शहर के डांसिंग कॉप रंजीत सिंह को भारत गौरव अवॉर्ड मिला है। केरल के राज्यपाल ने उन्हें यह सम्मान दिया है। बता दें कि रंजीत का नाम वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है। इसके अलावा नौकरी में रंजीत को अब तक 155 अवॉर्ड मिल चुके हैं।
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बाबा रामदेव भी कर चुके हैं सम्मानित
- फोटो : सोशल मीडिया
रंजीत सिंह पहचान के मोहताज नहीं है। इंदौर ट्रैफिक पुलिस ने रंजीत सिंह का नाम हर कोई जानता है। बैच नंबर 146 रंजीत सिंह डांस करते हुए जिस तरह से इंदौर में हाई कोर्ट चौराहे का ट्रैफिक संभालते हैं वह देखने लायक होता है। अपने काम को इस तरह ईमानदारी से करते हैं कि पूरा पुलिस विभाग उनका सम्मान करता है और जनता भी उनकी मुरीद है। अपनी इसी विशिष्ट शैली के चलते रंजीत सिंह को भारत गौरव अवॉर्ड दिया गया है। केरल के राज्यपाल ने उन्हें यह पुरस्कार दिया है।
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फिल्मी कलाकारों के साथ दे चुके हैं डांसिंग पोज
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रंजीत सिंह केबीसी (कौन बनेगा करोड़पति) में भी जा चुके हैं। योग गुरु बाबा रामदेव भी उन्हें सम्मानित कर चुके हैं। फिल्मी कलाकारों के साथ वे डांसिंग पोज दे चुके है। देश के अन्य राज्यों की पुलिस भी उनके काम की सराहना कर चुकी है और उनकी सेवा लेने का आग्रह कर चुकी है।
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इस तरह डांस करते हुए ट्रैफिक संभालते हैं रंजीत सिंह
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रंजीत सिंह के अनुसार वे चार भाई हैं। वे सबसे बड़े हैं। पिता शिवजी सिंह पेटलावद में थाना प्रभारी थे। वे रिटायर्ड हो चुके हैं। बचपन में पढाई में अधिक रुचि नही होने के कारण पिता उन्हें कई बार डांटते थे और कहते थे कि मुझे शर्म आती है कि तू मेरा बेटा है लेकिन 4 जून 1999 में रंजीत ने क्राइम ब्रांच से नौकरी की शुरुआत की। रंजित वर्ष 2004 में तेज बारिश के दौरान पलासिया में एक गर्भवती महिला को अस्पताल ले गए थे। महिला जिस ऑटो से जा रही थी वह पलट गया था, इसके बाद रंजीत ने तत्परता दिखाते हुए महिला को अस्पताल पहुंचाया था। इसके लिए रंजीत को प्राइड ऑफ इंदौर का पुरस्कार मिला था। तब से पिता का रवैया बेटे को लेकर बदला और बाद में रंजीत अपने कार्य और सेवा से पुरस्कार पाते चले गए।
वर्ष 2015 में इंदौर हाई कोर्ट के एक फैसले में उच्च न्यायाधीश ने अपने आदेश में रंजीत सिंह का उदाहरण देते हुए लिखा था कि यदि अपने कर्तव्य का पालन करना हो तो चौराहे पर खड़े हुए यातायात जवान रंजीत को देखो। रंजीत सिंह ने बताया कि उन्हें नौकरी में अब तक 155 पुरस्कार मिल चुके हैं। पुलिस विभाग द्वारा 350 अलग-अलग तरह के पुरस्कार दिए गए हैं। वर्ष 2018 में तत्कालीन डीजीपी ऋषि कुमार शुक्ला ने 25 हजार रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया था। इसके बाद 3 जून को केरल के राज्यपाल ने भारत गौरव अवॉर्ड से सम्मानित किया। वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी नाम दर्ज है।
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