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Diwali 2024: साल में पांच दिन नोटों से सजने वाला देश का इकलौता मंदिर, भक्तों के गहनों से सजती हैं मां लक्ष्मी
Thu, 31 Oct 2024 08:54 AM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रतलाम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रतलाम
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Thu, 31 Oct 2024 08:54 AM IST
सार
Ratlam Mahalaxmi Mandir: ममध्यप्रदेश के रतलाम जिले में स्थित महालक्ष्मी का एक अनोखा और प्राचीन मंदिर है, जो पूरे साल में पांच दिनों के लिए खास रूप में सजता है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां भक्तों द्वारा लाए गए गहनों और नोटों से मां लक्ष्मी का शृंगार किया जाता है, जो कि देशभर में अपनी तरह का इकलौता आयोजन है।
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रतलाम का मां लक्ष्मी का मंदिर नोटों से सज गया है।
- फोटो : सोशल मीडिया
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मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में स्थित महालक्ष्मी का एक अनोखा और प्राचीन मंदिर है, जो पूरे साल में केवल पांच दिनों के लिए खास महत्व रखता है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां भक्तों द्वारा लाए गए गहनों और नोटों से मां लक्ष्मी का श्रृंगार किया जाता है, जो कि देशभर में अपनी तरह का इकलौता आयोजन है। पांच दिनों तक नोटों-गहनों से सजा मंदिर भक्तों के आकर्षण का केंद्र होता है। दीवाली के दौरान मां लक्ष्मी के दर्शन और उनकी विशेष साज-सज्जा को देखने के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं।
रतलाम का मां लक्ष्मी का मंदिर नोटों से सज गया है।
- फोटो : सोशल मीडिया
पांच दिनों के लिए सजता है मंदिर
महालक्ष्मी का यह मंदिर यूं तो सालभर भक्तों के लिए खुला रहता है, पर दिवाली पर खासतौर पर पांच दिनों के लिए सजता है, और खुला रहता है। नोटों से सजावट के बाद धनतेरस के दिन ब्रह्म मुहूर्त में खोला जाता है और गोवर्धन पूजा के बाद पट बंद कर दिए जाते हैं। इस दौरान भक्त मां लक्ष्मी के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं पूरी होने का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
महालक्ष्मी का यह मंदिर यूं तो सालभर भक्तों के लिए खुला रहता है, पर दिवाली पर खासतौर पर पांच दिनों के लिए सजता है, और खुला रहता है। नोटों से सजावट के बाद धनतेरस के दिन ब्रह्म मुहूर्त में खोला जाता है और गोवर्धन पूजा के बाद पट बंद कर दिए जाते हैं। इस दौरान भक्त मां लक्ष्मी के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं पूरी होने का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
रतलाम का मां लक्ष्मी का मंदिर नोटों से सज गया है।
- फोटो : सोशल मीडिया
अनोखा शृंगार: गहनों और नोटों से सजीं मां लक्ष्मी
यह भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां मां लक्ष्मी का श्रृंगार भक्तों द्वारा लाए गए गहनों और नोटों से किया जाता है। इस अनोखी परंपरा में पिछले कई वर्षों से कभी कोई गहना गायब नहीं हुआ, जो भक्तों के बीच एक गहरी श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है। मंदिर में मां लक्ष्मी की मूर्ति को पांच हाथियों पर विराजमान दिखाया गया है, और उनके साथ भगवान गणेश तथा मां सरस्वती की प्रतिमाएं भी हैं।
यह भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां मां लक्ष्मी का श्रृंगार भक्तों द्वारा लाए गए गहनों और नोटों से किया जाता है। इस अनोखी परंपरा में पिछले कई वर्षों से कभी कोई गहना गायब नहीं हुआ, जो भक्तों के बीच एक गहरी श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है। मंदिर में मां लक्ष्मी की मूर्ति को पांच हाथियों पर विराजमान दिखाया गया है, और उनके साथ भगवान गणेश तथा मां सरस्वती की प्रतिमाएं भी हैं।
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रतलाम का मां लक्ष्मी का मंदिर नोटों से सज गया है।
- फोटो : सोशल मीडिया
करोड़ों के आभूषणों से सजता है मंदिर
दीपावली के मौके पर इस मंदिर में फूलों की जगह नोटों की गड्डियों और आभूषणों से सजावट की जाती है। आभूषणों और नोटों की इस भव्य सजावट का दृश्य देखने लोग दूर-दूर से आते हैं। माना जाता है कि यहां सजने वाले आभूषणों और नोटों की कुल कीमत करोड़ों में होती है, जो भक्तों की आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है।
दीपावली के मौके पर इस मंदिर में फूलों की जगह नोटों की गड्डियों और आभूषणों से सजावट की जाती है। आभूषणों और नोटों की इस भव्य सजावट का दृश्य देखने लोग दूर-दूर से आते हैं। माना जाता है कि यहां सजने वाले आभूषणों और नोटों की कुल कीमत करोड़ों में होती है, जो भक्तों की आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है।
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रतलाम का मां लक्ष्मी का मंदिर नोटों से सज गया है।
- फोटो : सोशल मीडिया
प्रसाद के रूप में आभूषण और पैसे
दीपावली से पहले भक्त अपने गहने और नोट मंदिर में जमा कराते हैं और इसके बदले उन्हें एक टोकन दिया जाता है। गोवर्धन पूजा के दिन, भक्त अपने टोकन के आधार पर अपने गहने और पैसे प्रसाद के रूप में प्राप्त करते हैं। इस प्रसाद को भक्त अपने घर में समृद्धि का प्रतीक मानकर संभाल कर रखते हैं। महिलाओं को प्रसाद स्वरूप श्रीयंत्र, सिक्के, कौड़ियां, अक्षत, और कंकू युक्त कुबेर पोटली दी जाती है, जिन्हें घर में शुभ माना जाता है।
दीपावली से पहले भक्त अपने गहने और नोट मंदिर में जमा कराते हैं और इसके बदले उन्हें एक टोकन दिया जाता है। गोवर्धन पूजा के दिन, भक्त अपने टोकन के आधार पर अपने गहने और पैसे प्रसाद के रूप में प्राप्त करते हैं। इस प्रसाद को भक्त अपने घर में समृद्धि का प्रतीक मानकर संभाल कर रखते हैं। महिलाओं को प्रसाद स्वरूप श्रीयंत्र, सिक्के, कौड़ियां, अक्षत, और कंकू युक्त कुबेर पोटली दी जाती है, जिन्हें घर में शुभ माना जाता है।
