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'अमेरिका को संभालनी होगी AI की कमान': गूगल सीईओ सुंदर पिचाई बोले- जिम्मेदारी के साथ विकसित करनी होगी तकनीक
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Tue, 14 Apr 2026 04:22 PM IST
सार
Google CEO Sundar Pichai: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर सुंदर पिचाई ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि AI इस दौर की सबसे अहम तकनीक है और अमेरिका को इसे जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ाना चाहिए, ताकि इसका फायदा हर व्यक्ति तक पहुंच सके।
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सुंदर पिचाई
- फोटो : ANI
हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान सुंदर पिचाई ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर अपनी दूरदर्शी सोच साझा की। उन्होंने AI को अब तक की "सबसे गहन और प्रभावशाली" तकनीक बताया। पिचाई का मानना है कि यह तकनीक इतिहास की उन महान खोजों की तरह है, जिन्होंने पूरी दुनिया के काम करने और जीने के तरीके को हमेशा के लिए बदल दिया। उन्होंने अमेरिकी कंपनियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि जिस तरह अमेरिका ने पिछली तकनीकी क्रांतियों का नेतृत्व किया है, वैसे ही उसे AI के क्षेत्र में भी दुनिया का मार्गदर्शन करना चाहिए। पिचाई के अनुसार, हमें इस तकनीक को "साहस और जिम्मेदारी" के साथ विकसित करना होगा ताकि यह केवल मुनाफे का जरिया न रहकर जनहित का माध्यम बने।
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कई सेक्टर्स को तेजी से बदल रहा है AI
- फोटो : Adobe stock
कई सेक्टर्स को तेजी से बदल रहा है AI
पिचाई ने यह भी बताया कि AI सिर्फ एक कॉन्सेप्ट नहीं रह गया है, बल्कि यह तेजी से अलग-अलग क्षेत्रों में बदलाव ला रहा है। पिचई ने इस बात पर खास जोर दिया कि AI केवल भविष्य की कल्पना नहीं है, बल्कि यह आज की हकीकत बन चुका है। चिकित्सा अनुसंधान में यह तकनीक जानलेवा बीमारियों के सटीक इलाज खोजने की प्रक्रिया को तेज कर रही है। वहीं शिक्षा के क्षेत्र में, यह शिक्षकों को हर छात्र की जरूरत के हिसाब से पढ़ाई के तरीकों को व्यक्तिगत बनाने में मदद कर रही है। इतना ही नहीं, जंगलों की आग जैसी आपदाओं की ट्रैकिंग और आपदा प्रबंधन में भी एआई की भूमिका बढ़ती जा रही है। पिचाई ने भावुक होते हुए सैन फ्रांसिस्को में अपने पिता की पहली बिना ड्राइवर वाली कार की सवारी का ज़िक्र किया और उसे एक "जादुई" अनुभव करार दिया।
पिचाई ने यह भी बताया कि AI सिर्फ एक कॉन्सेप्ट नहीं रह गया है, बल्कि यह तेजी से अलग-अलग क्षेत्रों में बदलाव ला रहा है। पिचई ने इस बात पर खास जोर दिया कि AI केवल भविष्य की कल्पना नहीं है, बल्कि यह आज की हकीकत बन चुका है। चिकित्सा अनुसंधान में यह तकनीक जानलेवा बीमारियों के सटीक इलाज खोजने की प्रक्रिया को तेज कर रही है। वहीं शिक्षा के क्षेत्र में, यह शिक्षकों को हर छात्र की जरूरत के हिसाब से पढ़ाई के तरीकों को व्यक्तिगत बनाने में मदद कर रही है। इतना ही नहीं, जंगलों की आग जैसी आपदाओं की ट्रैकिंग और आपदा प्रबंधन में भी एआई की भूमिका बढ़ती जा रही है। पिचाई ने भावुक होते हुए सैन फ्रांसिस्को में अपने पिता की पहली बिना ड्राइवर वाली कार की सवारी का ज़िक्र किया और उसे एक "जादुई" अनुभव करार दिया।
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गूगल डेटा सेंटर
- फोटो : एआई जनरेटेड
चुनौतियां भी कम नहीं हैं
हालांकि पिचाई इस तकनीक को लेकर काफी उत्साहित हैं, लेकिन उन्होंने इसके साथ आने वाली चुनौतियों से आंखें नहीं मूंदी हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि AI के आने से वर्कफोर्स और नौकरियों के स्वरूप में बड़ा बदलाव आएगा। इसके लिए उन्होंने लोगों को नए कौशल सिखाने और सही निवेश को जरूरी बताया। पिचाई का मानना है कि नियम और कायदे इस तकनीक को सुरक्षित बनाने के लिए अनिवार्य हैं। उन्होंने कहा, "मैं आशावादी हूं, इसलिए नहीं कि मुझे तकनीक पर भरोसा है, बल्कि इसलिए क्योंकि मुझे लोगों और मानवीय बुद्धिमत्ता पर पूरा यकीन है।"
