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ऑनलाइन गाने सुनने से पर्यावरण को हो रहा बड़ा नुकसान, आंकड़े हैं गवाह

Sat, 01 Feb 2020 03:16 PM IST
प्रदीप पांडे बीबीसी हिन्दी, अमर उजाला
बीबीसी हिन्दी, अमर उजाला Published by: प्रदीप पांडे Updated Sat, 01 Feb 2020 03:16 PM IST
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Listening to songs online has caused great harm to environment, figures are witness
Online music - फोटो : amar ujala

आज कल लोग सीधे इंटरनेट से संगीत सुनना पसंद करते हैं। यू-ट्यूब और ऐसे ही दूसरे माध्यमों से संगीत की स्ट्रीमिंग होती है। लेकिन, पहले ऐसा नहीं था। कैसेट, सीडी और रिकॉर्ड से संगीत का लुत्फ उठाया जाता था। पिछले कुछ सालों से इन पुराने माध्यमों ने फिर से बाजार में वापसी की है। विनाइल रिकॉर्ड की बिक्री में तो 2007 के बाद से 1427 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। पिछले साल अकेले ब्रिटेन में ही 40 लाख एलपी रिकॉर्ड बिके।

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vinyl - फोटो : amazon

विनाइल रिकॉर्ड में आ रही बिक्री का मतलब ये है कि ये डिस्क बनाने का काम तेज होगा। दिक्कत ये है कि इन्हें रिसाइकिल नहीं किया जा सकता। मतलब ये कि इनकी बिक्री बढ़ने से पर्यावरण को नुकसान ज्यादा होगा। वैसे, एल्बम का कवर तो रिसाइकिल किए जा सकने वाले प्लास्टिक से बनता है। पहले रिकॉर्ड भी शेलाक नाम के तत्व से बनते थे। इसे एक कीड़े से हासिल किया जाता था। लेकिन, ये जल्दी खराब हो जाते थे। इसीलिए पीवीसी के इस्तेमाल से रिकॉर्ड बनाए जाने लगे। 

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पीवीसी को नष्ट करने में सदियां गुजर सकती हैं। यानी इनका कचरा नष्ट होने तक इंसानों की कई पीढ़ियां बीत जाएंगी। ये मिट्टी में मिलने पर जमीन को भी नुक़सान पहुंचाते हैं। आज जो रिकॉर्ड बनते हैं कि उनसे आधा किलो कार्बन डाई ऑक्साइड पर्यावरण मे मिलती है। ऐसे में केवल ब्रिटेन में 40 लाख एलपी रिकॉर्ड बिकने का मतलब है क़रीब 2 हज़ार टन कार्बन डाई ऑक्साइड पर्यावरण में घुली। इसके अलावा इन रिकॉर्ड को लाने-लेजाने के दौरान जो प्रदूषण हुआ सो अलग।

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pvc vinyl cd - फोटो : alibaba

80 के दशक में एलपी रिकॉर्ड की जगह सीडी बाजार में आई। ये ज़्यादा दिनों तक चलती थी और इसकी आवाज़ भी बेहतर थी। सीडी को पॉलीकार्बोनेट और एल्यूमिनियम से बनाया जाता है। इससे पर्यावरण को कम नुक़सान होता है। लेकिन, इन्हें रिसाइकिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए प्लास्टिक और एल्यूमिनियम को अलग करना होगा, जो बहुत ही पेचीदा प्रक्रिया है।

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internet - फोटो : amar ujala
अच्छी क्वालिटी की सीडी 50 से 100 साल तक चल सकती है। लेकिन सस्ती सीडी के बारे में ये दावा नहीं किया जा सकता। ये जल्दी ख़राब हो जाती हैं। डिजिटल दुनिया में संगीत सुनना बहुत आसान हो गया है। आप किसी भी वेबसाइट पर जाकर सीधे पसंदीदा गीत सुन सकते हैं। इसे कॉपी करना भी आसान हो गया है। अब संगीत के ये माध्यम ऐसे हैं, जिनमें कोई तत्व इस्तेमाल नहीं होता। पर, इसका ये मतलब नहीं कि इस तरीके से संगीत सुनने का पर्यावरण पर असर नहीं पड़ता। जो इलेक्ट्रॉनिक फाइल आप डाउनलोड करते हैं, या सीधे स्ट्रीम करते हैं, उन्हें किसी न किसी सर्वर में सुरक्षित रखा जाता है।
 

 

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