Maha Kumbh 2025: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ 2025 का शुभारंभ हो चुका है, जो एक भव्य और पवित्र आयोजन है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुंभ मेले में स्नान करने से व्यक्ति के पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। हिंदू धर्म की पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान निकले अमृत के लिए देवताओं और दानवों के बीच 12 वर्षों तक संघर्ष चला। इस दौरान, अमृत के कलश से कुछ बूंदें चार स्थानों पर गिरीं प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक। इन्हीं स्थानों पर कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है।
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Maha Kumbh 2025: स्नान के लिए नहीं जा पा रहे महाकुंभ तो घर बैठे करें ये काम, मिलेगा मां गंगा का आशीर्वाद
Tue, 14 Jan 2025 01:47 PM IST
ज्योति मेहरा
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति मेहरा
Updated Tue, 14 Jan 2025 01:47 PM IST
सार
आइए जानते हैं घर पर विशेष नियमों और विधियों का पालन करके महाकुंभ के पुण्य का लाभ कैसे प्राप्त किया जा सकता है।
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mahakumbh 2025
- फोटो : amar ujala
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स्नान का महत्व और विधि
- फोटो : adobestock
स्नान का महत्व और विधि
शाही स्नान का समय सूर्योदय से पहले का होता है। यदि आप पवित्र नदी या सरोवर के पास नहीं रह रहे हैं, तो अपने स्नान के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान के दौरान गंगा मैया का ध्यान करें और "हर हर गंगे" मंत्र का जाप करें। ऐसा करने से भी पुण्य प्राप्त होता है।
शाही स्नान का समय सूर्योदय से पहले का होता है। यदि आप पवित्र नदी या सरोवर के पास नहीं रह रहे हैं, तो अपने स्नान के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान के दौरान गंगा मैया का ध्यान करें और "हर हर गंगे" मंत्र का जाप करें। ऐसा करने से भी पुण्य प्राप्त होता है।
डुबकी लगाने का नियम
- फोटो : Prayagraj District Administration
डुबकी लगाने का नियम
कुंभ स्नान में नदी में पांच बार डुबकी लगाने की परंपरा है। यदि आप घर पर स्नान कर रहे हैं, तो मन ही मन गंगा स्नान का स्मरण करते हुए स्नान करें। स्नान के दौरान साबुन या अन्य रसायनों का प्रयोग करने से बचें, ताकि स्नान की पवित्रता बनी रहे।
कुंभ स्नान में नदी में पांच बार डुबकी लगाने की परंपरा है। यदि आप घर पर स्नान कर रहे हैं, तो मन ही मन गंगा स्नान का स्मरण करते हुए स्नान करें। स्नान के दौरान साबुन या अन्य रसायनों का प्रयोग करने से बचें, ताकि स्नान की पवित्रता बनी रहे।
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सूर्य और तुलसी को जल अर्पित करें
- फोटो : Adobe stock
सूर्य और तुलसी को जल अर्पित करें
स्नान के बाद भगवान सूर्य को अर्घ्य दें। इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरकर सूर्य की ओर अर्पित करें। इसके पश्चात अपने घर के आंगन या छत पर तुलसी मैया को जल चढ़ाएं।
स्नान के बाद भगवान सूर्य को अर्घ्य दें। इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरकर सूर्य की ओर अर्पित करें। इसके पश्चात अपने घर के आंगन या छत पर तुलसी मैया को जल चढ़ाएं।
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दान का विशेष महत्व
- फोटो : adobestock
दान का विशेष महत्व
महाकुंभ में दान को अत्यंत शुभ माना गया है। स्नान के बाद गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, या धन का दान करें। ऐसा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
महाकुंभ में दान को अत्यंत शुभ माना गया है। स्नान के बाद गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, या धन का दान करें। ऐसा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।