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कागज खाकर भरा पेट, ताउम्र याद रहेगी जिंदगी की ये जंग

Tue, 22 Sep 2015 11:07 AM IST
Updated Tue, 22 Sep 2015 11:07 AM IST
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कागज खाकर भरा पेट, ताउम्र याद रहेगी जिंदगी की ये जंग

bilaspur tunnal incident, read full story.

10 दिन....10 रातें और 211 घंटे 47 मिनट। जमीन के नीचे घुप अंधेरी टनल में जिंदगी के लिए जंग लड़ रहे दो मजदूर आखिरकार जिंदा लौट आए। मौत को मात देकर दस दिन के बाद इन्होंने सूरज देखा। आइए जानते हैं पूरी कहानी...

कागज खाकर भरा पेट, ताउम्र याद रहेगी जिंदगी की ये जंग

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12 सितंबर को रात 8.30 बजे हिमाचल के बिलासपुर के टीहरा में निर्माणाधीन टनल धंसी। तीन मजदूर इसमें फंस गए। टनल में मलबा इतना गिरा कि सभी मानने लगे कि तीनों शायद ही जिंदा होंगे।

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देर रात ही बीआरओ, जिला प्रशासन ने शुरू किया रेस्‍क्यू ऑपरेशन। उम्मीद जगी कि शायद कोई मजदूर जिंदा रह गया हो।

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एक दिन, दो दिन और फिर चार दिन बीत गए। टनल के अंदर मलबा निकालने का काम जारी था। मगर अब तक किसी मजदूर की कोई खबर नहीं थी। उम्मीद अब पूरी तरह टूट चुकी थी। सेना और एनडीआरएफ ने भी हाथ खींच लिए।

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पांचवें दिन, बीआरओ का काम जारी था। अब पहाड़ी के उपर से छेद कर कैमरे टनल में डाले गए। 96 घंटे बाद तो जैसे चमत्कार हो गया।

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