Sawan 2026 Ghar Par Rudrabhishek Karne ki Vidhi: भगवान शिव को समर्पित श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को शिवलिंग पर अभिषेक करने की विशेष परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन सच्ची श्रद्धा के साथ जल, दूध या पंचामृत से अभिषेक करने पर भगवान भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। कई लोग किसी कारणवश मंदिर नहीं जा पाते, ऐसे में वे घर पर ही भगवान शिव की पूजा करना चाहते हैं। यदि अभिषेक की विधि सही ढंग से ज्ञात हो, तो घर पर भी पूर्ण नियमों के साथ शिवलिंग का पूजन किया जा सकता है। धार्मिक ग्रंथों जैसे शिव पुराण, स्कंद पुराण और लिंग पुराण में शिवलिंग की पूजा और अभिषेक का विस्तृत महत्व बताया गया है।
Rudrabhishek Vidhi: घर पर शिव जी का रुद्राभिषेक कैसे करें? जानें सामग्री से लेकर क्षमा प्रार्थना तक पूरी विधि
Rudrabhishek Vidhi: यदि अभिषेक की विधि सही ढंग से ज्ञात हो, तो घर पर भी पूर्ण नियमों के साथ शिवलिंग का पूजन किया जा सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं घर पर भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने की पूरी विधि।
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शिभ अभिषेक का महत्व
शिव पुराण में भगवान शिव को अभिषेक अत्यंत प्रिय बताया गया है। जल, पंचामृत और बिल्वपत्र से किया गया पूजन मन की शुद्धि और पापों के नाश का माध्यम माना जाता है। वहीं लिंग पुराण के अनुसार जलाभिषेक सबसे सरल और सभी के लिए सुलभ उपाय है। यदि घर में पहले से शिवलिंग स्थापित है तो उसी का पूजन करना चाहिए। यदि नहीं, तो स्वच्छ मिट्टी से पार्थिव शिवलिंग बनाकर भी पूजा की जा सकती है, जिसका विशेष महत्व बताया गया है। संध्या के समय प्रदोष काल में अभिषेक करना अधिक शुभ माना जाता है, हालांकि सुविधा अनुसार किसी भी शुभ समय में यह पूजा की जा सकती है।
रुद्राभिषेक की सामग्री
- तांबे या पीतल का लोटा
- शुद्ध जल, गंगाजल
- कच्चा दूध, स्टील का लोटा
- दही, शुद्ध घी, शहद
- गन्ने और अनार आदि फलों के रस (यदि उपलब्ध हो)
- शक्कर या मिश्री
- इत्र
- भस्म (विभूति)
- अष्टगंध
- चंदन
- अक्षत (साबुत चावल)
- फूलों की माला, कमल का फूल (यदि उपलब्ध हो)
- सफेद या सुगंधित पुष्प, आक पुष्प, पीले कनेर का फूल
- भांग, शमी पत्र, धतूरा, बेलफल
- बेलपत्र (तीन पत्ती या इससे ऊपर की पत्तियों वाला)
- मौसमी फल
- नैवेद्य (मिठाई)
- धूप और दीपक
- दक्षिणा (11 रुपये से लेकर श्रद्धा अनुसार)
अभिषेक शुरू करने से पहले करें ये काम
अभिषेक आरंभ करने से पूर्व कुछ आवश्यक तैयारियां करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। सबसे पहले प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ और शुद्ध वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें और वहां धूप तथा घी का दीपक प्रज्वलित करें।
अभिषेक से पहले करें शिव परिवार की पूजा
अभिषेक से पहले शिव परिवार की पूजा का विशेष महत्व होता है। सबसे पहले भगवान गणेश को जल अर्पित कर उन्हें भोग लगाएं। इसके बाद माता गौरा को जल, श्रृंगार सामग्री और नैवेद्य अर्पित करें। फिर भगवान कार्तिकेय को पुष्प और भोग समर्पित करें और अंत में नंदी जी को बेलपत्र व प्रसाद अर्पित करें। ध्यान रखें कि भांग और धतूरा केवल भगवान शिव को ही अर्पित किए जाते हैं, अन्य किसी को नहीं। इसके बाद “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक शुरू करें और इस दौरान अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
