भारत पाकिस्तान सीमा पर भारतीय को जीवन का एक अनूठा अनुभव होता है। जैसलमेर की तनोट बावलियावाला सीमा जवानों की दृढ़ता और युद्ध जीत की यादें ताजा करती है। केंद्र और प्रदेश सरकार के सहयोग से यहां का दौरान पर्यटकों को रोमांचित करने वाला है। तनोट माता मंदिर, किशनगढ़ किला, लोंगेवाला युद्ध स्मारक और रेगिस्तानी इलाकों के बीच सुंदर गांव क्षेत्र के पर्यटक स्थील आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं।
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तनोट माता के दर्शन करने आते हैं हजारों लोग।
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लोंगेवाला देश की सबसे प्रसिद्ध सीमा है। इसे 1971 के युद्ध में भारतीय सेना की वीरता के लिए गर्व से याद किया जाता है। तनोट माता मंदिर में भी हर दिन लगभग 3000 भक्त दर्शन के लिए आते हैं। जिसमें से कुछ पर्यटकों को जिला प्रशासन की अनुमति के बाद बावलियावाला सीमा पर जाने का मौका मिलता हैं। अब यहां एम्फीथिएटर, कैफेटेरिया और चिल्ड्रन एक्टिविटी एरिया के साथ अन्य सुविधाओं विकसित की जा रही हैं। साथ ही तनोट मंदिर परिसर में भी सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं।
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1971 के युद्ध की यादें होती हैं ताजा।
- फोटो : सोशल मीडिया
पर्यटन प्रमुख सचिव गायत्री राठौर कहा कि बीएसएफ द्वारा तनोट माता पर्यटक परिसर का विकास सीमावर्ती के कठिन जीवन को प्रदर्शित करते हुए सुरक्षित और आरामदायक यात्रा का आश्वासन देगा। साथ ही समृद्ध ऐतिहासिक भव्यता की पृष्ठभूमि में भारत-पाकिस्तान सीमा की आभा पर्यटकों को जीवन भर संजोने की स्मृति देती है।
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पर्यटकों को बावलियावाला बॉर्डर पर जाने का मौका मिलेगा।
- फोटो : सोशल मीडिया
यहां बीएसएफ डॉक्यूमेंट्री, हथियार प्रदर्शन और फोटो गैलरी को तनोट में ऑप्स बेस पर प्रदर्शित किया जाएगा। पर्यटकों को बावलियावाला बॉर्डर पर जाने और बॉर्डर पॉइंट पर रिट्रीट समारोह देखने का भी मिलेगा। जैसलमेर जिला प्रशासन बावलियांवाला क्षेत्र को विकसित कर सुविधा प्रदान कर रहा है।
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जैसलमेर को गोल्डन सिटी के नाम से भी जाना जाता है।
- फोटो : सोशल मीडिया
बता दें कि जैसलमेर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध पर्यटन स्थल शहर है। जिसे गोल्डन सिटी भी कहा जाता है। राजसी हवेलियां, प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत भी यहां पर्यटकों को आकर्षित करती है। सीमा पर्यटन से यहां के निवासियों को नए अवसर मिलेंगे। साथ ही स्थानीय लोक कलाकारों को अपनी कलाएं दिखाने का अवसर मिलेगा