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नर्मदापुरम: बेटियों ने पिता की अर्थी को दिया कांधा, छोटी बेटी ने दी मुखाग्नि

Sat, 12 Feb 2022 06:04 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नर्मदापुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नर्मदापुरम Published by: दिनेश शर्मा Updated Sat, 12 Feb 2022 06:04 PM IST
सार

नर्मदापुरम में पिता की मौत के बाद बेटियों ने उनका अंतिम संस्कार किया। उनकी अर्थी को कांधा दिया, वहीं छोटी बेटी ने मुखाग्नि दी।
 

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Narmadapuram: Daughters gave shoulder to father's vehicle, younger daughter gave fire
बेटी ने पिता को मुखाग्नि दी। - फोटो : अमर उजाला
नर्मदापुरम में पिता की मौत के बाद बेटियों ने उनका अंतिम संस्कार किया। उनकी अर्थी को कांधा दिया, वहीं छोटी बेटी ने मुखाग्नि दी।


बता दें कि नर्मदापुरम के बालागंज निवासी राजेन्द्र पेंटर विनोदिया का लंबी बीमारी के बाद 85 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनका एक बेटा ओर तीन बेटियां थीं। बेटे की एक दुर्घटना में लगभग 15 वर्ष पहले ही मृत्यु हो गई थी, पर इन 15 वषों तक उन बेटियों ने अपने माता-पिता की सेवा लड़कों की तरह की। वहीं पिता ने भी अपनी तीनो बेटियों को बेटों की तरह लालन पालन किया।
 
Narmadapuram: Daughters gave shoulder to father's vehicle, younger daughter gave fire
पिता के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करती बेटी। - फोटो : अमर उजाला
जब इन बेटियों के पिता के स्वर्गवास होने की खबर लगी तो पूरा मोहल्ला सकते में आ गया। बेटियों ने पिता की अंतिम इच्छा पूरी। बेटियों ने ही मटकी पकड़ी, बेटियों ने ही पिता को कांधा दिया। शहर की जिन सड़कों से ये शवयात्रा गुजरी, लोग इस मंजर को देख अपने आंसू नहीं रोक पाए।
 
Narmadapuram: Daughters gave shoulder to father's vehicle, younger daughter gave fire
पिता के निधन के बाद बेटी ने बताई पिता की इच्छा। - फोटो : अमर उजाला
राजेंद्र की छोटी बेटी गोला का कहना है कि मेरे पिताजी की इच्छा थी कि हम ही उनका अंतिम संस्कार करें। मेरे भाई का भी 15 साल पहले देहांत हो गया था। हमारी माता भी नहीं हैं। हमने चाचाजी, पड़ोसियों की मदद से अंतिम संस्कार की सारी क्रियाएं विधि विधान से कीं।
 
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पड़ोसियों ने भी अंतिम संस्कार के लिए बेटियों की मदद की। - फोटो : अमर उजाला
राजेन्द्र पेंटर के पड़ोसी प्रकाश शिवहरे ने बताया कि एसपीएम से रिटायर कर्मचारी थे। वे काफी समय से बीमार थे। उन्हें अपने अंतिम समय का अंदाज हो गया था। वे पड़ोसियों, समाज के लोगों से अक्सर कहा करते थे कि मेरा अंतिम संस्कार मेरी बेटियां ही करेंगी। स्वर्गीय राजेंद्रजी की इच्छा के अनुसार उनकी बेटियों ने ही अर्थी को काधा दिया और मुखाग्नि भी उनकी छोटी बेटी ने दी।
 
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