12 ज्योतिर्लिंगों का करें स्मरण
सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम् ।
उज्जयिन्यां महाकालम्ॐकारममलेश्वरम् ॥१॥
परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमाशंकरम् ।
सेतुबंधे तु रामेशं नागेशं दारुकावने ॥२॥
वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यंबकं गौतमीतटे ।
हिमालये तु केदारम् घुश्मेशं च शिवालये ॥३॥
एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः ।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति ॥४॥
पहला चरण: जल से अभिषेक
अभिषेक की प्रक्रिया क्रमबद्ध तरीके से की जाती है। सबसे पहले शिवलिंग पर स्वच्छ जल अर्पित करें, संभव हो तो जल की धारा लगातार प्रवाहित करें। इसके अलावा आप 3, 5 या 11 बार भी जल अर्पित कर सकते हैं।
दूसरा चरण: दूध से अभिषेक
इसके बाद कच्चे दूध से अभिषेक करें और पुनः जल चढ़ाकर शिवलिंग को शुद्ध करें।
तीसरा चरण: घी से अभिषेक
इसके बाद शुद्ध घी अर्पित करें और उसके बाद फिर जल से स्नान कराएं।
चौथा चरण: शहद से अभिषेक
इसके पश्चात दही से अभिषेक कर पुनः शुद्ध जल चढ़ाएं।
पांचवां चरण: फलों के रस से अभिषेक
अगले चरण में गन्ने का रस या अन्य फलों के रस से अभिषेक किया जा सकता है, जिसके बाद जल चढ़ाना आवश्यक है।
छठा चरण: शक्कर या मिश्री
अब शक्कर या मिश्री अर्पित करें और शुद्ध जल से साफ करें।
सातवां चरण: दही से अभिषेक
इसके पश्चात दही से अभिषेक कर फिर से शुद्ध जल से शिवलिंग का स्नान कराएं।
आठवां चरण: गंगाजल करें अर्पित
अंत में गंगाजल अर्पित करें, जिसे अभिषेक का पूर्ण और पवित्र समापन माना जाता है।
भगवान शिव का श्रृंगार करें
- अभिषेक पूर्ण होने के बाद भगवान शिव का श्रृंगार करना आवश्यक माना जाता है।
- सबसे पहले शिवलिंग को हल्के हाथों से साफ करें।
- इसके पश्चात वस्त्र और जनेऊ अर्पित करें। यदि वस्त्र सफेद हो, तो उस पर थोड़ा अष्टगंध लगाया जा सकता है।
- फिर इत्र अर्पित करें और उसके बाद भस्म (विभूति) लगाएं।
- इसके उपरांत अष्टगंध और चंदन अर्पित करें तथा अंत में अक्षत (संपूर्ण चावल) चढ़ाएं।
- ध्यान रखें कि चावल टूटे हुए न हों। इसके साथ जौ, काले तिल और साबुत हरी मूंग भी अर्पित किए जा सकते हैं।
पूजन सामग्री अर्पित करें
श्रृंगार के बाद भगवान शिव को विभिन्न पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। इसमें फूलों की माला, कमल, सुगंधित पुष्प, आक के फूल, कमलगट्टा, भांग, शमी पत्र, बेलफल, धतूरा, मौसमी फल और मिठाई (नैवेद्य) शामिल हैं।
बेलपत्र अर्पित करें
पूजा के अंत में बेलपत्र चढ़ाने का विशेष महत्व होता है। बेलपत्र अर्पित करते समय उसका चिकना भाग शिवलिंग की ओर रखें और उस पर साबुत चावल के दाने लगाएं। प्रत्येक बेलपत्र अर्पित करते समय इन मंत्रों का उच्चारण करें।
त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम्।
त्रिजन्मपापसंहारं एकबिल्वं शिवार्पणम्॥
साथ ही आप महामृत्युंजय मंत्र का जप भी कर सकते हैं।