Makar Sankranti 2021: मकर संक्रांति पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं यानि सूर्य उत्तरायण में होता है। सूर्य पूर्व से उत्तर दिशा की ओर गमन करते हैं, तब उसकी किरणें सेहत और शांति को बढ़ाती हैं। आइए जानते हैं मकर संक्रांति पर्व से जुड़ी पौराणिक बातें।
Makar Sankranti 2021: जानिए मकर संक्रांति से जुड़ी पांच पौराणिक बातें
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भीष्म पितामह ने इसी दिन त्यागे थे अपने प्राण
भगवान श्रीकृष्ण ने भी उत्तरायन का महत्व बताते हुए गीता में कहा है कि उत्तरायन के 6 मास के शुभ काल में, जब सूर्य देव उत्तरायन होते हैं और पृथ्वी प्रकाशमय रहती है, तो इस प्रकाश में शरीर का परित्याग करने से व्यक्ति का पुनर्जन्म नहीं होता, ऐसे लोग ब्रह्म को प्राप्त हैं। यही कारण था कि भीष्म पितामह ने शरीर तब तक नहीं त्यागा था, जब तक कि सूर्य उत्तरायन नहीं हो गया।
इस दिन सूर्य देव जाते हैं अपने पुत्र शनि के घर
मकर संक्रांति का पौराणिक महत्व भी बड़ा है। मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं। इस लिहाज से मकर संक्रांति पिता और पुत्र के अनोखे मिलन को दर्शाता है। इसके अलावा मकर संक्रांति का पर्व ब्रह्मा, विष्णु, महेश, गणेश, आद्यशक्ति और सूर्य की आराधना एवं उपासना का पावन व्रत है, जो तन-मन-आत्मा को शक्ति प्रदान करता है।
भगवान विष्णु ने किया था असुरों का संहार
एक दूसरी मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन ही भगवान विष्णु ने पृथ्वी लोक पर असुरों का संहार कर उनके सिरों को काटकर मंदरा पर्वत पर गाड़ दिया था। तभी से भगवान विष्णु की इस जीत को मकर संक्रांति पर्व के तौर पर मनाया जाने लगा।
आत्मा होती है शुद्ध
मान्यता है कि मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण होने से प्राणियों की आत्मा शुद्ध होती है। उनकी संकल्प शक्ति बढ़ती है। ज्ञान तंतु विकसित होते हैं। मकर संक्रांति इसी चेतना को विकसित करने वाला पर्व है। यह संपूर्ण भारत वर्ष में किसी न किसी रूप में आयोजित होता है।