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Plug Types: 2-पिन और 3-पिन प्लग, सिर्फ डिजाइन का अंतर या सुरक्षा कारण भी? जानें क्यों बनाए गए हैं ये अलग-अलग

Tue, 07 Jul 2026 04:40 PM IST
जागृति टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति Updated Tue, 07 Jul 2026 04:40 PM IST
सार

Pin Explained: क्या आपने कभी सोचा है कि किसी चार्जर में दो और किसी में तीन पिन क्यों होते हैं? क्या यह डिजाइन का फर्क है या इसके पीछे कोई कारण भी छिपा है। आइए जानते हैं कि आखिर क्यों सभी डिवाइस में एक जैसे प्लग नहीं दिए जाते हैं...
 

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2-Pin vs 3-Pin Plug: Just Design Difference or Safety Feature?
दो और तीन पिन वाले चार्जर - फोटो : एआई जनरेटेड
Two Pin And Three Pin Plug Charger: रोजाना हम कई तरह के इलेक्ट्रॉनिक अप्लायंस का इस्तेमाल करते हैं। आपने गौर किया होगा कि जब हम मोबाइल चार्ज करते हैं, तो उसके लिए हमेशा दो पिन बनी होती है, वहीं अगर हम आयरन, फ्रिज, गीजर का यूजर करते हैं, तो इसके लिए तीन पिन दिए होते हैं। अधिकतर लोगों को यह एक डिजाइन लगती होगी, लेकिन उन्हें नहीं पता कि इसके पीछे एक बड़ा सुरक्षा कारण छिपा है। दरअसल, हमारे देश में मिलने वाले किसी भी प्लग या चार्जर में पिन की संख्या इस बात पर तय होती है कि वह उपकरण कितनी बिजली खाता है और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के सुरक्षा नियम उस पर कैसे लागू होते हैं। इसे समझने के लिए पूरा लेख पढ़ेंं...
2-Pin vs 3-Pin Plug: Just Design Difference or Safety Feature?
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एआई जनरेटेड
Plug Types: 2-पिन और 3-पिन प्लग अलग क्यों होते हैं?
  • किसी भी प्लग की संख्या इस बात पर निर्भर करती है कि वह डिवाइस कितनी बिजली की खपत करता है। क्या उसे अतिरिक्त सुरक्षा की जरूरत है या नहीं।
  • जो डिवाइस कम बिजली खपत करते हैं, उनके लिए दो पिन पर्याप्त होते हैं, जैसे की हमारे फाेन का चार्जर, दिपावली पर यूजर करने वाली झालर, इलेक्ट्रिक लैंप।
  • जबकि ज्यादा पावर वाले उपकरणों के लिए 3-पिन प्लग का इस्तेमाल किया जाता है, जैसे वांशिंग मशीन, लैपटॉप आदि।
2-Pin vs 3-Pin Plug: Just Design Difference or Safety Feature?
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एआई जनरेटेड
2-पिन प्लग किन उपकरणों में होता है?
  • भारत में जितने भी छोटे और कम बिजली से चलने वाले इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स हैं , उनके लिए दो-पिन वाले प्लग का ही इस्तेमाल किए जाते हैं।
  • इन प्लगों में दो गोल आकार की पिन होती हैं, जिनका डायमीटर यानी व्यास ठीक 4.0 मिलीमीटर होता है। वैश्विक स्तर पर इस खास डिजाइन को यूरो प्लग के नाम से भी जाना जाता है।
  • ये अप्लायंस बहुत ही कम वोल्टेज पर सुरक्षित तरीके से काम कर सकते हैं, इसलिए इन्हें ज्यादा सुरक्षा की जरूरत नहीं होती।
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2-Pin vs 3-Pin Plug: Just Design Difference or Safety Feature?
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एआई जनरेटेड
भारत में 2-पिन प्लग का इस्तेमाल कैसे शुरू हुआ?
  • यहां पर दिलचस्प बात यह है कि भारत में शुरुआत में ब्रिटिश इलेक्ट्रिकल सिस्टम अपनाया गया था, जिसमें तीन-पिन प्लग और सॉकेट का उपयोग होता था। 
  • आजादी के बाद जब दूर-दराज के गांवों और कम विकसित इलाकों तक बिजली पहुंचाने का काम तेजी से शुरू हुआ, तब दो-पिन सिस्टम को कई जगह अपनाया गया, क्योंकि इसे बनाना अपेक्षाकृत आसान था।
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2-Pin vs 3-Pin Plug: Just Design Difference or Safety Feature?
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एआई जनरेटेड
3-पिन प्लग किन उपकरणों के लिए होता है?
इस पिन का इस्तेमाल हम भारी बिजली खपत करने वाले अप्लायंस जैसे रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर (AC), वॉशिंग मशीन और अन्य हाई-पावर उपकरण में किया जाता है। इसकी तीसरी और सबसे लंबी पिन को अर्थ (Earth) पिन भी कहा जाता है।
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