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मेटा और माइक्रोसॉफ्ट में छंटनी का बड़ा दौर: क्या सच में AI छीन रहा नौकरियां या यह कंपनियों का कोई नया खेल है?
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Sun, 26 Apr 2026 01:57 PM IST
सार
Tech Industry Layoffs: मेटा और माइक्रोसॉफ्ट जैसी दिग्गज टेक कंपनियों ने हजारों कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। इसके पीछे एआई (AI) को बड़ी वजह बताया जा रहा है। लेकिन क्या वाकई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लोगों की नौकरियां खा रहा है या इसके पीछे कंपनियों की कोई और चाल है? आइए समझते हैं।
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मेटा-माइक्रोसॉफ्ट कर रही है बड़ी छंटनी
- फोटो : एआई जनरेटेड
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दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों में एक बार फिर छंटनी (Tech Layoffs) की आंधी चल पड़ी है। मेटा (Meta) और माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) जैसी दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनियों ने अपने ग्लोबल वर्कफोर्स में भारी कटौती का एलान किया है। दिलचस्प बात यह है कि ये दोनों ही कंपनियां इन दिनों आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence - AI) में पानी की तरह पैसा बहा रही हैं। इन दोनों के बीच का कनेक्शन साफ नजर आता है। मेटा की चीफ पीपल ऑफिसर जेनेल गेल ने कहा है कि लगभग 8,000 कर्मचारियों (कुल स्टाफ का 10 प्रतिशत) की यह छंटनी कंपनी द्वारा किए जा रहे 'अन्य निवेशों' की भरपाई के लिए है। मेटा के बॉस मार्क जुकरबर्ग पहले ही इस साल एआई को रफ्तार देने के लिए 115 अरब डॉलर से ज्यादा के निवेश की बात कह चुके हैं।
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क्या खत्म होने वाली हैं व्हाइट-कॉलर नौकरियां?
- फोटो : Adobe Stock
क्या खत्म होने वाली हैं व्हाइट-कॉलर नौकरियां?
पहले नजरिए के मुताबिक, एआई एक ऐसी 'सुपरइंटेलिजेंस' है जो खुद सीखती है, सोचती है और जल्द ही इंसानों को हर काम में पीछे छोड़ देगी। इस नजरिए से देखने वालों को लगता है कि ये छंटनियां कोई आम कॉर्पोरेट फैसला नहीं, बल्कि एक बड़े भूचाल की शुरुआत हैं। फरवरी 2026 में एआई उद्यमी मैट शुमर ने इस स्थिति की तुलना उस शांत माहौल से की थी जो कोविड-19 महामारी के दुनिया भर में फैलने से ठीक पहले था। उनका मानना था कि लोग अभी यह समझ नहीं पा रहे हैं कि हम 'इंटेलिजेंस के एक बड़े धमाके' का सामना कर रहे हैं। हालांकि, उनकी इस बात की काफी आलोचना भी हुई, लेकिन इसने लोगों के मन में बैठे डर को जरूर सामने ला दिया। यह सच है कि सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में कुछ बदलाव हो रहे हैं, लेकिन यह मान लेना कि ऑफिस में बैठकर काम करने वाले हर व्हाइट-कॉलर वर्कर की जगह एआई ले लेगा, अभी बहुत दूर की कौड़ी है। ऑफिस का काम सिर्फ कोडिंग जितना सीधा नहीं होता, इसमें कई उलझनें, बदलती जरूरतें और ऐसे काम होते हैं जिन्हें सिर्फ इंसान ही सुलझा सकते हैं।
पहले नजरिए के मुताबिक, एआई एक ऐसी 'सुपरइंटेलिजेंस' है जो खुद सीखती है, सोचती है और जल्द ही इंसानों को हर काम में पीछे छोड़ देगी। इस नजरिए से देखने वालों को लगता है कि ये छंटनियां कोई आम कॉर्पोरेट फैसला नहीं, बल्कि एक बड़े भूचाल की शुरुआत हैं। फरवरी 2026 में एआई उद्यमी मैट शुमर ने इस स्थिति की तुलना उस शांत माहौल से की थी जो कोविड-19 महामारी के दुनिया भर में फैलने से ठीक पहले था। उनका मानना था कि लोग अभी यह समझ नहीं पा रहे हैं कि हम 'इंटेलिजेंस के एक बड़े धमाके' का सामना कर रहे हैं। हालांकि, उनकी इस बात की काफी आलोचना भी हुई, लेकिन इसने लोगों के मन में बैठे डर को जरूर सामने ला दिया। यह सच है कि सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में कुछ बदलाव हो रहे हैं, लेकिन यह मान लेना कि ऑफिस में बैठकर काम करने वाले हर व्हाइट-कॉलर वर्कर की जगह एआई ले लेगा, अभी बहुत दूर की कौड़ी है। ऑफिस का काम सिर्फ कोडिंग जितना सीधा नहीं होता, इसमें कई उलझनें, बदलती जरूरतें और ऐसे काम होते हैं जिन्हें सिर्फ इंसान ही सुलझा सकते हैं।
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क्या टेक कंपनियां एआई के बहाने अपनी गलतियां छिपा रही हैं?
- फोटो : Meta
क्या टेक कंपनियां एआई के बहाने अपनी गलतियां छिपा रही हैं?
