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Hacking: एशिया-प्रशांत में हैकर्स के सबसे बड़े निशानों में शामिल हुआ भारत, AI से हमले हुए और भी घातक
Fri, 14 Aug 2026 08:20 AM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Fri, 14 Aug 2026 08:20 AM IST
सार
कैस्परस्की (Kaspersky) की ताजा रिपोर्ट ने भारत की साइबर सुरक्षा को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। भारत अब एशिया-प्रशांत (APAC) क्षेत्र में उन टॉप 5 देशों में शामिल है, जिन पर 'एडवांस्ड पर्सिस्टेंट थ्रेट' (APT) वाले बेहद जटिल और खतरनाक साइबर हमले सबसे ज्यादा हो रहे हैं।
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साइबर हमलावरों के हाई टारगेट पर भारत
- फोटो : AI
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विस्तार
हम जिस डिजिटल दुनिया में तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं, वहां खतरे भी उतनी ही रफ्तार से हमारे सिस्टम्स में सेंध लगा रहे हैं। मशहूर साइबर सिक्योरिटी फर्म Kaspersky की 'ग्लोबल रिसर्च एंड एनालिसिस टीम' की एक नई रिपोर्ट ने भारत के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अब एशिया-प्रशांत (APAC) क्षेत्र के उन शीर्ष पांच देशों में शुमार हो गया है, जो 'एडवांस्ड पर्सिस्टेंट थ्रेट्स' (APT) यानी बेहद उन्नत और सुनियोजित साइबर हमलों के रडार पर हैं।
इस लिस्ट में भारत के साथ चीन, म्यांमार, पाकिस्तान और वियतनाम जैसे देश भी शामिल हैं। यह कोई आम वायरस या मालवेयर का हमला नहीं है; APT का मतलब है कि हैकर्स महीनों तक चुपचाप आपके नेटवर्क में बैठे रहते हैं और बेहद अहम डेटा चुराते हैं।
AI ने हैकर्स के हाथों में थमा दिया है 'ब्रह्मास्त्र'
सबसे डराने वाली बात यह है कि हैकर्स अब अपने हमलों को अंजाम देने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। कैस्परस्की की टीम के अनुसार, साइबर अपराधी अब AI की मदद से सिस्टम की कमजोरियों को तेज़ी से ढूंढ़ रहे हैं, नए मालवेयर बना रहे हैं और अपने हमलों का दायरा बढ़ा रहे हैं।
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हालांकि, साल 2026 की पहली छमाही में कुछ श्रेणियों के साइबर हमलों में हल्की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन इसके बावजूद कैस्परस्की ने APAC क्षेत्र में 75 मिलियन (साढ़े सात करोड़) हमलों को ब्लॉक किया। इनमें 34 लाख बैकडोर अटैक, 24 लाख पासवर्ड चुराने वाले अटैक और 2.5 लाख रैंसमवेयर (फिरौती मांगने वाले) हमले शामिल थे।
कैस्परस्की GReAT के APAC और META रिसर्च यूनिट के प्रमुख, सर्गेई लोजकिन ने इस खतरे को समझाते हुए कहा, "APAC क्षेत्र में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और एआई का तेज़ी से इस्तेमाल हो रहा है। यहाँ के जटिल भू-राजनीतिक हालात भी हैकर्स को इन देशों पर बड़े और उन्नत हमले करने के लिए उकसाते हैं।"
आखिर APT हमला होता क्या है?
