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Kabirdas Jayanti 2023: आज कबीर जयंती के अवसर पर पढ़ें कबीर दास के प्रसिद्ध दोहे, जीवन को मिलेगी सही राह

धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आशिकी पटेल Updated Sun, 04 Jun 2023 10:21 AM IST
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Kabirdas Jayanti 2023 Kabir Ke Motivational Dohe with hindi meaning
कबीर जयंती के अवसर पर पढ़ें कबीर दास के प्रसिद्ध दोहे - फोटो : Amar Ujala

Kabirdas Jayanti 2023, Kabir Ke Dohe in Hindi: ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तिथि को मध्यकाल के महान कवि और संत कबीर दास की जयंती मनाई जाती है। इस साल कबीर दास जी की जयंती आज यानी 04 जून है। माना जाता है कि कबीर दास जी का जन्म सन् 1398 ई के आसपास लहरतारा ताल, काशी के समक्ष हुआ था। संत कबीर दास हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि थे। उन्होंने समाज में फैली भ्रांतियों और बुराइयों को दूर करने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। कबीर दास जी ने अपने दोहों के जरिए लोगों में भक्ति भाव का बीज बोया। उनके दोहे अत्यंत सरल भाषा में थे, जिसकी वजह से इन दोहों ने लोगों पर व्यापक प्रभाव डाला। आज भी कबीर दास जी के दोहे जीवन जीने की सही राह दिखाते हैं। ऐसे में आज कबीर दास जयंती के अवसर पर चलिए पढ़ते हैं संत कबीर के कुछ प्रेरणादायक दोहे और उनका अर्थ...



Kabirdas Jayanti 2023: आज है कबीर दास जयंती, जानिए उनके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य 

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कबीर जयंती के अवसर पर पढ़ें कबीर दास के प्रसिद्ध दोहे - फोटो : Instagram

पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय,
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।

अर्थ- बड़ी-बड़ी पुस्तकें पढ़ कर संसार में कितने ही लोग मृत्यु के द्वार पहुंच गए, लेकिन सभी विद्वान न हो सके। कबीर मानते हैं कि यदि कोई प्रेम या प्यार के केवल ढाई अक्षर ही अच्छी तरह पढ़ ले, अर्थात प्यार का वास्तविक रूप पहचान ले तो वही सच्चा ज्ञानी होगा।


 
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कबीर जयंती के अवसर पर पढ़ें कबीर दास के प्रसिद्ध दोहे - फोटो : iStock

जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि है मैं नाही
सब अँधियारा मिट गया, दीपक देखा माही

अर्थ- जब मैं अपने अहंकार में डूबा था, तब प्रभु को न देख पाता था। लेकिन जब गुरु ने ज्ञान का दीपक मेरे भीतर प्रकाशित किया तब अज्ञान का सब अंधकार मिट गया। ज्ञान की ज्योति से अहंकार जाता रहा और ज्ञान के आलोक में प्रभु को पाया।

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कबीर जयंती के अवसर पर पढ़ें कबीर दास के प्रसिद्ध दोहे - फोटो : Instagram
बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर
पंछी को छाया नहीं फल लागे अति दूर।

अर्थ:- खजूर के पेड़ के समान बड़ा होने का क्या लाभ, जो ना ठीक से किसी को छाँव दे पाता है। और न ही उसके फल सुलभ होते हैं।
 
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कबीर जयंती के अवसर पर पढ़ें कबीर दास के प्रसिद्ध दोहे - फोटो : Instagram

गुरु गोविंद दोउ खड़े, काके लागूं पांय
बलिहारी गुरु आपनो, गोविंद दियो बताय।

अर्थ- गुरु और गोविंद यानी भगवान दोनों एक साथ खड़े हैं। पहले किसके चरण-स्पर्श करें। कबीरदास जी कहते हैं, पहले गुरु को प्रणाम करूंगा, क्योंकि उन्होंने ही गोविंद तक पहुंचने का मार्ग बताया है।

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