देवी अहिल्याबाई होल्कर के 300वें जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय सेक्रेड रिवर फेस्टिवल 2026 का पवित्र नगरी महेश्वर के ऐतिहासिक नर्मदा तट पर भव्य शुभारंभ हुआ। आध्यात्मिक वातावरण, दीपों की रोशनी और मां नर्मदा की लहरों की मधुर ध्वनि के बीच शुरू हुए इस अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक महोत्सव ने पहले ही दिन दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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Maheshwar News: सेक्रेड रिवर फेस्टिवल 2026 का भव्य आगाज, नर्मदा तट पर गूंजी भक्ति और संस्कृति
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महेश्वर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Sat, 21 Feb 2026 10:03 AM IST
सार
Maheshwar Sacred River Festival : महेश्वर के नर्मदा तट पर देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती वर्ष पर सेक्रेड रिवर फेस्टिवल 2026 का भव्य आगाज हुआ। आध्यात्मिक माहौल और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पहले दिन ही दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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सेक्रेड रिवर फेस्टिवल 2026
- फोटो : अमर उजाला
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सेक्रेड रिवर फेस्टिवल 2026
- फोटो : अमर उजाला
आयोजन पवित्र नगरी महेश्वर स्थित देवी श्री अहिल्याबाई होलकर मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट एवं अहिल्या फोर्ट द्वारा किया जा रहा है। महोत्सव की शुरुआत नर्मदा वंदना से हुई, जिसमें श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। देश-विदेश से आए कला प्रेमियों, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों की उपस्थिति ने आयोजन को और भी गरिमामय बना दिया।
उद्घाटन दिवस का मुख्य आकर्षण गुरबानी कीर्तन रहा। प्रख्यात गायक उस्ताद गुरमीत सिंह संत खालसा ने अपने समूह सहित जब शबद-कीर्तन प्रस्तुत किया, तो पूरा वातावरण आध्यात्मिक भाव से सराबोर हो गया। उनकी स्वर लहरियों ने नर्मदा तट को भक्ति रस में डुबो दिया। दर्शक मंत्रमुग्ध होकर देर तक प्रस्तुति का आनंद लेते रहे। शांति, समरसता और आध्यात्मिक एकता का संदेश देते इस कीर्तन ने महोत्सव के मूल भाव को साकार किया।
उद्घाटन दिवस का मुख्य आकर्षण गुरबानी कीर्तन रहा। प्रख्यात गायक उस्ताद गुरमीत सिंह संत खालसा ने अपने समूह सहित जब शबद-कीर्तन प्रस्तुत किया, तो पूरा वातावरण आध्यात्मिक भाव से सराबोर हो गया। उनकी स्वर लहरियों ने नर्मदा तट को भक्ति रस में डुबो दिया। दर्शक मंत्रमुग्ध होकर देर तक प्रस्तुति का आनंद लेते रहे। शांति, समरसता और आध्यात्मिक एकता का संदेश देते इस कीर्तन ने महोत्सव के मूल भाव को साकार किया।
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सेक्रेड रिवर फेस्टिवल 2026
- फोटो : अमर उजाला
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इसके बाद असम की प्रसिद्ध सत्त्रिया नृत्यांगना मीनाक्षी मेधी ने अपनी मोहक प्रस्तुति दी। पारंपरिक वेशभूषा और शास्त्रीय मुद्राओं के साथ प्रस्तुत सत्त्रिया नृत्य ने पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया। उनकी भाव-भंगिमाओं और लयबद्ध प्रस्तुति ने दर्शकों को बांधे रखा। नृत्य के माध्यम से भक्ति, संस्कृति और शास्त्रीय सौंदर्य का अनूठा संगम देखने को मिला।
इसके बाद असम की प्रसिद्ध सत्त्रिया नृत्यांगना मीनाक्षी मेधी ने अपनी मोहक प्रस्तुति दी। पारंपरिक वेशभूषा और शास्त्रीय मुद्राओं के साथ प्रस्तुत सत्त्रिया नृत्य ने पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया। उनकी भाव-भंगिमाओं और लयबद्ध प्रस्तुति ने दर्शकों को बांधे रखा। नृत्य के माध्यम से भक्ति, संस्कृति और शास्त्रीय सौंदर्य का अनूठा संगम देखने को मिला।
सेक्रेड रिवर फेस्टिवल 2026
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इस वर्ष महोत्सव की थीम अहिल्याबाई होलकर : भारत भर में पदचिह्न रखी गई है। पहले दिन की प्रस्तुतियों में भी इसी भाव को केंद्र में रखा गया। आयोजकों ने बताया कि महोत्सव का उद्देश्य देवी अहिल्याबाई होल्कर के लोककल्याणकारी कार्यों, सुशासन और सांस्कृतिक संरक्षण की भावना को कला के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाना है। उन्होंने देशभर में घाट, मंदिर और धर्मशालाओं का निर्माण कर जो विरासत स्थापित की, उसी प्रेरणा को यह आयोजन आगे बढ़ा रहा है।
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सेक्रेड रिवर फेस्टिवल 2026
- फोटो : अमर उजाला
कार्यक्रम का संचालन सुप्रसिद्ध रंगकर्मी अंजना राजन द्वारा किया गया। उनके सशक्त एवं प्रभावी संचालन ने पूरे आयोजन को एक सूत्र में पिरोए रखा। मंच सज्जा, प्रकाश व्यवस्था और नर्मदा तट की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि ने आयोजन को अलौकिक रूप प्रदान किया।
पहले दिन की सफलता ने यह संकेत दे दिया है कि आगामी दो दिन भी कला, संस्कृति और संगीत के विविध रंगों से सराबोर रहेंगे। पवित्र नगरी महेश्वर में आयोजित यह महोत्सव न केवल सांस्कृतिक उत्सव है, बल्कि भारतीय परंपरा, आध्यात्मिकता और एकता का जीवंत प्रतीक बनकर उभरा है। आयोजकों ने अधिक से अधिक लोगों से शेष दो दिनों में उपस्थित होकर इस ऐतिहासिक आयोजन का साक्षी बनने का आग्रह किया है।
पहले दिन की सफलता ने यह संकेत दे दिया है कि आगामी दो दिन भी कला, संस्कृति और संगीत के विविध रंगों से सराबोर रहेंगे। पवित्र नगरी महेश्वर में आयोजित यह महोत्सव न केवल सांस्कृतिक उत्सव है, बल्कि भारतीय परंपरा, आध्यात्मिकता और एकता का जीवंत प्रतीक बनकर उभरा है। आयोजकों ने अधिक से अधिक लोगों से शेष दो दिनों में उपस्थित होकर इस ऐतिहासिक आयोजन का साक्षी बनने का आग्रह किया है।

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