Mahakumbh 2025: हिंदू संस्कृति और परंपराओं में कुंभ मेले का विशेष महत्व है। यह अद्वितीय मेला भारत के चार पवित्र स्थानों पर आयोजित किया जाता है, इसमें प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक शामिल हैं। इसे केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं हैं, बल्कि इसमें खगोलीय घटनाओं का भी गहरा प्रभाव माना जाता है। साल 2025 में महाकुंभ का आयोजन प्रयागराज में होने जा रहा है, जिसकी तैयारियां जोरों-शोरों से चल रही है। यह महाकुंभ 13 जनवरी से आरंभ हो रहा है और 26 फरवरी 2025 को इसका समापन होगा। यानी यह कुंभ मेला पूरे 45 दिनों तक चलेगा।
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Mahakumbh 2025: जानें किन दो ग्रहों की स्थिति से किया जाता है महाकुंभ के स्थान का चयन
Thu, 05 Dec 2024 12:21 PM IST
ज्योति मेहरा
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति मेहरा
Updated Thu, 05 Dec 2024 12:21 PM IST
सार
हिंदू संस्कृति और परंपराओं में कुंभ मेले का विशेष महत्व है। यह अद्वितीय मेला भारत के चार पवित्र स्थानों पर आयोजित किया जाता है। हालांकि, इसमें खगोलीय घटनाओं का भी गहरा प्रभाव माना जाता है। आइए जानते हैं किन दो ग्रहों की स्थिति के अनुसार स्थान का चयन किया जाता है।
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महाकुंभ 2025
- फोटो : Amar Ujala
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महाकुंभ के स्थान का निर्धारण कैसे होता है?
- फोटो : adobestock
कुंभ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, मोक्ष प्राप्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा को जागृत करने का अवसर भी देता है। धार्मित मान्यता के अनुसार कुंभ में स्नान करने से पापों का नाश और पुण्य की प्राप्ति होती है। यह धार्मिक आयोजन सामाजिक और सांस्कृतिक समागम का प्रतीक माना जाता है।
महाकुंभ के स्थान का निर्धारण कैसे होता है?
महाकुंभ का आयोजन केवल चार स्थानों पर ही होता है, जिसमें प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक, और उज्जैन शामिल हैं। इसका चयन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के आधार पर किया जाता है। ज्योतिष के अनुसार, गुरु (बृहस्पति) और सूर्य की विशिष्ट राशियों में उपस्थिति के अनुसार तय होता है कि महाकुंभ किस स्थान पर आयोजित किया जाएगा।
महाकुंभ के स्थान का निर्धारण कैसे होता है?
महाकुंभ का आयोजन केवल चार स्थानों पर ही होता है, जिसमें प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक, और उज्जैन शामिल हैं। इसका चयन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के आधार पर किया जाता है। ज्योतिष के अनुसार, गुरु (बृहस्पति) और सूर्य की विशिष्ट राशियों में उपस्थिति के अनुसार तय होता है कि महाकुंभ किस स्थान पर आयोजित किया जाएगा।
महाकुंभ
- फोटो : adobestock
प्रयागराज महाकुंभ
जब गुरु वृषभ राशि में और सूर्य मकर राशि में होते हैं, तो महाकुंभ प्रयागराज में आयोजित होता है। 2025 में यही स्थिति होने के कारण महाकुंभ प्रयागराज में आयोजित किया जा रहा है।
नासिक महाकुंभ
गुरु और सूर्य जब सिंह राशि में होते हैं, तो यह आयोजन नासिक में होता है। अगला नासिक महाकुंभ 2027 में होगा।
जब गुरु वृषभ राशि में और सूर्य मकर राशि में होते हैं, तो महाकुंभ प्रयागराज में आयोजित होता है। 2025 में यही स्थिति होने के कारण महाकुंभ प्रयागराज में आयोजित किया जा रहा है।
नासिक महाकुंभ
गुरु और सूर्य जब सिंह राशि में होते हैं, तो यह आयोजन नासिक में होता है। अगला नासिक महाकुंभ 2027 में होगा।
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महाकुंभ
- फोटो : adobestock
हरिद्वार महाकुंभ
गुरु कुंभ राशि में और सूर्य मेष राशि में होते हैं, तो महाकुंभ हरिद्वार में लगता है। 2033 में हरिद्वार में यह मेला आयोजित होगा।
उज्जैन महाकुंभ
सूर्य मेष राशि में और गुरु सिंह राशि में होते हैं, तो महाकुंभ उज्जैन में लगता है। उज्जैन का अगला महाकुंभ 2028 में होगा।
गुरु कुंभ राशि में और सूर्य मेष राशि में होते हैं, तो महाकुंभ हरिद्वार में लगता है। 2033 में हरिद्वार में यह मेला आयोजित होगा।
उज्जैन महाकुंभ
सूर्य मेष राशि में और गुरु सिंह राशि में होते हैं, तो महाकुंभ उज्जैन में लगता है। उज्जैन का अगला महाकुंभ 2028 में होगा।
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12 वर्षों का अंतराल क्यों?
- फोटो : Amar Ujala
12 वर्षों का अंतराल क्यों?
महाकुंभ हर स्थान पर 12 वर्षों के अंतराल पर होता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, गुरु बृहस्पति को सभी राशियों का चक्र पूरा करने में 12 वर्ष लगते हैं। इसके अलावा, पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन से प्राप्त अमृत कलश को लेकर देवताओं और दानवों के बीच 12 दिवसीय युद्ध हुआ था, जो पृथ्वी पर 12 वर्षों के बराबर माना जाता है। इसी कारण प्रत्येक स्थान पर महाकुंभ 12 साल के बाद आयोजित किया जाता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
महाकुंभ हर स्थान पर 12 वर्षों के अंतराल पर होता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, गुरु बृहस्पति को सभी राशियों का चक्र पूरा करने में 12 वर्ष लगते हैं। इसके अलावा, पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन से प्राप्त अमृत कलश को लेकर देवताओं और दानवों के बीच 12 दिवसीय युद्ध हुआ था, जो पृथ्वी पर 12 वर्षों के बराबर माना जाता है। इसी कारण प्रत्येक स्थान पर महाकुंभ 12 साल के बाद आयोजित किया जाता है।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।