एडवांस परजिस्टेंट थ्रेट्स यानी एपीटी (APT) किसी सामान्य साइबर हमले से काफी अलग होता है। इसमें हमलावर किसी नेटवर्क में अनधिकृत तरीके से प्रवेश करने के बाद तुरंत नुकसान पहुंचाने के बजाय लंबे समय तक छिपे रहने की कोशिश करते हैं।
इस दौरान वे संवेदनशील जानकारी जुटा सकते हैं, सिस्टम की निगरानी कर सकते हैं या भविष्य में किसी बड़े हमले के लिए रास्ता तैयार कर सकते हैं। यानी खतरा सिर्फ यह नहीं है कि कोई सिस्टम हैक हो जाए। असली चिंता यह है कि हमलावर अंदर पहुंचकर लंबे समय तक नजरों से बचा रहे।
कैस्परस्की के मुताबिक 2025 में दुनिया भर में हाई-सीवेरिटी साइबर घटनाओं की सबसे बड़ी श्रेणी APT रही, जिसकी हिस्सेदारी 24 प्रतिशत थी। इसके बाद सोशल इंजीनियरिंग 15 प्रतिशत और मैलवेयर 12 प्रतिशत के साथ रहे।
भरोसेमंद सॉफ्टवेयर भी बन सकता है हमले का रास्ता
रिपोर्ट में eScan का मामला खास तौर पर उल्लेखित है। हमलावरों ने मुंबई स्थित भारतीय साइबर सुरक्षा कंपनी के इस एंटीवायरस और एंडपॉइंट सिक्योरिटी उत्पाद के अपडेट इंफ्रास्ट्रक्चर को ही निशाना बनाया। इसके बाद वैध अपडेट सर्वर का इस्तेमाल मैलवेयर पहुंचाने के लिए किया गया।
यानी यूजर जिस सिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए सुरक्षा सॉफ्टवेयर पर भरोसा कर रहा था, वही हमले का माध्यम बन गया। एक अन्य मामले में Notepad++ से जुड़े इंस्टॉलर के जरिए Trojan backdoor पहुंचाए जाने की बात सामने आई। इससे हमलावर प्रभावित सिस्टम में लंबे समय तक मौजूद रह सकते थे।
इसके अलावा Daemon Tools की आधिकारिक वेबसाइट को भी सप्लाई-चेन हमले का निशाना बनाए जाने की जानकारी दी गई। अप्रैल 2026 से चल रहे इस अभियान में वैध सॉफ्टवेयर के साथ मैलवेयर जोड़ा गया और 100 से ज्यादा देशों व क्षेत्रों में 2,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए।
Open-source सॉफ्टवेयर भी निशाने पर
ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर की लोकप्रियता बढ़ने के साथ उससे जुड़े खतरे भी बढ़ रहे हैं। Kaspersky ने 2025 में 19,484 दुर्भावनापूर्ण पैकेज पकड़े, जबकि 2024 में यह संख्या 14,197 थी। यानी एक साल में करीब 37 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। Hacktool से जुड़ी डिटेक्शन भी 11 प्रतिशत बढ़कर 3,302 हो गईं।
Axios से जुड़ा मामला इस खतरे को और गंभीर बनाता है। यह लोकप्रिय JavaScript HTTP क्लाइंट लाइब्रेरी npm पर हर सप्ताह 10 करोड़ से ज्यादा डाउनलोड हासिल करती है। मार्च 2026 में हमलावरों ने Axios के एक प्रमुख मेंटेनर के npm अकाउंट से छेड़छाड़ कर उसके जरिए मैलवेयर वाले पैकेज प्रकाशित किए।
Kaspersky ने इस मामले में BlueNoroff से जुड़े पुराने अभियानों के साथ तकनीकी समानताएं भी पाईं। BlueNoroff को Kaspersky, Lazarus Group से जुड़ा वित्तीय रूप से प्रेरित समूह बताती है, जो वित्तीय संस्थानों और क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म को निशाना बनाता है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह रिपोर्ट?
