घर के मुख्य द्वार पर शंख, चक्र और तिलक लगाने का क्या है धार्मिक महत्व और मान्यताएं
Astro Tips: शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार, घर के मुख्य द्वार से ही सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। इसलिए इसे पवित्र और शुभ प्रतीकों से सजाने की परंपरा रही है। शंख, चक्र और तिलक ऐसे ही दिव्य चिन्ह हैं, जिनका विशेष महत्व बताया गया है।
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Astro Tips: सनातन धर्म में घर का मुख्य द्वार केवल प्रवेश का स्थान नहीं, बल्कि ऊर्जा का प्रमुख केंद्र माना गया है। पौराणिक ग्रंथों में भी इसके महत्व का उल्लेख मिलता है। रामायण के एक प्रसंग के अनुसार, जब हनुमान जी माता सीता की खोज करते हुए लंका पहुंचे, तब उन्होंने विभीषण के घर के बाहर तुलसी का चौरा और शंख-चक्र के पवित्र चिन्ह अंकित देखे। इन शुभ प्रतीकों को देखकर उन्होंने समझ लिया कि यह किसी भगवान के भक्त का घर है और वहीं रुककर विभीषण से उनकी मुलाकात हुई। यह प्रसंग स्पष्ट करता है कि मुख्य द्वार पर बने शुभ चिह्न किसी घर की आध्यात्मिक पहचान और सकारात्मक ऊर्जा का संकेत होते हैं।
शंख का महत्व
शंख को मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु से जुड़ा पवित्र प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि जहां शंख का वास होता है, वहां दरिद्रता और नकारात्मक शक्तियां नहीं टिक पातीं। मुख्य द्वार पर शंख का चिन्ह बनाने या स्थापित करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सुख-समृद्धि का वातावरण बना रहता है। शंख की ध्वनि को भी वातावरण को शुद्ध करने वाला माना गया है।
चक्र का महत्व
चक्र, भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र का प्रतीक है, जिसे बुराई और अधर्म के नाश का प्रतीक माना जाता है। मुख्य द्वार पर चक्र का चिन्ह लगाने से घर के आसपास की नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं और यह एक अदृश्य सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है। धार्मिक दृष्टि से यह घर में शांति, संतुलन और सुरक्षा बनाए रखने में सहायक होता है।
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तिलक का महत्व
तिलक को सनातन परंपरा में शुभता, सम्मान और आध्यात्मिकता का प्रतीक माना गया है। मुख्य द्वार पर कुमकुम, हल्दी या चंदन से तिलक लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश बढ़ता है और देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है। यह एक प्रकार का मंगल संकेत होता है, जो घर के वातावरण को पवित्र और शुभ बनाता है।
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ये हैं गलत प्रथाएं
आजकल कई लोग नजर दोष और नकारात्मक शक्तियों से बचने के लिए घर के मुख्य द्वार पर पुराने जूते, साइकिल या स्कूटर के टायर, या विभिन्न प्रकार के नजर बट्टू टांग देते हैं। हालांकि यह प्रचलन समाज में बढ़ता जा रहा है, लेकिन धार्मिक दृष्टि से इसे उचित नहीं माना गया है।
धर्म शास्त्रों और विद्वानों के अनुसार, जूते, टायर या इस प्रकार की अनुपयोगी वस्तुएं अपवित्र मानी जाती हैं। इन्हें मुख्य द्वार पर टांगना न केवल घर की सुंदरता को प्रभावित करता है, बल्कि यह नकारात्मक ऊर्जा को भी आकर्षित कर सकता है। ऐसे उपाय अंधविश्वास पर आधारित होते हैं और इनका शास्त्रों में कोई उल्लेख नहीं मिलता।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।