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Apple @50: जब डूबती कंपनी को Microsoft ने दिया सहारा, 1997 की वह डील जिसने बदल दी एपल की किस्मत
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Wed, 01 Apr 2026 05:30 PM IST
सार
Apple 50th Anniversary: आज दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शामिल एपल एक समय दिवालिया होने के कगार पर थी। 1997 में माइक्रोसॉफ्ट के साथ हुई एक अनोखी डील ने कंपनी को नई जिंदगी दी और यहीं से एपल की वापसी की कहानी शुरू हुई। आइए जानते हैं एपल के साथ कैसा रहा 50 साल का ये सफर।
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एपल ने पूरे किए 50 साल
- फोटो : एआई जनरेटेड
आज एपल अपनी 50वीं सालगिरह मना रहा है, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब यह कंपनी अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रही थी। साल 1997 में हालात इतने खराब थे कि कंपनी को तुरंत स्थिरता की जरूरत थी। तभी वापसी कर चुके स्टीव जॉब्स ने अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी माइक्रोसॉफ्ट से हाथ मिलाने ने एक चौंकाने वाला फैसला लिया।
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मैकवर्ल्ड में कंपनियों ने मिलाया हाथ
- फोटो : AI
मैकवर्ल्ड की डील ने बदली एपल की राह
6 अगस्त 1997 को मैकवर्ल्ड बोस्टन इवेंट में स्टीव जॉब्स ने माइक्रोसॉफ्ट के साथ 5 साल की डील का एलान किया। यह खबर सुनकर लोग हैरान रह गए। उसी दौरान माइक्रोसॉफ्ट के फाउंडर बिल गेट्स वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्क्रीन पर नजर आए और साझेदारी की पुष्टि की।
6 अगस्त 1997 को मैकवर्ल्ड बोस्टन इवेंट में स्टीव जॉब्स ने माइक्रोसॉफ्ट के साथ 5 साल की डील का एलान किया। यह खबर सुनकर लोग हैरान रह गए। उसी दौरान माइक्रोसॉफ्ट के फाउंडर बिल गेट्स वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्क्रीन पर नजर आए और साझेदारी की पुष्टि की।
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एपल के लिए माइक्रोसॉफ्ट बना सहारा
- फोटो : Microsoft
क्या था इस डील में खास?
- इस समझौते के तहत माइक्रोसॉफ्ट ने एपल में 150 मिलियन डॉलर का निवेश किया। यह निवेश बिना वोटिंग अधिकार वाले शेयर के रूप में था, जिससे एपल पर कंट्रोल बना रहा।
- माइक्रोसॉफ्ट ने Mac के लिए अपने Office सॉफ्टवेयर को कम से कम 5 साल तक जारी रखने का वादा भी किया। उस समय Office बिजनेस यूजर्स के लिए बेहद जरूरी था।
- वहीं एपल ने अपने डिवाइसेज में Internet Explorer को डिफॉल्ट ब्राउजर बनाने पर सहमति दी। साथ ही दोनों कंपनियों ने पेटेंट विवाद खत्म कर टेक्नोलॉजी शेयर करने का फैसला किया।
एपल के लिए ‘लाइफलाइन’ साबित हुई डील
- फोटो : YouTube
क्यों अहम थी यह डील?
यह डील एपल के लिए ‘लाइफलाइन’ साबित हुई। इससे कंपनी को आर्थिक सहारा मिला और बाजार में भरोसा भी बढ़ा। Office की उपलब्धता ने एपल को प्रोफेशनल यूजर्स के बीच लोकप्रिय बनाए रखा। माइक्रोसॉफ्ट को भी इसका फायदा हुआ, क्योंकि इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बनी रही और उसके सॉफ्टवेयर Mac यूजर्स तक पहुंचते रहे।
यह डील एपल के लिए ‘लाइफलाइन’ साबित हुई। इससे कंपनी को आर्थिक सहारा मिला और बाजार में भरोसा भी बढ़ा। Office की उपलब्धता ने एपल को प्रोफेशनल यूजर्स के बीच लोकप्रिय बनाए रखा। माइक्रोसॉफ्ट को भी इसका फायदा हुआ, क्योंकि इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बनी रही और उसके सॉफ्टवेयर Mac यूजर्स तक पहुंचते रहे।
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फिर से खड़ा हुआ एपल
- फोटो : एक्स
एपल की वापसी की शुरुआत
यह डील सिर्फ मदद नहीं थी, बल्कि एक रणनीतिक कदम था। स्टीव जॉब्स का लक्ष्य माइक्रोसॉफ्ट को हराना नहीं, बल्कि एपल को फिर से खड़ा करना था। इसके बाद एपल ने iMac, iPod और iPhone जैसे प्रोडक्ट लॉन्च किए, जिन्होंने कंपनी की दिशा ही बदल दी।
1997 की यह साझेदारी टेक इतिहास की सबसे अनोखी घटनाओं में से एक मानी जाती है, जिसने दिखाया कि सही समय पर लिया गया फैसला किसी भी कंपनी की किस्मत बदल सकता है।
यह डील सिर्फ मदद नहीं थी, बल्कि एक रणनीतिक कदम था। स्टीव जॉब्स का लक्ष्य माइक्रोसॉफ्ट को हराना नहीं, बल्कि एपल को फिर से खड़ा करना था। इसके बाद एपल ने iMac, iPod और iPhone जैसे प्रोडक्ट लॉन्च किए, जिन्होंने कंपनी की दिशा ही बदल दी।
1997 की यह साझेदारी टेक इतिहास की सबसे अनोखी घटनाओं में से एक मानी जाती है, जिसने दिखाया कि सही समय पर लिया गया फैसला किसी भी कंपनी की किस्मत बदल सकता है।