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Vibe Hacking: पैसे नहीं, आपकी भावनाओं को टारगेट करता है ये साइबर अटैक! दिमाग पर कर लेता है पूरा कंट्रोल
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Fri, 31 Oct 2025 04:19 PM IST
सार
Vibe Hacking: साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स ने हाल ही में चेतावनी दी है कि इंटरनेट पर 'वाइब हैकिंग' का नया खतरा तेजी से बढ़ रहा है। यह ऐसा साइबर अटैक है जिसमें यूजर के मूड, पसंद और भावनाओं को टारगेट कर उनके फैसलों को प्रभावित किया जाता है।
डिजिटल दुनिया में साइबर अपराध लगातार नए रूप ले रहे हैं। अब विशेषज्ञों ने एक नए ट्रेंड ‘Vibe Hacking’ को लेकर चेतावनी दी है। यह ऐसा साइबर क्राइम है जिसमें AI एल्गोरिदम और सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल कर यूजर की भावनाओं, मूड और मानसिक स्थिति को “हैक” किया जाता है।
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पैसे नहीं, दिमाग पर कंट्रोल
- फोटो : AI
क्या है वाइब हैकिंग
‘वाइब हैकिंग’ एक ऐसी साइबर तकनीक है जिसमें अपराधी या संगठित समूह AI एल्गोरिदम और सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल कर यूजर की ऑनलाइन गतिविधियों को ट्रैक करते हैं, जैसे कि वह क्या देखता है, किन पोस्ट्स को लाइक करता है, कौन-से वीडियो पर रुकता है, या किस विषय पर कमेंट करता है। इन डाटा पॉइंट्स से AI यह समझ लेता है कि व्यक्ति का मूड और माइंडसेट कैसा है, और फिर उसके अनुरूप कंटेंट दिखाकर उसकी भावनाओं को मैनिपुलेट करता है।
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कैसे होता है यह हमला
- फोटो : AI
कैसे होता है यह हमला
यह तकनीक AI-पावर्ड रिकमेंडेशन सिस्टम्स के जरिए काम करती है, जो यूजर की ऑनलाइन गतिविधियों, जैसे लाइक, सर्च हिस्ट्री, वॉच टाइम और कमेंट पैटर्न का विश्लेषण कर यह तय करती है कि उसे कौन-सा कंटेंट दिखाना है। इस तरीके से अपराधी या संगठन किसी खास सोच, ट्रेंड या उत्पाद के लिए लोगों का ‘वाइब’ तैयार कर देते हैं, या व्यक्ति को एक खास मूड या सोच में बांध देते हैं।
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भविष्य में क्या हो सकता है
- फोटो : एएनआई
भविष्य में क्या हो सकता है
एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले कुछ वर्षों में वाइब हैकिंग, पारंपरिक फिशिंग या डेटा चोरी से भी ज्यादा खतरनाक रूप ले सकता है। जैसे-जैसे AI मॉडल यूजर के इमोशंस को पढ़ने में सक्षम होंगे, वैसे-वैसे यह तय करना मुश्किल हो जाएगा कि आपकी राय सच में आपकी है या किसी एल्गोरिदम ने बनाई है।
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हैकिंग
- फोटो : अमर उजाला
इससे बचाव कैसे करें
इससे बचने के लिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यूजर्स को सोशल मीडिया एल्गोरिदम पर अंधा भरोसा नहीं करना चाहिए और किसी भी जानकारी को साझा करने या मानने से पहले वेरिफिकेशन जरूर करें। इसके अलावा यूजर को अपने ऑनलाइन व्यवहार और कंटेंट पैटर्न पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि, वाइब हैकिंग का कुछ सकारात्मक पक्ष भी है। अगर समझदारी से किया जाए, तो वाइब हैकिंग से ब्रांड्स सही ऑडियंस तक पहुंच सकते हैं, कंटेंट क्रिएटर्स अपने दर्शकों से गहरा कनेक्शन बना सकते हैं, और यूजर्स को वो कंटेंट मिल सकता है जो उनके मूड से मेल खाता है।
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