भारत में डिजिटल पेमेंट, क्लाउड सेवाओं, AI, ऑनलाइन कारोबार और डिजिटल सरकारी सेवाओं का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। इसका फायदा आम लोगों और कंपनियों को तो मिल रहा है, लेकिन दूसरी तरफ एक बड़ा डिजिटल अटैक सरफेस भी तैयार हो रहा है।
ऐसे में साइबर सुरक्षा का मतलब केवल एंटीवायरस इंस्टॉल करना या मजबूत पासवर्ड रखना नहीं रह गया है। कंपनियों को यह भी देखना होगा कि वे जिन सॉफ्टवेयर, अपडेट और थर्ड-पार्टी सेवाओं पर भरोसा कर रही हैं, वे खुद कितनी सुरक्षित हैं।
Kaspersky की रिपोर्ट का सबसे बड़ा संदेश यही है कि साइबर हमले अब ज्यादा लक्षित, लंबे समय तक चलने वाले और अप्रत्यक्ष हो रहे हैं। भारत जैसे तेजी से डिजिटल होते देश के लिए लगातार थ्रेट मॉनिटरिंग, मजबूत साइबर डिफेंस और सुरक्षित सॉफ्टवेयर सप्लाई चेन अब विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बनती जा रही है।
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इस लिस्ट में भारत के साथ चीन, म्यांमार, पाकिस्तान और वियतनाम जैसे देश भी शामिल हैं। यह कोई आम वायरस या मालवेयर का हमला नहीं है; APT का मतलब है कि हैकर्स महीनों तक चुपचाप आपके नेटवर्क में बैठे रहते हैं और बेहद अहम डेटा चुराते हैं।
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AI ने हैकर्स के हाथों में थमा दिया है 'ब्रह्मास्त्र'
सबसे डराने वाली बात यह है कि हैकर्स अब अपने हमलों को अंजाम देने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। कैस्परस्की की टीम के अनुसार, साइबर अपराधी अब AI की मदद से सिस्टम की कमजोरियों को तेज़ी से ढूंढ़ रहे हैं, नए मालवेयर बना रहे हैं और अपने हमलों का दायरा बढ़ा रहे हैं।
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हालांकि, साल 2026 की पहली छमाही में कुछ श्रेणियों के साइबर हमलों में हल्की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन इसके बावजूद कैस्परस्की ने APAC क्षेत्र में 75 मिलियन (साढ़े सात करोड़) हमलों को ब्लॉक किया। इनमें 34 लाख बैकडोर अटैक, 24 लाख पासवर्ड चुराने वाले अटैक और 2.5 लाख रैंसमवेयर (फिरौती मांगने वाले) हमले शामिल थे।
कैस्परस्की GReAT के APAC और META रिसर्च यूनिट के प्रमुख, सर्गेई लोजकिन ने इस खतरे को समझाते हुए कहा, "APAC क्षेत्र में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और एआई का तेज़ी से इस्तेमाल हो रहा है। यहाँ के जटिल भू-राजनीतिक हालात भी हैकर्स को इन देशों पर बड़े और उन्नत हमले करने के लिए उकसाते हैं।"
आखिर APT हमला होता क्या है?
एडवांस परजिस्टेंट थ्रेट्स यानी एपीटी (APT) किसी सामान्य साइबर हमले से काफी अलग होता है। इसमें हमलावर किसी नेटवर्क में अनधिकृत तरीके से प्रवेश करने के बाद तुरंत नुकसान पहुंचाने के बजाय लंबे समय तक छिपे रहने की कोशिश करते हैं।
इस दौरान वे संवेदनशील जानकारी जुटा सकते हैं, सिस्टम की निगरानी कर सकते हैं या भविष्य में किसी बड़े हमले के लिए रास्ता तैयार कर सकते हैं। यानी खतरा सिर्फ यह नहीं है कि कोई सिस्टम हैक हो जाए। असली चिंता यह है कि हमलावर अंदर पहुंचकर लंबे समय तक नजरों से बचा रहे।
कैस्परस्की के मुताबिक 2025 में दुनिया भर में हाई-सीवेरिटी साइबर घटनाओं की सबसे बड़ी श्रेणी APT रही, जिसकी हिस्सेदारी 24 प्रतिशत थी। इसके बाद सोशल इंजीनियरिंग 15 प्रतिशत और मैलवेयर 12 प्रतिशत के साथ रहे।
