हम समझाते रहे कि मत नहाओ, पानी गहरा है, लेकिन सात साथी नहीं माने और चंद मिनटों में पानी में समा गए। अब हमसे बिछुड़ गए। हिमाचल प्रदेश के ऊना में गोबिंदसागर झील में हुए दिल दिहला देने वाले मंजर की प्रत्यक्षदर्शी साथी युवा सोनू और कृष्ण लाल ने दर्दनाक दास्तां बयां की। अपने साथियों को खोने के बाद गमगीन सोनू और कृष्ण ने बताया कि झील किनारे पहुंचने के बाद गर्मी का अहसास हो रहा था। कुछ का नहाने का मन कर गया।
गोबिंदसागर झील हादसा: समझाते रहे गहरा है पानी, मत नहाओ, नहीं माने और चंद मिनटों में झील में समा गए दोस्त
इस पर मौके पर पहुंचे कृष्ण लाल और सोनू ने अपने साथियों को देखा। तब तक केवल सभी के हाथ ही दिख रहे थे। आखिरी दम तक पानी के भीतर मदद के लिए हाथ ऊपर उठाते रहे। मौत के जंग के इस मंजर को देखकर कृष्ण लाल खुद को नहीं रोक पाए और बचाने के लिए झील में छलांग लगा दी। वह भी डूबने लगा, जिसे बाहर खड़े सोनू ने होशियारी से बचा लिया। सोनू का कहना कि साथी झील में नहाने की जिद पर अड़ गए और उनसे जुदा हो गए। आंखों के सामने उनकी कोई मदद नहीं कर पाए। इसका उन्हें हमेशा मलाल रहेगा।
दियोटसिद्ध और नयना देवी माथा टेकने जा रहे थे सभी
सभी 11 दोस्त धार्मिक स्थलों में शीश नवाने के इरादे से हिमाचल आए थे। ऊना के पीरनिगाह में दर्शन के बाद युवाओं ने दियोटसिद्ध जाना था। इसके बाद श्री नयनादेवी जी रवाना होना था, लेकिन रास्ते में ही हुए हादसे ने सबको झकझोर दिया है।
गोबिंदसागर झील में हर कदम पर है खतरा
गोबिंदसागर झील में हर कदम पर खतरा रहता है। झील में एक कदम पर कुछ फीट पानी तो अगले ही कदम पर पानी 100 फीट गहरा होता है। ऊंची ढलानें होने के कारण ऐसा होता है, लेकिन अनजान पर्यटक इससे बेखबर होते हैं और नहाने उतर जाते हैं।
दोस्तों ने ही समेटा बिछड़े दोस्तों का सामान
शव बरामद होने के बाद झील में सन्नाटा पसरना शुरू हो गया। दोस्तों ने ही अपने मृतक यारों का सारा सामान एकत्रित किया और साथ ले गए। सामान बटोरते दोस्त अपने आंसू नहीं रोक पाए। सामान को देखकर साथी अपने दोस्तों को याद करते रहे।