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Sawan 2022: सावन माह में जरूर करें शिव तांडव स्त्रोत का पाठ, भोलेनाथ होंगे प्रसन्न

Mon, 01 Aug 2022 11:05 PM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Mon, 01 Aug 2022 11:05 PM IST
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Sawan 2022 How to Please Lord Shiva by Shiv Tandav Stotram Path Lyrics in Hindi
सावन माह में जरूर करें शिव तांडव स्त्रोत का पाठ - फोटो : self

Shiv Tandav Stotram Path Lyrics in Hindi: शिव तांडव स्तोत्रम  ब्रह्मांड के सबसे ज्ञानी माने जाने वाले रावण द्वारा रचित है। स्तोत्रम संस्कृत भाषा में है जो हमारे भगवान शिव की सुंदरता और शक्ति का वर्णन करता है। शिव तांडव स्तोत्रम शिव और उनके भक्तों को बहुत प्रिय है। शिव तांडव स्तोत्रम बहुत लयबद्ध है और इसे सुनने से व्यक्ति को आध्यात्मिक परमानंद की अनुभूति होती है। भगवान शिव की स्तुति करते हुए रचना में बहुत उच्च ऊर्जा सकारात्मक शब्दों का प्रयोग किया गया है। शब्द और लय बहुत कठिन हैं, लेकिन अगर आप भक्ति भाव में लीं होकर इस पर विचार करने  का प्रयास करेंगे तो आप इसे कंठस्थ भी कर सकते हैं. इसके लिए कोई नियम और बाधा नहीं है। कोई भी शिव तांडव स्तोत्र का पाठ कर सकता है। यह निश्चित रूप से आपको शाश्वत आनंद और सकारात्मक वाइब्स की अनुभूति देगा। चूंकि सावन का महीना शुरू हो चुका है और यह भगवान भोलेनाथ का सबसे प्रिय मास माना जाता है। इस महीने में यदि कोई भक्त शिव तांडव स्त्रोतम का पाठ करता है तो इससे भगवान भोलेनाथ प्रसन्न हो जाएंगे। पढ़ें सम्पूर्ण शिव तांडव स्तोत्रम यहां। 

Sawan 2022 How to Please Lord Shiva by Shiv Tandav Stotram Path Lyrics in Hindi
Shiv Tandav Stotram Path Lyrics in Hindi - फोटो : Social media

शिवताण्डवस्तोत्रम्
॥ श्रीगणेशाय नमः ॥
जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम् ।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं
चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम् ॥॥

जटाकटाहसम्भ्रमभ्रमन्निलिम्पनिर्झरी
विलोलवीचिवल्लरीविराजमानमूर्धनि ।
धगद्धगद्धगज्ज्वलल्ललाटपट्टपावके
किशोरचन्द्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम ॥॥

धराधरेन्द्रनंदिनीविलासबन्धुबन्धुर
स्फुरद्दिगन्तसन्ततिप्रमोदमानमानसे ।
कृपाकटाक्षधोरणीनिरुद्धदुर्धरापदि
क्वचिद्दिगम्बरे(क्वचिच्चिदम्बरे) मनो विनोदमेतु वस्तुनि ॥॥

जटाभुजङ्गपिङ्गलस्फुरत्फणामणिप्रभा
कदम्बकुङ्कुमद्रवप्रलिप्तदिग्वधूमुखे ।
मदान्धसिन्धुरस्फुरत्त्वगुत्तरीयमेदुरे
मनो विनोदमद्भुतं बिभर्तु भूतभर्तरि ॥॥

Sawan 2022 How to Please Lord Shiva by Shiv Tandav Stotram Path Lyrics in Hindi
Shiv Tandav Stotram Path Lyrics in Hindi - फोटो : Social media

सहस्रलोचनप्रभृत्यशेषलेखशेखर
प्रसूनधूलिधोरणी विधूसराङ्घ्रिपीठभूः ।
भुजङ्गराजमालया निबद्धजाटजूटक
श्रियै चिराय जायतां चकोरबन्धुशेखरः ॥॥

