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Digital Camera: कभी कैमरे बनाती थी सैमसंग, फिर क्यों छोड़ दिया कारोबार? जानिए पूरी कहानी

Thu, 13 Aug 2026 04:40 PM IST
नीतीश कुमार टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नीतीश कुमार Updated Thu, 13 Aug 2026 04:40 PM IST
सार

कुछ साल पहले तक सैमसंग भी कैमरा बाजार में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही थी। कंपनी ने NX सीरीज के तहत आकर्षक मिररलेस DSLR कैमरे भी पेश किए थे। लेकिन फिर कंपनी ने कैमरा बाजार से पूरी तरह बोरिया-बिस्तर समेट लिया। जानिए आखिर क्यों सैमसंग ने कैमरा बाजार अपना मुंह मोड़ लिया।

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why samsung quit digital dslr camera market real story
जानिए क्यों सैमसंग को बंद करना पड़ा कैमरा बिजनेस - फोटो : एआई जनरेटेड

विस्तार

एक दौर था जब सैमसंग सिर्फ टीवी, फ्रिज और मोबाइल फोन बनाने तक सीमित नहीं थी। वह कैमरे भी बनाती थी और कैमरा बाजार में अपनी जगह बनाने को लेकर काफी गंभीर थी। कंपनी ने मिररलेस कैमरों की NX सीरीज उतारी, नए लेंस बनाए और ऐसी तकनीक पर पैसा लगाया, जिससे वह Canon और Nikon जैसे पुराने खिलाड़ियों को चुनौती दे सके। लेकिन कुछ ही साल बाद सैमसंग ने ऐसा फैसला लिया, जिसने इस पूरी कहानी का रुख बदल दिया। 
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साल 2017 आते-आते सैमसंग ने डिजिटल कैमरे बनाना बंद कर दिया। यह फैसला उस समय शायद चौंकाने वाला लगा हो, लेकिन पीछे मुड़कर देखें तो इसकी वजहें काफी साफ दिखाई देती हैं। सैमसंग जिस बाजार में पैर जमाना चाहती थी, उसी बाजार की बुनियाद तेजी से बदल रही थी।
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क्या सैमसंग के कैमरों में कमी थी?

सैमसंग की NX सीरीज को पूरी तरह नाकाम कहना सही नहीं होगा। कंपनी ने मिररलेस कैमरा बाजार में कई दिलचस्प उत्पाद उतारे और तकनीक के स्तर पर भी प्रयोग किए। समस्या यह थी कि कैमरा बाजार सिर्फ कैमरा बनाने से नहीं जीता जाता।
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पेशेवर फोटोग्राफर आमतौर पर किसी एक कैमरे से ज्यादा उसके पूरे सिस्टम में निवेश करते हैं। अच्छी बॉडी के साथ लेंस, फ्लैश, बैटरी, एक्सेसरीज और कई वर्षों तक मिलने वाला सपोर्ट भी मायने रखता है।

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यहीं कैनन और निकॉन जैसी कंपनियों को बड़ा फायदा मिला। दोनों कंपनियों के पास दशकों से बने प्रोफेशनल यूजर्स का भरोसा और एक मजबूत कैमरा इकोसिस्टम था। बाद में सोनी (Sony) ने भी मिररलेस बाजार में तेजी से अपनी जगह बना ली।

सैमसंग के सामने मुश्किल यह थी कि उसे ऐसे बाजार में जगह बनानी थी, जहां ग्राहक पहले से ही दूसरे ब्रांडों के सिस्टम में गहरे निवेश कर चुके थे।

कुछ यूजर्स ने NX कैमरों की तकनीकी सीमाओं, बटन और कंट्रोल के अनुभव और लेंस की कीमतों को लेकर भी असंतोष जताया। लेकिन यह सिर्फ उत्पाद की कमी की कहानी नहीं थी। असल परेशानी बाजार की बदलती दिशा थी।

स्मार्टफोन कैसे बने दुश्मन?

सैमसंग के कैमरा कारोबार को असली चोट शायद किसी कैनन या निकॉन के कैमरे से नहीं, बल्कि उसी कंपनी के स्मार्टफोन कारोबार से लगी। स्मार्टफोन लगातार बेहतर कैमरों के साथ आने लगे। पहले फोन से सिर्फ सामान्य तस्वीरें ली जाती थीं। फिर ऑटोफोकस बेहतर हुआ, एक से ज्यादा कैमरे आने लगे, HDR बेहतर हुआ और सॉफ्टवेयर ने तस्वीरों को अपने आप सुधारना शुरू कर दिया।

धीरे-धीरे एक ऐसा बदलाव आया जिसमें आम आदमी के लिए अलग कैमरा खरीदने की जरूरत ही कम होती गई। यही वजह रही कि सबसे पहले सस्ता और एंट्री-लेवल डिजिटल कैमरा बाजार कमजोर हुआ। सैमसंग के लिए यह खासा महत्वपूर्ण था, क्योंकि कंपनी का अनुभव बड़े पैमाने पर आम उपभोक्ताओं के इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद बेचने का था।

डिजिटल कैमरों की बिक्री में आया भारी बदलाव

पूरी तस्वीर आंकड़ों से और साफ हो जाती है। 2010 में दुनिया भर में करीब 12 करोड़ डिजिटल कैमरे बिके थे। 2025 तक यह संख्या घटकर एक करोड़ यूनिट से भी नीचे पहुंच गई। यानी करीब डेढ़ दशक में बाजार का आकार कई गुना सिकुड़ गया।

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ऐसे माहौल में किसी कंपनी के लिए कैमरा कारोबार में बड़ा निवेश जारी रखना आसान नहीं था। खासकर तब, जब उसी कंपनी के स्मार्टफोन लगातार बेहतर कैमरा दे रहे हों और ग्राहक धीरे-धीरे अलग कैमरे से दूर हो रहे हों। सैमसंग ने शायद यही समझा कि भविष्य अलग कैमरा बेचने में नहीं, बल्कि स्मार्टफोन को ही बेहतर कैमरा बनाने में है।

तो क्या पारंपरिक कैमरों का युग खत्म हो गया?

आज के दौर में सैमसंग गैलेक्सी S26 अल्ट्रा जैसे फोन स्मूथ जूम, एआई सॉफ्टवेयर और बेहतरीन स्टेबिलाइजेशन के साथ आते हैं। स्मार्टफोन और हाई-एंड कैमरों के बीच का फासला बहुत हद तक कम हो गया है। लेकिन क्या स्मार्टफोन ने असली पेशेवर कैमरों की जगह ले ली है? इसका जवाब है- बिल्कुल नहीं।

स्मार्टफोन चाहे कितनी भी एडवांस एआई (AI) तकनीक का इस्तेमाल कर ले, वह पारंपरिक कैमरों में लगने वाले बड़े फिजिकल सेंसर और हाई क्वालिटी लेंस की जगह नहीं ले सकते। कम रोशनी में बेहतरीन नॉइज-फ्री तस्वीर और 'डेप्थ ऑफ फील्ड' के मामले में आज भी प्रोफेशनल फोटोग्राफर्स महंगे मिररलेस कैमरों पर ही आंख मूंदकर भरोसा करते हैं। हालांकि युवाओं में आजकल विंटेज और कॉम्पैक्ट कैमरों का ट्रेंड वापस लौटता दिख रहा है, लेकिन यह बाजार की गिरती सेल्स को दोबारा खड़ा करने के लिए काफी नहीं है।
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