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दलाईलामा के निजी चिकित्सक रहे डॉ. यशी इस चिकित्सा पद्धति से करते थे कैंसर का इलाज, ऐसे रखी नींव

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला/मैक्लोडगंज Published by: Krishan Singh Updated Tue, 26 Nov 2019 12:33 PM IST
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Patients from all over the world used to visit Doctor Yashi to get cancer treatment, know about him
डॉक्टर यशी ढोंडेन(फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया

कैंसर का इलाज करने वाले पद्मश्री डॉ. येशी ढोंडेन की मंगलवार सुबह मैक्लोडगंज स्थित उनके आवास अशोका होटल में मौत हो गई। तिब्बतियन डॉक्टर ढोंडेन बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा के निजी चिकित्सक भी रह चुके है। उनकी मौत से जहां तिब्बती समुदाय गम में डूबा है, वहीं जिन कैंसर के मरीजों को उन्होंने नई जिंदगी दी, उनकी आंखें भी नम हैं। 

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- फोटो : अमर उजाला

डॉ. येशी कैंसर के अलावा ट्यूमर, एड्स, सुराइसिस, हेपेटाइटिस ल्यूकेमिया आदि गंभीर रोगों का भी इलाज करते थे। तिब्बती चिकित्सा पद्धति में बेहतरीन कार्य के लिए उन्हें 20 मार्च, 2018 को पद्मश्री अवार्ड से राष्ट्रपति ने सम्मानित किया था। निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री डॉ. लोबसंग सांग्ये ने डॉ. येशी ढोंडेन के निधन को अपूर्णीय क्षति बताया।

 

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- फोटो : सोशल मीडिया

डा. येशी की मृत्यु की खबर सुनते ही सुबह उनके निवास स्थान के बाहर सैकड़ों तिब्बती और स्थानीय लोग जमा हो गए। डॉ. ढोंडेन के पारिवारिक सदस्य लोबसांग त्सेरिंग ने बताया कि शुक्रवार सुबह उनका संस्कार मैक्लोडगंज में किया जाएगा। दो दिन तक उनकी देह की तिब्बतियन पद्धति के अनुसार पूजा होगी। 

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- फोटो : अमर उजाला

तिब्बती चिकित्सा एवं ज्योतिष संस्थान ‘मेन ट्सी खंग’ धर्मशाला के महासचिव त्सेरिंग फुंत्सोक ने बताया कि तिब्बती चिकित्सा पद्धति को दुनिया भर में प्रचारित करने वाले बहुत बड़ा नाम चला गया। डाॅ. येशी के शिष्य रहे डॉक्टर केलसंग ढोंडेन, डॉक्टर नामग्याल कुसर, डॉक्टर पसांग ग्याल्मो खंगकर ने कहा कि गुरुजी ने अपना पूरा जीवन समाजसेवा में लगा दिया।

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- फोटो : अमर उजाला

डॉ. येशी का तिब्बत के लोका क्षेत्र में 15 मई, 1927 को जन्म हुआ था। उनका परिवार तिब्बत की चिकित्सा पद्धति के लिए प्रसिद्ध रहा है। 11 वर्ष की आयु में उन्होंने चाकपोरी इंस्टीट्यूट ऑफ तिब्बतन मेडिसिन ल्हासा में दाखिला लिया। नौ वर्ष तक आयुर्वेदिक दवाओं पर अध्ययन किया। 

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