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भस्मासुर से बचने के लिए यहां गुफा में छिप गए थे भगवान शिव

Mon, 03 Sep 2018 05:05 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भरमौर (चंबा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भरमौर (चंबा) Updated Mon, 03 Sep 2018 05:05 PM IST
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Manimahesh Yatra 2018 Lord Shiva and Bhasmasur Story

बताया जाता है कि भस्मासुर ने कई वर्षों तक भगवान शिव की यहीं पर कठोर तपस्या की थी। भस्मासुर के तप से खुश होकर भगवान शंकर ने उसे मनवांछित वरदान दिया कि वह जिस किसी के सिर पर हाथ रखेगा, वह भस्म हो जाएगा।

Manimahesh Yatra 2018 Lord Shiva and Bhasmasur Story

भस्मासुर ने वरदान को शिव पर आजमाने का प्रयास किया तो भगवान शंकर ने धनछौ नामक स्थान पर स्थित अलौकिक गुफा में शरण ली। इसी के पास एक प्राकृतिक झरना बहता है। श्रद्धालु झरने से उठने वाले फव्वारे से स्नान करते हैं। महिलाएं झरने पर सुहागी चढ़ाती हैं।

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कथा के अनुसार भस्मासुर का वध भी यहीं हुआ था। धनछौ को भगवान शंकर का पहला द्वार माना जाता है। धनछौ पड़ाव को यात्रा का पवित्र द्वार भी कहा जाता है।

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धनछौ के ठीक ऊपर सामने भगवान वीरभद्र का मंदिर है। इसे भगवान शंकर के द्वारपाल के रूप में माना जाता है। धनछौ पर महंत जयकृष्ण गिरी महाराज ने कई वर्षों तक कठोर तप व भगवान शंकर की आराधना की थी।

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करीब दो दशक से यहां तप कर रहे महंत आकाश गिरी बताते हैं कि यह वह स्थान है, जहां पर कई बार मृत्यु के बाद पुण्य आत्माएं भगवान शंकर के लोक को जाते हुए देखी जा सकती हैं। यहां पर तप करने वाला मनवांछित वरदान पाता है। समुद्रतल से धनछौ पड़ाव 9 हजार फीट की ऊंचाई पर है। इसे यात्रा का आधार शिविर भी कहा जाता है। 

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