MP: महेश्वर में भ्रष्टाचार पर वार, प्रमाण-पत्र जारी करने के बदले चार हजार की रिश्वत लेते उपयंत्री गिरफ्तार
महेश्वर जनपद पंचायत में पदस्थ संविदा उपयंत्री मनोज सावले को कार्यपूर्ण प्रमाण-पत्र जारी करने के बदले 4 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त इंदौर ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। शिकायत के सत्यापन के बाद की गई ट्रैप कार्रवाई में आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
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महेश्वर के विकास कार्यों की फाइलों पर जमी भ्रष्टाचार की धूल को शुक्रवार को लोकायुक्त की कार्रवाई ने साफ कर दिया। जनपद पंचायत में पदस्थ संविदा उपयंत्री मनोज सावले उस समय लोकायुक्त के शिकंजे में आ गए, जब वे कार्यपूर्ण प्रमाण-पत्र जारी करने के एवज में 4 हजार रुपये की रिश्वत ले रहे थे। जैसे ही उन्होंने रिश्वत की राशि स्वीकार की, लोकायुक्त की टीम ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया। इस कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी तंत्र में व्याप्त "परसेंटेज संस्कृति" को उजागर कर दिया है।
मामला ग्राम पंचायत बड़वेल-कांकरिया से जुड़ा है। शिकायतकर्ता मगन सिंह मकवाने ने आरोप लगाया कि पंचायत में कराए गए निर्माण कार्यों का मूल्यांकन और कार्यपूर्ण प्रमाण-पत्र जारी करने के लिए उन्हें लंबे समय से परेशान किया जा रहा था। उनका कहना है कि वर्ष 2024 से ही उपयंत्री द्वारा कभी फाइल रोकने तो कभी मूल्यांकन लंबित रखने का दबाव बनाकर राशि की मांग की जाती रही। कई बार भुगतान किए जाने के बावजूद कार्य समय पर नहीं हुआ और हर बार कोई न कोई नया बहाना सामने आ जाता था।
शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त इंदौर का दरवाजा खटखटाया
शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने कई बार अनुरोध किया कि नियमानुसार प्रक्रिया पूरी की जाए, लेकिन इसके बजाय लगातार "परसेंटेज" की मांग की जाती रही। आरोप है कि पहले भी राशि ली जा चुकी थी, इसके बावजूद कार्यपूर्ण प्रमाण-पत्र जारी नहीं किया गया और अतिरिक्त रकम के लिए दबाव बनाया जाता रहा।
परेशान होकर शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त इंदौर का दरवाजा खटखटाया। पुलिस अधीक्षक राजेश सहाय के निर्देशन में शिकायत का सत्यापन कराया गया, जिसमें रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। इसके बाद विशेष ट्रैप दल ने योजनाबद्ध कार्रवाई करते हुए जनपद पंचायत महेश्वर स्थित कार्यालय में जाल बिछाया। शुक्रवार को जैसे ही उपयंत्री ने चार हजार रुपये की रिश्वत स्वीकार की, लोकायुक्त टीम ने उन्हें मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया।
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आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 7 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। कार्रवाई में निरीक्षक आशुतोष मिठास सहित लोकायुक्त टीम के कई अधिकारियों और कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सिर्फ 4 हजार रुपये नहीं, व्यवस्था पर भी उठा सवाल
यह मामला केवल 4 हजार रुपये की रिश्वत का नहीं है, बल्कि उस मानसिकता का आईना है, जिसमें विकास कार्यों के प्रमाण-पत्र, मूल्यांकन और भुगतान जैसी प्रक्रियाएं कई बार आम लोगों और पंचायत प्रतिनिधियों के लिए परेशानी का कारण बन जाती हैं। लोकायुक्त की इस कार्रवाई ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी पद जनसेवा के लिए हैं, सौदेबाजी के लिए नहीं।

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