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रुस्तम-ए जमां: यहां गढ़े जाते हैं इंटरनेशनल पहलवान, 250 खिलाड़ी सीख रहे दांव-पेच, देखें तस्वीरें

विपुल सैनी, अमर उजाला, मेरठ Updated Wed, 26 Sep 2018 05:25 PM IST
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ccsus rustam e jaman wrestling stadium gives platform to new wrestler see pics
सीसीएसयू

कुश्ती के खेल में अब बदलाव देखने को मिल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों को नई तकनीक सिखाई जा रही है। वहीं पुराने स्टाइल में नई को मिलाकर खिलाड़ियों को तैयार करने का नजारा सीसीएसयू के रुस्तम-ए जमां कुश्ती स्टेडियम में देखा जा सकता है। यहां 250 खिलाड़ी कुश्ती के गुर सीख रहे हैं। इनमें 80 बेटियां हैं। आगे तस्वीरों में देखें कैसे तैयार हो रहे हैं कुश्ती के ये जांबाज होनहार:-

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सीसीएसयू

कुश्ती कोच कोच डॉ.जबर सिंह सोम ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई तकनीक सामने वाले खिलाड़ियों को चित्त करने के लिए इस्तेमाल की जा रही है। कुश्ती में अब पहलवान का शरीर देखकर ताकत का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। अब पहलवान को खास ट्रेनिंग, नई टेक्निक दी जा रही है।

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ये है कुछ दांव पेच

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सीसीएसयू
खुरचन तकान, दरखत तकान, खुस ख्वान, कलाजंप, आर्म ड्रेक, ढाक, खेमे आदि पुराने दांव पेच हैं। इन्हीं में कुछ अंतर कर नई टेक्निक तैयार की गई हैं। इससे खिलाड़ी बेहतर करते हैं। 

ऐसे हुई शुरुआत

कोच डॉ. जबर सिंह सोम के मुताबिक 30 अगस्त 1983 में पहला सेंटर सीसीएसयू के अंदर खुला था। उसी समय उनकी नियुक्ति हुई। पहले जूट का मैट था जिस पर खिलाड़ियों को प्रैक्टिस कराई जाती थी। इसके बाद ऑडिटोरियम में सेंटर को शिफ्ट किया गया। सन 2002 में यह हॉल बनाया गया। उस समय इंटरनेशनल कुश्ती प्रतियोगिता हुई। बताते हैं कि  इस समय 250 खिलाड़ी कुश्ती सीख रहे हैं, इनमें करीब 80 से अधिक बेटियां कुश्ती सीख रही हैं। अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी अलका तोमर की जीत से यहां लड़कियों में रुझान बढ़ा।

सरकार, फेडरेशन दे रही साथ

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रेसलिंग

कोच जबर सिंह सोम ने बताया कि खेलों को लेकर सरकार और फेडरेशन दोनों ही ध्यान दे रहीं है। पहले खिलाड़ियों को खुद के खर्चे पर कुश्ती प्रतियोगिताओं में भाग लेने जाना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें खर्चे में मदद की जाती है। कुश्ती में लगातार देहात क्षेत्र से आने वाले बच्चे अच्छा कर रहे हैं। हरियाणा के बाद कुश्ती में उत्तर प्रदेश का दूसरा स्थान आता है। इसके बाद पंजाब, महाराष्ट्र हैं। सीसीएसयू के कुश्ती स्टेडियम से 26 अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकल चुके हैं।

अभी इनकी है कमी

कोच के मुताबिक स्टेडियम में ज्यादा खिलाड़ी कुश्ती सीखने आ रहे हैं। इससे स्टेडियम छोटा पड़ रहा है। 3 मैट वाले कुश्ती हॉल के लिए हमने सरकार से भी मांग की है।

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68 किग्रा वर्ग ज्यादा प्रचलन में

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सीसीएसयू

भारत में कुश्ती का क्रेज जिस तरह से बढ़ा है उसी प्रकार यहां पहलवान तैयार हो रहे हैं। यहां ज्यादा फाइट 68 किग्रा वर्ग में है इसी को ही खिलाड़ी बेहतर से कर पाते हैं। 68 किग्रा. वर्ग में जगरूप, जगविंदर, सत्यवान, स्वेच्छा सिंह, सुशील, बजरंग, आदि खिलाड़ियों ने खूब नाम कमाया है। कोच जबर सिंह के मुताबिक 68 किग्रा. में खिलाड़ी शानदार परफार्म करते हैं। इससे ऊपर के वर्गों में खिलाड़ियों की कमी है।  

छह घंटे की प्रैक्टिस

कुश्ती में अपना कॅरियर बनाने के लिए खिलाड़ी की उम्र कम से कम दस वर्ष होनी चाहिए। कोच के मुताबिक एक शानदार अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनने के लिए करीब 15 साल लग जाते हैं। पर कम समय में भी खिलाड़ी नई टेक्निक के साथ अच्छा कर रहे हैं। एक कुश्ती खिलाड़ी को रोजाना छह घंटे की प्रैक्टिस जरूरी है। 15 साल तक की उम्र में घी, दूध, बादाम, जूस, फल आदि बेहद जरूरी है।

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