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Ujjain: बाबा महाकाल ने भक्तों को दिए पांच रूपों में दर्शन, वर्ष में केवल एक बार होता है पंचमुखारविंद श्रृंगार

Wed, 22 Feb 2023 11:39 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Wed, 22 Feb 2023 11:39 AM IST
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Mahakaleshwar Jyotirlinga Photos: Lord Mahakal Seen in Panchmukharvind Shringar Happens Once in a Year
बाबा महाकाल के पांच स्वरूप - फोटो : अमर उजाला
फाल्गुन कृष्ण पक्ष की प्रथमा तिथि पर मंगलवार को भगवान महाकाल का पंचमुखारविंद रूप में श्रृंगार हुआ। महाशिवरात्रि के बाद वर्ष में एक बार राजाधिराज भगवान महाकाल भक्तों को इस रूप में दर्शन देते हैं। संध्या पूजन के बाद पुजारियों ने भगवान का छबीना, होलकर, मनमहेश, शिवतांडव, उमामहेश रूप में श्रृंगार किया।
Mahakaleshwar Jyotirlinga Photos: Lord Mahakal Seen in Panchmukharvind Shringar Happens Once in a Year
बाबा महाकाल का छबीनाऔर मन महेश स्वरूप - फोटो : अमर उजाला
केवल महाकाल मंदिर में मनाई जाती है शिवनवरात्रि
भगवान के इस दिव्य रूप के दर्शन के लिए देशभर से भक्त यहां पहुंचे। महाकाल मंदिर देश का एक मात्र ज्योतिर्लिंग है, जहां शिवनवरात्रि उत्सव मनाया जाता है। इन नौ दिनों में बाबा महाकाल का रोज दूल्हे के रूप में श्रृंगार होता है। इन श्रृंगारों के नाम भी अलग-अलग हैं। जो भक्त शिवनवरात्रि के इन नौ दिनों में इन दिव्यरूपों के दर्शन नहीं कर पाते, वे महाशिवरात्रि के बाद चंद्र दर्शन की दूज पर भगवान के इन रूपों के एक साथ दर्शन करते हैं।
 
Mahakaleshwar Jyotirlinga Photos: Lord Mahakal Seen in Panchmukharvind Shringar Happens Once in a Year
बाबा महाकाल का तांडव स्वरूप - फोटो : अमर उजाला
वर्ष में केवल एक बार होते हैं पांच रूपों में दर्शन
महाकाल मंदिर के पुजारी महेश गुरु ने बताया कि ऐसा इसलिए होता है कि यदि शिव नवरात्रि में बाबा के अलग-अलग रूप में दर्शन नहीं कर पाने वाले भक्त महाकाल बाबा के इन स्वरूप में दर्शन कर सके।



महाशिवरात्रि के बाद दूज के अवसर पर महाकाल के पांच स्वरूपों में दर्शन के लिए एक मान्यता यह भी है कि महाशिवरात्रि पर शिव विवाह के बाद भगवान शिव कई दिनों तक देवताओं को दिखाई नहीं दिए। इस पर देवताओं ने शिव के दर्शन करने के लिए प्रार्थना और तप किया। इस पर भगवान शिव ने दिव्य स्वरूप में दर्शन दिए। इस मान्यता के अनुसार बाबा महाकालेश्वर के पांच स्वरूपों में दर्शन करने का विशेष महत्व हैं।
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