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Tantia Bhil: आजादी के नायक टंट्या भील के नाम हुआ पाताल पानी रेलवे स्टेशन, जानिए इससे जुड़ी खास बातें

Fri, 21 Oct 2022 01:47 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Fri, 21 Oct 2022 01:47 PM IST
सार

महू के पास स्थित पाताल पानी रेलवे स्टेशन का नाम अब आजादी के नायक रहे टंट्या भील के नाम पर कर दिया गया हैं। राज्य सरकार के इस अनुमोदन पर केंद्र सरकार ने मुहर लगाकर गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।

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Patal Pani railway station named after freedom hero Tantia Bhil know the special things related to it
पातालपानी रेलवे स्टेशन के नए नाम को मिली केंद्र की स्वीकृति - फोटो : सोशल मीडिया
महू के पास स्थित पाताल पानी रेलवे स्टेशन का नाम अब आजादी के नायक रहे टंट्या भील के नाम पर कर दिया गया हैं। राज्य सरकार के इस अनुमोदन पर केंद्र सरकार ने मुहर लगाकर गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। आदिवासियों की आस्था और मंशानुसार इसे सरकार ने पारित किया था। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने नवंबर 2021 में पाताल पानी रेलवे स्टेशन के नाम को शहीद टंट्या भील के नाम पर करने की घोषणा की थी।बता दें, इससे पूर्व इंदौर के भंवरकुंआ चौराहे का नाम भी टंट्या भील चौराहा किया जा चुका है। हालांकि लोग इसे अब भी भंवरकुंआ चौराहा के नाम से ही पुकारते हैं।
Patal Pani railway station named after freedom hero Tantia Bhil know the special things related to it
स्टेशन के पास बना जननायक टंट्या भील का मंदिर - फोटो : सोशल मीडिया
टंट्या भील के मंदिर में सलामी देती है ट्रेनें
अंग्रेजों से आजादी की लड़ाई लड़ने वाले टंट्या भील शहीद हो गए थे। क्षेत्र के लोग उनकी शहादत और वीरता के कई किस्से आज भी सुनाते हैं। स्टेशन के पास ही टंट्या भील का एक मंदिर स्थित है, कहा जाता है इस स्टेशन से गुजरने वाली सभी ट्रेनें यहां दो मिनट के लिए जरूर रुकती हैं, जो रेल यहां से गुजरते हुए यहां सलामी नहीं देती वह आगे जाकर दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है या फिर गहरी खाई में गिर जाती है। रेल विभाग की तरफ से भी यहां कई वर्षों से अघोषित नियम जारी है, यहां से गुजरने वाली सभी रेलगाड़ियां रुककर और हार्न बजाकर ही आगे बढ़ती हैं।

हालांकि इस मामले में विभाग की राय अलग है रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि कालाकुंड तक के ट्रैक काफी खतरनाक है,इसलिए यहां ट्रेनों के ब्रेक चेक किए जाते हैं, जिसके चलते ट्रेनों को गुजरते समय रोका जाता है।
Patal Pani railway station named after freedom hero Tantia Bhil know the special things related to it
शहीद टंट्या भील - फोटो : सोशल मीडिया
कहा जाता है अंग्रेजों ने टंट्या भील को फांसी के फंदे पर लटकाने के बाद उनके शव को कालाकुंड के जंगलों के बीच दफना दिया था, उस जगह में ग्रामीणों ने जननायक टंट्या भील का मंदिर बनाया है। लोगों का मानना है कि टंट्या मामा का शरीर भले ही अब ना हो लेकिन उनकी आत्मा अब भी यहां निवास करती है।

कौन हैं टंट्या भील
इतिहासकारों के अनुसार टंट्या भील का जन्म खंडवा जिले की पंधाना तहसील के बडदा में 1842 में हुआ था, उनके पिता का नाम भाऊसिंह बताया जाता है। पिता से ही उन्हें लाठी-गोफन व तीर-कमान चलाने का प्रशिक्षण मिला था। टंट्या ने धर्नुविद्या में दक्षता हासिल करने के साथ लाठी चलाने की कला में भी महारत प्राप्त की। युवावस्था में वह अंग्रेजों के सहयोगी साहूकारों की प्रताड़ना से तंग आकर साथियों के साथ जंगल में कूद गए और विद्रोह करने लगे। अंग्रेजों ने उन्हें 4 दिसंबर 1889 को फांसी दी थी। उनकी लोक हितैषी छवि के चलते वह टंट्या मामा के नाम से विख्यात हैं।
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