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Hanuman Chalisa: हनुमान चालीसा से सीखिए लाइफ मैनेजमेंट की 5 बातें,जो करियर को देंगी ऊंची उड़ान

Sun, 29 May 2022 07:35 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन ,वास्तुविद
अनीता जैन ,वास्तुविद Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 29 May 2022 07:35 AM IST
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Hanuman Chalisa Five Sources Of Success Can Be Learned From Chalisa How Should Our Personality In Professional Life
Hanuman Chalisa: हनुमान जी की उपासना से सुख, शांति, आरोग्य एवं लाभ की प्राप्ति होती है। नकारात्मक शक्तियां भी हनुमानजी के भक्तों को परेशान नहीं करती। - फोटो : Social media
Hanuman Chalisa Benefits: हनुमान चालीसा रामजी के परम भक्त हनुमानजी की कृपा पाने की श्रेष्ठ स्तुति है। चालीसा जिसमें 40 चौपाइयां होती हैं। यदि आप निरंतर हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं तो यह आपके सारे कष्ट दूर कर आपके आत्मविश्वास को बढ़ाता है,इसके अलावा आप इन चौपाइयों के अर्थ में छिपे लाइफ मैनेजमेंट के सूत्र समझ लें तो निश्चय ही ये आपको जीवन के हर क्षेत्र में सफलता दिला सकते हैं। आइए जानते हैं।


हनुमान चालीसा Hanuman Chalisa

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।। रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।
महावीर विक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।।कंचन वरन विराज सुवेसा। कानन कुण्डल कुंचित केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै।शंकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग वन्दन।।
विद्यावान गुणी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।।प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। विकट रूप धरि लंक जरावा।। भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे।।
लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।सनकादिक ब्रह्मादि मुनीशा। नारद सारद सहित अहीसा।।
जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कवि कोविद कहि सके कहाँ ते।।तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र विभीषन माना। लंकेश्वर भये सब जग जाना।।जुग सहस्र योजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डरना।।
आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै।।भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।।संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम वचन ध्यान जो लावै।।
सब पर राम तपस्वी राजा। तिनके काज सकल तुम साजा।और मनोरथ जो कोई लावै। सोई अमित जीवन फल पावै।।

चारों युग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।।साधु-संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे।।
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस वर दीन जानकी माता।।राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुम्हरे भजन राम को भावै। जनम-जनम के दुख बिसरावै।।अन्त काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई।।
और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेई सर्व सुख करई।।संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहिं बंदि महा सुख होई।।
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।।तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा।।

दोहा 
पवनतनय संकट हरन,मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित,हृदय बसहु सुर भूप।।

Hanuman Chalisa Five Sources Of Success Can Be Learned From Chalisa How Should Our Personality In Professional Life
हनुमान मंदिर - फोटो : अमर उजाला
बड़ों की बात मानें-

श्रीगुरु चरन सरोज रज
निज मनु मुकुरु सुधारि।


अर्थ-अपने गुरु के चरणों की धूल से अपने मन के दर्पण को साफ करता हूं।

गुरु का महत्व चालीसा के पहले दोहे की पहली लाइन में लिखा गया है। जीवन में गुरु नहीं है तो आपको आगे बढ़ने में दिक्क्तों का सामना करना पड़ सकता है। गुरु ही आपको सही रास्ता दिखा सकते हैं। माता-पिता को पहला गुरु ही कहा गया है। गुरु यानी जो आपका सही मार्गदर्शन करते हैं। अगर तरक्की की राह पर आगे बढ़ना है तो विनम्रता के साथ बड़ों का सम्मान करें।
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hanuman

अच्छा दिखें
कंचन बरन बिराज सुबेसा,कानन कुंडल कुंचित केसा।


अर्थ - आपके शरीर का रंग सोने की तरह चमकीला है,सुवेष यानी अच्छे वस्त्र पहने हैं, कानों में कुंडल हैं और बाल संवरे हुए हैं।

आज के दौर में आपकी तरक्की इस बात पर बहुत निर्भर करती है कि आप रहते और दिखते कैसे हैं। अगर आप बहुत गुणवान और सामर्थ्यवान भी हैं लेकिन अच्छे से नहीं रहते हैं तो ये बात आपके समुचित विकास को प्रभावित कर सकती है। इसलिए हमेशा अपनी लुक का ध्यान रखें।

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विद्या के साथ गुणवान भी
बिद्यावान गुनी अति चातुर,राम काज करिबे को आतुर।


अर्थ - आप विद्यावान हैं,गुणों की खान हैं,चतुर भी हैं। राम के काम करने के लिए सदैव आतुर रहते हैं।

आज के दौर में अच्छी शिक्षा लेना बहुत जरूरी है। लेकिन इस लाइन का अर्थ ये भी है कि सिर्फ डिग्री होने से आप सफल नहीं होंगे। विद्या हासिल करने के साथ आपको अपने गुणों को भी बढ़ाना पड़ेगा,बुद्धि में चतुराई भी लानी होगी। हनुमानजी में तीनों गुण हैं,वे सूर्य के शिष्य हैं,गुणी भी हैं और चतुर भी।

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अच्छे श्रोता बनें
प्रभु चरित सुनिबे को रसिया,राम लखन सीता मन बसिया।

अर्थ - आप रामचरित यानी राम की कथा सुनने में रसिक है,राम,लक्ष्मण और सीता तीनों ही आपके मन में वास करते हैं।

इस चौपाई का यह अभिप्राय है कि जो आपका काम है,उसे लेकर सिर्फ बोलने में नहीं,सुनने में भी आपको रस आना चाहिए। अच्छा श्रोता होना बहुत जरूरी है। अगर आपके पास सुनने की कला नहीं है तो आप कभी अच्छे लीडर नहीं बन सकते।

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