ललाटचत्वरज्वलद्धनञ्जयस्फुलिङ्गभा
निपीतपञ्चसायकं नमन्निलिम्पनायकम् ।
सुधामयूखलेखया विराजमानशेखरं
महाकपालिसम्पदेशिरोजटालमस्तु नः ॥॥

करालभालपट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल
द्धनञ्जयाहुतीकृतप्रचण्डपञ्चसायके ।
धराधरेन्द्रनन्दिनीकुचाग्रचित्रपत्रक
प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने रतिर्मम ॥॥

नवीनमेघमण्डली निरुद्धदुर्धरस्फुरत्
कुहूनिशीथिनीतमः प्रबन्धबद्धकन्धरः ।
निलिम्पनिर्झरीधरस्तनोतु कृत्तिसिन्धुरः
कलानिधानबन्धुरः श्रियं जगद्धुरंधरः ॥॥

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Sawan 2022 How to Please Lord Shiva by Shiv Tandav Stotram Path Lyrics in Hindi
Shiv Tandav Stotram Path Lyrics in Hindi - फोटो : Social media

प्रफुल्लनीलपङ्कजप्रपञ्चकालिमप्रभा
वलम्बिकण्ठकन्दलीरुचिप्रबद्धकन्धरम् ।
स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं
गजच्छिदांधकच्छिदं तमन्तकच्छिदं भजे ॥॥

अगर्व सर्वमङ्गलाकलाकदम्बमञ्जरी
रसप्रवाहमाधुरी विजृम्भणामधुव्रतम् ।
स्मरान्तकं पुरान्तकं भवान्तकं मखान्तकं
गजान्तकान्धकान्तकं तमन्तकान्तकं भजे ॥॥

जयत्वदभ्रविभ्रमभ्रमद्भुजङ्गमश्वस
द्विनिर्गमत्क्रमस्फुरत्करालभालहव्यवाट् ।
धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन्मृदङ्गतुङ्गमङ्गल
ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्डताण्डवः शिवः ॥॥

दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजङ्गमौक्तिकस्रजोर्
गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः ।
तृणारविन्दचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः
समं प्रव्रितिक: कदा सदाशिवं भजाम्यहम ॥॥

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Sawan 2022 How to Please Lord Shiva by Shiv Tandav Stotram Path Lyrics in Hindi
Shiv Tandav Stotram Path Lyrics in Hindi

कदा निलिम्पनिर्झरीनिकुञ्जकोटरे वसन्
विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरः स्थमञ्जलिं वहन् ।
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः
शिवेति मंत्रमुच्चरन् कदा सुखी भवाम्यहम् ॥॥

निलिम्प नाथनागरी कदम्ब मौलमल्लिका-
निगुम्फनिर्भक्षरन्म धूष्णिकामनोहरः ।
तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनींमहनिशं
परिश्रय परं पदं तदङ्गजत्विषां चयः ॥॥

प्रचण्ड वाडवानल प्रभाशुभप्रचारणी
महाष्टसिद्धिकामिनी जनावहूत जल्पना ।
विमुक्त वाम लोचनो विवाहकालिकध्वनिः
शिवेति मन्त्रभूषगो जगज्जयाय जायताम् ॥॥

इमं हि नित्यमेवमुक्तमुत्तमोत्तमं स्तवं
पठन्स्मरन्ब्रुवन्नरो विशुद्धिमेतिसंततम् ।
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथा गतिं
विमोहनं हि देहिनां सुशङ्करस्य चिंतनम् ॥॥

पूजावसानसमये दशवक्त्रगीतं
यः शम्भुपूजनपरं पठति प्रदोषे ।
तस्य स्थिरां रथगजेन्द्रतुरङ्गयुक्तां
लक्ष्मीं सदैव सुमुखिं प्रददाति शम्भुः ॥॥

इति श्रीरावण कृतम्
शिव ताण्डव स्तोत्रम्स म्पूर्णम्

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