हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने दसवीं कक्षा का परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया है। 12वीं के बाद अब 10वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम में भी बेटियां सिरमौर बनीं हैं। टॉप-10 में शामिल 77 मेधावियों में से 67 स्थानों पर छात्राओं ने कब्जा जमाया है। प्रदेश को 10वीं कक्षा में दो टॉपर मिले हैं। दोनों ही टॉपर छात्राएं हैं और दोनों मंडी जिले से संबंध रखती हैं। वहीं दूसरी ओर टॉप-10 की सूची में अपना स्थान बनाने में छात्र पिछड़ गए हैं। टॉप-10 की सूची में मात्र 10 स्थानों पर ही छात्र कब्जा जमा पाए हैं। 10वें रैंक के लिए सबसे अधिक 20 छात्राओं ने अपनी जगह बनाई है, जबकि 9वें रैंक पर 14, 8वें रैंक पर 11 और 7वें रैंक पर 10 छात्राओं ने दबदबा बनाया। छात्रों में दूसरे रैंक पर एक, जबकि छठे से लेकर 9वें रैंक तक एक-एक छात्र काबिज हुआ है। इसके अलावा 10वां रैंक पांच छात्रों ने 20 अन्य छात्राओं के साथ साझा किया है।
HPBOSE 10th Result: टॉप-10 की सूची में 67 बेटियां, सरकारी स्कूलों के सिर्फ 11 छात्र, देखें पूरी लिस्ट
किस रैंक पर कितने लड़के-लड़कियां
रैंक छात्राएं छात्र
1 02 --
2 -- 01
3 02 --
4 01 --
5 01 --
6 06 01
7 10 01
8 11 01
9 14 01
10 20 05
कुल 67 10
परीक्षा का परिणाम 87.5 फीसदी रहा है। परीक्षा में 90375 छात्र अपीयर हुए थे। इनमें से 78573 उत्तीर्ण हुए हैं जबकि 1409 की कंपार्टमेंट आई है। 612 परीक्षा से अनुपस्थित रहे। उत्तीर्ण होने वालों में 47024 छात्र जबकि 43351 छात्राएं शामिल हैं। मंडी की प्रिंयका और दिवांगी ने मेरिट में पहला स्थान हासिल किया है। दोनों ने 99 फीसदी अंक (693/700) हासिल किए हैं। प्रिंयका सरस्वती विद्या मंदिर तत्तापानी मंडी की छात्रा हैं। दिवांगी एंगलो संस्कृत मॉडल स्कूल मंडी की छात्रा हैं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का गृह जिला भी मंडी है। सीएम ने प्रिंयका और दिवांगी को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है। मेरिट में दूसरे स्थान पर रहे बिलासपुर जिले के सरस्वती विद्या मंदिर हटवाड़ के छात्र आदित्य सांख्यान ने 98.86 फीसदी (692/700) अंक हासिल किए हैं। मेरिट में तीसरे स्थान पर दो छात्राओं ने जगह बनाई है। मंडी जिले के सरस्वती विद्या मंदिर हाई स्कूल मोहिन गोपालपुर की छात्रा अंशुल ठाकुर और ऊना जिले के एसएचएमएमएल पब्लिक स्कूल जलग्रां की छात्रा सिया ठाकुर ने 98.71 (691/700) फीसदी अंक हासिल किए हैं।
स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से घोषित दसवीं कक्षा के नतीजों में निजी स्कूलों का दबदबा रहा है। परिणाम में टॉप-10 की सूची में 77 विद्यार्थियों ने जगह बनाई है। इनमें से 66 मेधावी निजी स्कूलों से हैं। सरकारी स्कूलों से मात्र 11 ही विद्यार्थी टॉप-10 में अपना स्थान बना पाए हैं। मौजूदा समय में सरकार सरकारी स्कूलों में सुविधाएं देने के दावे तो कर रही है लेकिन रिजल्ट आशा के अनुरूप नहीं मिल रहा है। स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों को किताबों से लेकर स्कूल बैग और वर्दी निशुल्क मिल रही है। बावजूद इसके सरकारी स्कूलों के बच्चे टॉप-10 की सूची में अपना दबदबा बनाने में नाकाम रहे हैं। वहीं जिन विद्यार्थियों ने अपना स्थान टॉप-10 सूची में बनाए है, वह भी 8वें रैंक से शुरू हुआ है। पहले से सातवें रैंक तक सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत एक भी विद्यार्थी अपना स्थान मेरिट में नहीं बना पाया है।