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माता-पिता ने रोका, बिना बताए की ट्रेनिंग और अब तबाबी ने ओलंपिक में जीता पहला मेडल
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
Updated Mon, 08 Oct 2018 04:41 PM IST
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तबाबी देवी
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तबाबी देवी थंगजाम की उम्र सिर्फ 16 साल है और उन्होंने अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में चल रहे यूथ ओलंपिक गेम्स में जुडो स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। तबाबी ओलंपिक में जुडो स्पर्धा में मेडल जीतने वाली भारत की पहली जूडोका बन गयी हैं। आज तक कोई भारतीय जुडो खिलाड़ी सीनियर या जूनियर ओलंपिक में मेडल नहीं जीत सका है।
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तबाबी देवी थंगजाम
तबाबी देवी को महिलाओं के 44 किग्रा वर्ग के फाइनल में वेनेजुएला की मारिया गिमिनेज के हाथों 0-2 की शिकस्त झेलनी पड़ी। मगर इस बात को ज्यादा समय नहीं हुआ है कि तबाबी को बिना बताए अपने पसंदीदा खेल की ट्रेनिंग करनी पड़ती थी। दरअसल, तबाबी को उनके माता-पिता जुडो की ट्रेनिंग लेने की इजाजत नहीं देते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि यह लड़को का खेल है।
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तबाबी देवी
फिर क्या था, तबाबी को तो जुडो से प्यार था। उन्होंने बिना किसी को बताए अपनी ट्रेनिंग जारी रखी और अब देश का नाम विश्वस्तर पर रोशन किया। तबाबी देवी ने कहा, 'मैं माता-पिता को बिना बताए ट्रेनिंग करती थी। जब उन्हें पहली बार पता चला तो उन्होंने कहा कि मुझे इजाजत नहीं दी। वो पूछते थे, 'तुम जुडो क्यों करती हो, चोट लग सकती है? पढ़ाई करो या कुछ और करो। कई बार उन्होंने मुझे रोकने की कोशिश भी की, लेकिन मैं भाग जाती थी। वो गुस्सा होते थे, लेकिन मुझे जुडो से प्यार है।'
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तबाबी देवी
तबाबी ने कहा कि लड़ाई करना उनके अंदर नैसर्गिक रूप से है और वह हमेशा गलियों में होने वाली लड़ाइयों में शामिल रहती थीं। 16 वर्षीया ने कहा, 'मैं टॉमबॉय थी। लड़कों से हमेशा झगड़ती थी, लेकिन कई बार मैं निराश होती थी क्योंकि कमजोर थी। लड़के मुझे परेशान करते थे और लड़कियां भी मुझे हमेशा मारती थीं।'
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तबाबी देवी
उन्होंने आगे कहा, 'जुडो ने मेरी पूरी जिंदगी बदल दी। मैं मजबूत होने लगी और अचानक ही हर कोई मेरी इज्जत करने लगा। मुझे चुनौती देने की किसी की हिम्मत नहीं होती थी। बड़े लड़के भी मुझसे घबराते थे।' एक बार जब तबाबी जुडो में सफल हुईं तो उन्हें परिवार का साथ भी मिलने लगा और वह सफलता की सीढ़ी चढ़ती गईं।
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