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स्मार्टफोन में मौजूद फोटो-वीडियो आपके लिए बन सकते हैं मुसीबत, डिलीट कर दीजिए

Mon, 14 Jan 2019 12:58 PM IST
प्रदीप पांडे बीबीसी हिन्दी, अमर उजाला
बीबीसी हिन्दी, अमर उजाला Published by: प्रदीप पांडे Updated Mon, 14 Jan 2019 12:58 PM IST
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Photo-Video in Your Smartphone Gallery Can Make You in Trouble
photo gallery

जमाखोरी जुर्म है। इसे करने पर लोगों को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। लेकिन, क्या आप को पता है कि डिजिटल हो रही दुनिया में डिजिटल जमाखोरी भी हो रही है। ऐसा करने वालों को इसकी भारी कीमत भी चुकानी पड़ रही है। फिलहाल, डिजिटल जमाखोरीको रोकने के लिए कानून तो नहीं हैं। लेकिन, ऐसा करने वाले अपने लिए मुसीबतों का ढेर लगा रहे हैं। हो सकता है कि आप भी डिजिटल जमाखोरी कर रहे हों। चलिए इसका पता लगाते हैं।

Photo-Video in Your Smartphone Gallery Can Make You in Trouble
mobile - फोटो : file photo

क्या आप के मोबाइल में तस्वीरों का अंबार लगा है? क्या आप के पर्सनल और ऑफिशियल ई-मेल अकाउंट में हजारों मेल जमा हैं? क्या आप के पेन ड्राइव में ढेर सारे गैरजरूरी डॉक्यूमेंट सेव हैं? अगर इन सभी सवालों का जवाब हां है, तो आप भी डिजिटल जमाखोरीकर रहे हैं। आज हमारे मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर की स्टोरेज लगातार बढ़ती जा रही है। इसके अलावा तमाम कंपनियां अपनी क्लाउड स्टोरेज सुविधाएं मुफ्त में या बेहद मामूली दर पर दे रही हैं। नतीजा ये कि हम जरूरी डाटा के साथ-साथ हजारों गैरजरूरी 'बाइट्स' अपने मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर में जमा करते जा रहे हैं। ई-मेल, फोटो, डॉक्यूमेंट और दूसरे तरह की डिजिटल डाटा के पहाड़ हमें चारों तरफ से घेर चुके हैं।

Photo-Video in Your Smartphone Gallery Can Make You in Trouble
mobile - फोटो : file photo

आज दुनिया में ये डिजिटल जमाखोरी इस कदर बढ़ गई है कि अब ये बाकायदा रिसर्च का विषय बन गयी है।हम अपने काम के दौरान या फिर निजी इस्तेमाल के दौरान तमाम ऐसे डाटा को जमा करते जा रहे हैं, जिनकी शायद हमें कभी जरूरत ही न पड़े। पर, इस डिजिटल जमाखोरीके नतीजे खतरनाक हो सकते हैं। ये डिजिटल जमाखोरीहमें तनाव देती है। इससे घिरे हुए कई बार हम धुनते हैं। हो सकता है कि दफ्तर के ई-मेल में हजारों मेल देखकर आपका दिल अपने बाल नोचने का करता हो। हर रोज आप इस ढेर को साफ करने की सोच कर काम शुरू करते हैं, फिर मेल का जखीरा देख कर आप इसे अगली बार पर टाल देते हों। ये ई-मेल और दूसरे डिजिटल डाटा का ढेर आपके लिए मुसीबत बनता जा रहा है। 

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आपकी दिमागी सेहत पर असर डाल रहा है। बहुत से लोगों की आदत होती है कि काम होने के बाद भी मेल डिलीट नहीं करते। डॉक्यूमेंट बचाकर रखते हैं। तस्वीरें सहेजते रहते हैं। इस उम्मीद में कि आगे चल शायद इनकी कभी जरूरत पड़े। नतीजा ये कि जब जरूरत पड़ती है, तो हम डिजिटल कचरे के ढेर के नीचे खुद को दबाते जा रहे हैं। डिजिटल जमाखोरी जुमले का इस्तेमाल सबसे पहले साल 2015 में एक रिसर्च पेपर में हुआ था। नीदरलैंड के वैज्ञानिकों ने वहां के एक आदमी के बारे में लिखा था कि वो हर रोज हजारों तस्वीरें खींचता था फिर घंटों उन तस्वीरों की प्रोसेसिंग का काम करता था। अखबार ने लिखा था कि, 'वो आदमी अपनी खींची तस्वीरों को दोबारा देखता भी नहीं था। लेकिन उसे ये लगता था कि भविष्य में ये तस्वीरें किसी न किसी काम जरूर आएंगी।'

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डिजिटल जमाखोरी को कुछ इस तरह से परिभाषित किया गया है, 'डिजिटल फाइलों का ढेर इस कदर लगाते जाना कि उन्हें सहेजने का मकसद ही कहीं गुम हो जाए।' ये जमाखोरी का एक नया रूप है, जिसे मनोवैज्ञानिक बीमारी कहते हैं। नीदरलैंड में तस्वीरों की जमाखोरी करने वाला आदमी पहले तमाम गैरजरूरी सामानों का ढेर लगाकर रखे हुए थे। ब्रिटेन की नॉरथम्ब्रिया यूनिवर्सिटी में डिजिटल जमाखोरी पर रिसर्च करने वाले निक नीव कहते हैं कि जैसे रोजमर्रा की जिंदगी में हम बेवजह की चीजों को हटाते नहीं, सहेज कर रखते रहते हैं, ठीक वैसा ही अब डिजिटल दुनिया में भी हो रहा है।

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