दूसरा नजरिया यह कहता है कि एआई का सिर्फ 'हव्वा' बनाया जा रहा है और कंपनियां इसे एक ढाल की तरह इस्तेमाल कर रही हैं। महामारी के दौरान जब डिजिटल बूम आया था, तब इन टेक कंपनियों ने बिना सोचे-समझे अंधाधुंध भर्तियां की थीं। अब जब बाजार का दबाव बढ़ा है और वित्तीय स्थिति संभालनी है, तो कंपनियों को कर्मचारियों को निकालने के लिए एआई एक बहुत ही शानदार और फैंसी बहाना मिल गया है। जब कोई कंपनी यह कहती है कि वह एआई के कारण छंटनी कर रही है, तो निवेशक खुश होते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि कंपनी भविष्य की सोच रही है। इतिहास गवाह है कि जब भी कंपनियों को वित्तीय पुनर्गठन करना होता है, तो वे अक्सर नई तकनीक को एक सुविधाजनक बहाने के रूप में पेश करती हैं।
दूसरा नजरिया यह कहता है कि एआई का सिर्फ 'हव्वा' बनाया जा रहा है और कंपनियां इसे एक ढाल की तरह इस्तेमाल कर रही हैं। महामारी के दौरान जब डिजिटल बूम आया था, तब इन टेक कंपनियों ने बिना सोचे-समझे अंधाधुंध भर्तियां की थीं। अब जब बाजार का दबाव बढ़ा है और वित्तीय स्थिति संभालनी है, तो कंपनियों को कर्मचारियों को निकालने के लिए एआई एक बहुत ही शानदार और फैंसी बहाना मिल गया है। जब कोई कंपनी यह कहती है कि वह एआई के कारण छंटनी कर रही है, तो निवेशक खुश होते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि कंपनी भविष्य की सोच रही है। इतिहास गवाह है कि जब भी कंपनियों को वित्तीय पुनर्गठन करना होता है, तो वे अक्सर नई तकनीक को एक सुविधाजनक बहाने के रूप में पेश करती हैं।
कम कर्मचारियों से ज्यादा काम
- फोटो : freepik
कम कर्मचारियों से एआई के जरिए ज्यादा काम निकालने की रणनीति
तीसरा और सबसे तार्किक नजरिया यह है कि एआई एक बेहद काम का 'टूल' (उपकरण) है। टेक कंपनियों के लीडर्स जानते हैं कि एआई सॉफ्टवेयर बनाने का तरीका बदल देगा, लेकिन वे यह नहीं जानते कि यह सब कैसे होगा। ऐसे में कंपनियां वही कर रही हैं जो वे अक्सर करती हैं- वे दबाव बना रही हैं। वे कर्मचारियों की संख्या कम कर देती हैं और बचे हुए लोगों से उम्मीद करती हैं कि वे एआई टूल्स का इस्तेमाल करके उतना ही काम करें, जितना पहले पूरी टीम मिलकर करती थी। गूगल के चीफ एग्जीक्यूटिव सुंदर पिचाई का भी दावा है कि कंपनी में एआई अपनाने से इंजीनियरिंग की स्पीड में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह आंकड़ा कई कंपनियों द्वारा की जा रही 7 से 10 प्रतिशत की छंटनी से काफी मेल खाता है।
तीसरा और सबसे तार्किक नजरिया यह है कि एआई एक बेहद काम का 'टूल' (उपकरण) है। टेक कंपनियों के लीडर्स जानते हैं कि एआई सॉफ्टवेयर बनाने का तरीका बदल देगा, लेकिन वे यह नहीं जानते कि यह सब कैसे होगा। ऐसे में कंपनियां वही कर रही हैं जो वे अक्सर करती हैं- वे दबाव बना रही हैं। वे कर्मचारियों की संख्या कम कर देती हैं और बचे हुए लोगों से उम्मीद करती हैं कि वे एआई टूल्स का इस्तेमाल करके उतना ही काम करें, जितना पहले पूरी टीम मिलकर करती थी। गूगल के चीफ एग्जीक्यूटिव सुंदर पिचाई का भी दावा है कि कंपनी में एआई अपनाने से इंजीनियरिंग की स्पीड में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह आंकड़ा कई कंपनियों द्वारा की जा रही 7 से 10 प्रतिशत की छंटनी से काफी मेल खाता है।
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कर्मचारियों के लिए इसका असल मतलब क्या है?
- फोटो : freepik
कर्मचारियों के लिए इसका असल मतलब क्या है?
सच तो यह है कि आज के समय में इन तीनों नजरियों का मिला-जुला रूप देखने को मिल रहा है। यह बात बिल्कुल सच है कि एआई को अपनाने वालों की प्रोडक्टिविटी बढ़ी है। आज के माहौल में, एआई को समझना और यह जानना कि इसका सही इस्तेमाल कहां और कैसे करना है, एक बेसिक प्रोफेशनल स्किल बन गया है। आज उन कर्मचारियों की नौकरी को सबसे ज्यादा खतरा नहीं है जिनके काम एआई कर सकता है, बल्कि खतरा उन लोगों को है जो समय रहते खुद को अपडेट नहीं कर रहे हैं और नई तकनीक सीखने से बच रहे हैं।
सच तो यह है कि आज के समय में इन तीनों नजरियों का मिला-जुला रूप देखने को मिल रहा है। यह बात बिल्कुल सच है कि एआई को अपनाने वालों की प्रोडक्टिविटी बढ़ी है। आज के माहौल में, एआई को समझना और यह जानना कि इसका सही इस्तेमाल कहां और कैसे करना है, एक बेसिक प्रोफेशनल स्किल बन गया है। आज उन कर्मचारियों की नौकरी को सबसे ज्यादा खतरा नहीं है जिनके काम एआई कर सकता है, बल्कि खतरा उन लोगों को है जो समय रहते खुद को अपडेट नहीं कर रहे हैं और नई तकनीक सीखने से बच रहे हैं।

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