुर आए लेकिन तब तक जाबालि ऋषि अपनी गलती के लिए पश्चाताप करने समाधि लगा चुके थे। तब भगवान राम ने जबलपुर में ही एक गुफा में रूककर रेत के शिवलिंग का निर्माण कर भगवान शिव की आराधना की थी, जिस जगह पर भगवान राम ने शिव जी की पूजा की थी, वर्तमान में उस जगह को गुप्तेश्वर के नाम से जाना जाता है। वहीं, जबलपुर को लेकर एक बात ये भी कही जाती है कि वर्तमान का महाकौशल ही त्रेतायुग का कौशल क्षेत्र है, जो कि भगवान की माता कौशल्या का पीहर है।
वनवास काल के दौरान भगवान राम ने की थी गुप्तेश्वर में शिवलिंग की स्थापना।
- फोटो : सोशल मीडिया
होशंगाबाद
होशंगाबाद जिले के पिपरिया में नर्मदा नदी के किनारे मगरमुहा के पार रामघाट नाम की जगह है। इस जगह को लेकर कहा जाता है कि भगवान राम ने यहीं से नर्मदा नदी पार की थी। चरगवां वाले किनारे से लगी हरी-भरी दुर्गम पहाड़ी है। दोहरी पहाड़ी की चोटी पर एक बेहद प्राचीन मंदिर बना है। पहाड़ी के इसी चौकोर समतल से नीचे गहराई में चट्टानों और हरे-भरे जंगल से घिरा कांच से चमकते पानी का कुंड है, जो कि राम कुंड के नाम से प्रसिद्ध है। इस तक पहुंचने का जमीन से कोई रास्ता नहीं है। पहाड़ी तक पहुंचने के लिए भी सीधी ऊंचाई और पहाड़ियों से घिरी खाई का बाजू थामे एक पतली सी पगडंडी है। ऊपर पहुंच कर फिर राम कुंड के लिए बिना रास्ते के नीचे उतरना होता है। लोकमान्यता है कि नर्मदा नदी पार कर भगवान राम ने इसी पहाड़ पर रात काटी थी। सुबह कुंड में स्नान किया। फल-फूल का आहार लिया और दक्षिण की ओर रवाना हुए। राम कुंड की एक खास बात ये भी है कि कुंड से निकली जलधारा यहां-वहां होते हुए नर्मदा नदी में मिलती है पर कुंड का पानी कभी खाली नहीं होता है।
होशंगाबाद जिले के पिपरिया में नर्मदा नदी के किनारे मगरमुहा के पार रामघाट नाम की जगह है। इस जगह को लेकर कहा जाता है कि भगवान राम ने यहीं से नर्मदा नदी पार की थी। चरगवां वाले किनारे से लगी हरी-भरी दुर्गम पहाड़ी है। दोहरी पहाड़ी की चोटी पर एक बेहद प्राचीन मंदिर बना है। पहाड़ी के इसी चौकोर समतल से नीचे गहराई में चट्टानों और हरे-भरे जंगल से घिरा कांच से चमकते पानी का कुंड है, जो कि राम कुंड के नाम से प्रसिद्ध है। इस तक पहुंचने का जमीन से कोई रास्ता नहीं है। पहाड़ी तक पहुंचने के लिए भी सीधी ऊंचाई और पहाड़ियों से घिरी खाई का बाजू थामे एक पतली सी पगडंडी है। ऊपर पहुंच कर फिर राम कुंड के लिए बिना रास्ते के नीचे उतरना होता है। लोकमान्यता है कि नर्मदा नदी पार कर भगवान राम ने इसी पहाड़ पर रात काटी थी। सुबह कुंड में स्नान किया। फल-फूल का आहार लिया और दक्षिण की ओर रवाना हुए। राम कुंड की एक खास बात ये भी है कि कुंड से निकली जलधारा यहां-वहां होते हुए नर्मदा नदी में मिलती है पर कुंड का पानी कभी खाली नहीं होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पिपरिया के पास रामघाट से भगवान राम ने नर्मदा नदी की थी पार।
- फोटो : सोशल मीडिया
खंडवा
मध्य प्रदेश का खंडवा क्षेत्र खांडव वन का हिस्सा माना जाता है। कहा जाता है कि इस स्थान पर भगवान राम एक दिन के लिए रूके थे। इस दौरान जब माता सीता को प्यास लगी तो भगवान राम ने बाण चलाकर जलधारा निकाली थी। जलधारा वाला स्थान वर्तमान में रामबाण कुआं के नाम से जाना जाता हैं। यहां एक प्राचीन बावड़ी भी मौजूद है, जिसे सीता बावड़ी के नाम से जाना जाता है। आसपास भगवान राम के प्राचीन मंदिर भी बने हुए हैं। ये भी कहा जाता है कि प्राचीन काल में इस क्षेत्र में राजा खर-दूषण का राज्य हुआ करता था।
मध्य प्रदेश का खंडवा क्षेत्र खांडव वन का हिस्सा माना जाता है। कहा जाता है कि इस स्थान पर भगवान राम एक दिन के लिए रूके थे। इस दौरान जब माता सीता को प्यास लगी तो भगवान राम ने बाण चलाकर जलधारा निकाली थी। जलधारा वाला स्थान वर्तमान में रामबाण कुआं के नाम से जाना जाता हैं। यहां एक प्राचीन बावड़ी भी मौजूद है, जिसे सीता बावड़ी के नाम से जाना जाता है। आसपास भगवान राम के प्राचीन मंदिर भी बने हुए हैं। ये भी कहा जाता है कि प्राचीन काल में इस क्षेत्र में राजा खर-दूषण का राज्य हुआ करता था।
विज्ञापन
खंडवा में स्थित भगवान राम का प्राचीन मंदिर।
- फोटो : सोशल मीडिया
विदिशा
वनवास काल के दौरान भगवान राम ने विदिशा में भी कुछ समय व्यतीत किया था। जहां भगवान राम रूके थे उस जगह में भगवान राम के चरणों के निशान आज भी मौजूद हैं। वर्तमान में उस स्थान को चरणतीर्थ के रूप में जाना जाता है। इस जगह के इतिहास को लेकर ये भी कहा जाता है कि जब त्रेतायुग में भगवान राम ने अश्वमेघ यज्ञ किया था तो शत्रुघ्न ने इस क्षेत्र को यादवों से जीता था और यहां शासन किया था।
वनवास काल के दौरान भगवान राम ने विदिशा में भी कुछ समय व्यतीत किया था। जहां भगवान राम रूके थे उस जगह में भगवान राम के चरणों के निशान आज भी मौजूद हैं। वर्तमान में उस स्थान को चरणतीर्थ के रूप में जाना जाता है। इस जगह के इतिहास को लेकर ये भी कहा जाता है कि जब त्रेतायुग में भगवान राम ने अश्वमेघ यज्ञ किया था तो शत्रुघ्न ने इस क्षेत्र को यादवों से जीता था और यहां शासन किया था।