भरोसेमंद सॉफ्टवेयर भी बन सकता है हमले का रास्ता
रिपोर्ट में eScan का मामला खास तौर पर उल्लेखित है। हमलावरों ने मुंबई स्थित भारतीय साइबर सुरक्षा कंपनी के इस एंटीवायरस और एंडपॉइंट सिक्योरिटी उत्पाद के अपडेट इंफ्रास्ट्रक्चर को ही निशाना बनाया। इसके बाद वैध अपडेट सर्वर का इस्तेमाल मैलवेयर पहुंचाने के लिए किया गया।
यानी यूजर जिस सिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए सुरक्षा सॉफ्टवेयर पर भरोसा कर रहा था, वही हमले का माध्यम बन गया। एक अन्य मामले में Notepad++ से जुड़े इंस्टॉलर के जरिए Trojan backdoor पहुंचाए जाने की बात सामने आई। इससे हमलावर प्रभावित सिस्टम में लंबे समय तक मौजूद रह सकते थे।
इसके अलावा Daemon Tools की आधिकारिक वेबसाइट को भी सप्लाई-चेन हमले का निशाना बनाए जाने की जानकारी दी गई। अप्रैल 2026 से चल रहे इस अभियान में वैध सॉफ्टवेयर के साथ मैलवेयर जोड़ा गया और 100 से ज्यादा देशों व क्षेत्रों में 2,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए।
Open-source सॉफ्टवेयर भी निशाने पर
ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर की लोकप्रियता बढ़ने के साथ उससे जुड़े खतरे भी बढ़ रहे हैं। Kaspersky ने 2025 में 19,484 दुर्भावनापूर्ण पैकेज पकड़े, जबकि 2024 में यह संख्या 14,197 थी। यानी एक साल में करीब 37 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। Hacktool से जुड़ी डिटेक्शन भी 11 प्रतिशत बढ़कर 3,302 हो गईं।
Axios से जुड़ा मामला इस खतरे को और गंभीर बनाता है। यह लोकप्रिय JavaScript HTTP क्लाइंट लाइब्रेरी npm पर हर सप्ताह 10 करोड़ से ज्यादा डाउनलोड हासिल करती है। मार्च 2026 में हमलावरों ने Axios के एक प्रमुख मेंटेनर के npm अकाउंट से छेड़छाड़ कर उसके जरिए मैलवेयर वाले पैकेज प्रकाशित किए।
Kaspersky ने इस मामले में BlueNoroff से जुड़े पुराने अभियानों के साथ तकनीकी समानताएं भी पाईं। BlueNoroff को Kaspersky, Lazarus Group से जुड़ा वित्तीय रूप से प्रेरित समूह बताती है, जो वित्तीय संस्थानों और क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म को निशाना बनाता है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह रिपोर्ट?
भारत में डिजिटल पेमेंट, क्लाउड सेवाओं, AI, ऑनलाइन कारोबार और डिजिटल सरकारी सेवाओं का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। इसका फायदा आम लोगों और कंपनियों को तो मिल रहा है, लेकिन दूसरी तरफ एक बड़ा डिजिटल अटैक सरफेस भी तैयार हो रहा है।
ऐसे में साइबर सुरक्षा का मतलब केवल एंटीवायरस इंस्टॉल करना या मजबूत पासवर्ड रखना नहीं रह गया है। कंपनियों को यह भी देखना होगा कि वे जिन सॉफ्टवेयर, अपडेट और थर्ड-पार्टी सेवाओं पर भरोसा कर रही हैं, वे खुद कितनी सुरक्षित हैं।
Kaspersky की रिपोर्ट का सबसे बड़ा संदेश यही है कि साइबर हमले अब ज्यादा लक्षित, लंबे समय तक चलने वाले और अप्रत्यक्ष हो रहे हैं। भारत जैसे तेजी से डिजिटल होते देश के लिए लगातार थ्रेट मॉनिटरिंग, मजबूत साइबर डिफेंस और सुरक्षित सॉफ्टवेयर सप्लाई चेन अब विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बनती जा रही है।