हालांकि पिचाई इस तकनीक को लेकर काफी उत्साहित हैं, लेकिन उन्होंने इसके साथ आने वाली चुनौतियों से आंखें नहीं मूंदी हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि AI के आने से वर्कफोर्स और नौकरियों के स्वरूप में बड़ा बदलाव आएगा। इसके लिए उन्होंने लोगों को नए कौशल सिखाने और सही निवेश को जरूरी बताया। पिचाई का मानना है कि नियम और कायदे इस तकनीक को सुरक्षित बनाने के लिए अनिवार्य हैं। उन्होंने कहा, "मैं आशावादी हूं, इसलिए नहीं कि मुझे तकनीक पर भरोसा है, बल्कि इसलिए क्योंकि मुझे लोगों और मानवीय बुद्धिमत्ता पर पूरा यकीन है।"
डेटा सेंटर
- फोटो : AI जनरेटेड
डेटा सेंटर से इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ रहा दबाव
AI के इस बढ़ते ग्राफ ने तकनीकी दिग्गजों के सामने एक नई मुसीबत खड़ी कर दी है। अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और अल्फाबेट जैसी कंपनियां नए डेटा सेंटर बनाने के लिए जमीन, बिजली और पानी की भारी खपत को लेकर विरोध का सामना कर रही हैं। संसाधनों की कमी के कारण कई बड़े प्रोजेक्ट्स को या तो टालना पड़ा है या रद्द कर दिया गया है।
इसी बीच, चीन इस समस्या का एक अनोखा समाधान ढूंढ रहा है। चीन शंघाई के तट पर समुद्र के भीतर अंडरवाटर डेटा सेंटर का परीक्षण कर रहा है, जो समुद्र के ठंडे पानी का इस्तेमाल डेटा सेंटर की गर्मी को कम करने के लिए करेगा।
AI के इस बढ़ते ग्राफ ने तकनीकी दिग्गजों के सामने एक नई मुसीबत खड़ी कर दी है। अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और अल्फाबेट जैसी कंपनियां नए डेटा सेंटर बनाने के लिए जमीन, बिजली और पानी की भारी खपत को लेकर विरोध का सामना कर रही हैं। संसाधनों की कमी के कारण कई बड़े प्रोजेक्ट्स को या तो टालना पड़ा है या रद्द कर दिया गया है।
इसी बीच, चीन इस समस्या का एक अनोखा समाधान ढूंढ रहा है। चीन शंघाई के तट पर समुद्र के भीतर अंडरवाटर डेटा सेंटर का परीक्षण कर रहा है, जो समुद्र के ठंडे पानी का इस्तेमाल डेटा सेंटर की गर्मी को कम करने के लिए करेगा।
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गूगल एआई ओवरव्यू
- फोटो : एआई जनरेटेड
भारत में एआई को लेकर गूगल की है बड़ी योजना
गूगल भारत के डिजिटल भविष्य में बहुत बड़ा निवेश कर रहा है, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में। टेक दिग्गज भारत में आने वाले कुछ वर्षों में भारी निवेश करने वाला है। गूगल अगले 5 वर्षों में भारत में 15 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 1.35 लाख करोड़ रुपये) का निवेश करने की योजना बनाई है। इस निवेश का मुख्य उद्देश्य भारत में एक विशाल AI हब और डेटा सेंटर स्थापित करना है। यह निवेश मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में एक अत्याधुनिक AI डेटा सेंटर बनाने के लिए किया जा रहा है। यह डेटा सेंटर, अमेरिका के बाहर Google का सबसे बड़ा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केंद्र होगा। इस निवेश से भारत में करीब 1.83 लाख नई नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।
गूगल इस प्रोजेक्ट के लिए अडानी कॉनेक्स (AdaniConneX) और एयरटेल (Airtel) के साथ साझेदारी कर सकता है। 2020 में, गूगल ने 'गूगल फॉर इंडिया डिजिटाइजेशन फंड' के तहत ₹75,000 करोड़ ($10 बिलियन) के निवेश की घोषणा की थी, जो भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर केंद्रित है।
गूगल भारत के डिजिटल भविष्य में बहुत बड़ा निवेश कर रहा है, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में। टेक दिग्गज भारत में आने वाले कुछ वर्षों में भारी निवेश करने वाला है। गूगल अगले 5 वर्षों में भारत में 15 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 1.35 लाख करोड़ रुपये) का निवेश करने की योजना बनाई है। इस निवेश का मुख्य उद्देश्य भारत में एक विशाल AI हब और डेटा सेंटर स्थापित करना है। यह निवेश मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में एक अत्याधुनिक AI डेटा सेंटर बनाने के लिए किया जा रहा है। यह डेटा सेंटर, अमेरिका के बाहर Google का सबसे बड़ा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केंद्र होगा। इस निवेश से भारत में करीब 1.83 लाख नई नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।
गूगल इस प्रोजेक्ट के लिए अडानी कॉनेक्स (AdaniConneX) और एयरटेल (Airtel) के साथ साझेदारी कर सकता है। 2020 में, गूगल ने 'गूगल फॉर इंडिया डिजिटाइजेशन फंड' के तहत ₹75,000 करोड़ ($10 बिलियन) के निवेश की घोषणा की थी, जो भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर केंद्रित है।
