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AI: एआई की रेस में दौड़ तो रहा है भारत, लेकिन 'ड्राइविंग सीट' पर सिर्फ 20% लोग! रिपोर्ट में हुआ खुलासा

Fri, 14 Aug 2026 12:08 PM IST
नीतीश कुमार टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नीतीश कुमार Updated Fri, 14 Aug 2026 12:08 PM IST
सार

भारत का वर्कफोर्स एआई को अपनाने में तेजी दिखा रहा है, लेकिन टूल इस्तेमाल करने और खुद एआई सॉल्यूशन तैयार करने के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर लोग एआई का उपयोग कर रहे हैं, जबकि बहुत कम लोग इससे कुछ बना रहे हैं।

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प्रोफेशनल्स में बढ़ा एआई का इस्तेमाल - फोटो : AdobeStock

विस्तार

भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल अब सिर्फ टेक इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रह गया है। ऑफिस के काम से लेकर रिसर्च और रोजमर्रा के टास्क तक, कर्मचारी तेजी से एआई टूल्स का सहारा ले रहे हैं। हालांकि, एक नई रिपोर्ट ने इस बढ़ते एआई इस्तेमाल की दूसरी तस्वीर भी सामने रखी है। इस रिपोर्ट में एआई इस्तेमाल करने वालों और एआई बनाने वालों के बीच बड़ा अंतर साफ झलकता है।
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दिग्गज एडटेक कंपनी 'अपग्रैड' (upGrad) की हालिया रिपोर्ट 'स्किल शिफ्ट - एनुअल रिपोर्ट ऑन इंडियाज एआई स्किलिंग' के जरिए बेहद दिलचस्प और आंखें खोलने वाली सच्चाई पेश की है। एक परिपक्व नजरिए से देखें, तो यह रिपोर्ट भारत के भविष्य के जॉब मार्केट की असली तस्वीर पेश करती है।
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एआई इस्तेमाल कर रहे 94%, लेकिन बनाने वाले सिर्फ 20%
  • अपग्रैड ने भारत के अलग-अलग शहरों और करियर के विभिन्न पड़ावों पर खड़े 2,075 प्रोफेशनल्स के बीच यह सर्वे किया। रिपोर्ट के मुताबिक, 94% लोग पहले से ही अपने काम में एआई टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन जब एआई की मदद से कुछ नया तैयार करने की बात आती है, तो तस्वीर काफी अलग नजर आती है।
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  • हैरानी की बात यह है कि इनमें से सिर्फ 26% लोगों ने ही एआई को दूसरे टूल्स या API के साथ जोड़कर कुछ नया करने की कोशिश की। और जब बात खुद का एआई पावर्ड ऑटोमेशन, कोई एप या एआई एजेंट बनाने की आती है, तो यह आंकड़ा सिकुड़कर महज 20% रह जाता है। इसका सीधा सा मतलब है कि हम एआई से काम करवाना तो सीख गए हैं, लेकिन उसकी तकनीकी गहराई में उतरकर खुद का समाधान बनाने में अभी बहुत पीछे हैं।
  • यानी एआई को सवाल पूछने, कंटेंट बनाने या रोजमर्रा के काम आसान करने के लिए इस्तेमाल करना अब आम हो रहा है, लेकिन एआई की वास्तविक तकनीकी क्षमता का इस्तेमाल करके प्रोडक्ट या ऑटोमेशन तैयार करने का स्तर अभी शुरुआती दौर में है।

एआई एजेंट बनाने में स्किलिंग का बड़ा फायदा
  • रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि एआई की औपचारिक पढ़ाई या अपस्किलिंग करने वाले लोगों के बीच एआई डेवलपमेंट की क्षमता ज्यादा दिखाई देती है।
  • किसी एआई प्रोग्राम में दाखिला लेने वाले लर्नर्स के एआई एजेंट बनाने की संभावना उन लोगों की तुलना में 2.7 गुना ज्यादा रही, जो न तो किसी प्रोग्राम में शामिल थे और न ही अपस्किलिंग की तैयारी कर रहे थे।
  • एआई प्रोग्राम में शामिल 27 फीसदी लोगों ने एआई एजेंट बनाने की बात कही। इसके मुकाबले ऐसे लर्नर्स में यह आंकड़ा सिर्फ 10 फीसदी था, जो अपस्किलिंग नहीं कर रहे थे।

एआई सीखना अब करियर प्लानिंग का हिस्सा
  • रिपोर्ट सिर्फ एआई इस्तेमाल की तस्वीर नहीं दिखाती, बल्कि यह भी बताती है कि कर्मचारी भविष्य के लिए खुद को तैयार करने में एआ स्किलिंग को कितनी अहमियत दे रहे हैं।
  • सर्वे में शामिल 87 फीसदी प्रोफेशनल्स ने बताया कि वे या तो किसी एआई प्रोग्राम में दाखिला ले चुके हैं, या एआई सीखने की योजना बना रहे हैं अथवा इस दिशा में विकल्प तलाश रहे हैं।

युवाओं से ज्यादा एक्सपीरियंस्ड प्रोफेशनल्स में एआई की ललक
अक्सर माना जाता है कि नई तकनीक को युवा जल्दी सीखते हैं, लेकिन एआई के मामले में अनुभवी प्रोफेशनल्स बाजी मार रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 53% लोग रोजाना एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन अगर इसे अनुभव के चश्मे से देखें तो 8 साल से ज्यादा अनुभव वाले 31% प्रोफेशनल्स हर सप्ताह कम से कम तीन घंटे एआई सीखने में खर्च करते हैं। जबकि, शुरुआती स्तर के लर्नर्स (फ्रेशर्स) में ऐसा करने वालों की हिस्सेदारी केवल 15 फीसदी रही।

यूजर नहीं, एआई बिल्डर बनना असली चुनौती
  • रिपोर्ट का सबसे अहम संकेत यही है कि भारत में एआई अपनाने की पहली सीढ़ी तेजी से पार हो रही है। अब अगली चुनौती कर्मचारियों को सिर्फ एआई टूल इस्तेमाल करने तक सीमित रखने के बजाय उन्हें AI से वास्तविक समाधान तैयार करने की क्षमता देना है।
  • यानी आने वाले समय में सिर्फ यह जानना काफी नहीं होगा कि एआई से काम कैसे कराया जाए। ज्यादा अहम यह होगा कि एआई को दूसरे टूल्स से जोड़कर ऑटोमेशन, एजेंट और एप कैसे तैयार किए जाएं। यही बदलाव भारत के एआई वर्कफोर्स को अगले स्तर पर ले जाने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
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